UP News: मशीनें चलीं, पर जेबें खाली… मलकपुर मिल की ‘मीठी’ बेवफाई पर बागपत के किसानों में उबाल, दे डाली चेतावनी – INA

UP News: मशीनें चलीं, पर जेबें खाली… मलकपुर मिल की ‘मीठी’ बेवफाई पर बागपत के किसानों में उबाल, दे डाली चेतावनी – INA

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में स्थित मलकपुर चीनी मिल पर किसानों का करोड़ों रुपए बकाया है. किसान आए दिन दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं, लेकिन उनका भुगतान नहीं हो पा रहा है. दरअसल, गन्ना किसानों की मेहनत की कमाई को बागपत की मलकपुर शुगर चीनी मिल ने लंबे समय से बकाया के रूप में रोक रखा है, जिसकी वजह से क्षेत्र के किसान आर्थिक तंगी में जूझ रहे हैं. मिल ने 26 जनवरी के बाद का भुगतान रोका हुआ है, और अब मलकपुर मिल पर लगभग 184 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया हो गया है. इसके चलते किसानों में भारी रोष व्याप्त है और वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं.

मलकपुर शुगर चीनी मिल में नया पेराई सत्र 2025-26 आरंभ हो गया है, लेकिन गन्ना किसान अब भी अपने पुराने भुगतान का इंतजार कर रहे हैं. मिल में हवन और विधिवत पूजा कर मशीनों को चालू किया गया. यूनिट हेड विपिन चौधरी, गन्ना जीएम मुकेश मलिक सहित कर्मचारियों ने हवन यज्ञ कर मशीनें चालू कीं. इस दौरान मिल पर आए बरवाला गांव निवासी किसान बिजेंद्र ने बताया कि उनका 1 लाख, सुरेंद्र निवासी बरवाला का 1.75 लाख, विशु निवासी बरवाला का 2 लाख, खड़खड़ी गॉव निवासी देशपाल का 1.20 लाख, रुस्तमपुर निवासी सतपाल राणा का 1.5 लाख, और पवन का करीब 50 हजार रुपये मिल पर बकाया है. ये केवल कुछ नाम हैं, जबकि जिले और आसपास के सैकड़ों किसान इसी संकट से जूझ रहे हैं.

‘परिवार की रीढ़ है गन्ना’

किसानों का कहना है कि गन्ना उनके परिवार की रीढ़ है, और अब यही रीढ़ टूटने के कगार पर है. मिल पर मौजूद किसानों ने बताया कि कई परिवारों में बेटियों की शादी थी, बच्चों की स्कूल फीस, और पशुओं के चारे और दवाओं की जरूरत थी. लेकिन मिल द्वारा भुगतान न किए जाने से किसान उधार, साहूकारों और बैंकों की देरी वाली प्रक्रियाओं के सहारे मजबूर होकर झुकने पर विवश हो गए हैं. किसानों ने कटाक्ष करते हुए कहा कि उनकी मेहनत और लहू से बनी चीनी मीठी जरूर है, लेकिन मिल प्रबंधन का रवैया किसान के जख्मों में नमक छिड़कने जैसा है.

बकाया भुगतान के लिए भटक रहे किसान

इधर, आश्चर्यजनक बात यह है कि किसानों का बकाया चुकाए बिना ही गुरुवार को मलकपुर शुगर चीनी मिल ने पेराई सत्र 2025-26 का विधिवत शुभारंभ कर दिया. जबकि किसान अपने भुगतान के लिए दर-दर भटक रहे हैं. किसानों ने कहा कि यह किसी कार्यक्रम का शुभारंभ नहीं, बल्कि किसानों के धैर्य की परीक्षा है. जब तक बकाया भुगतान नहीं होता, तब तक नया सत्र किसानों के लिए केवल कागजी उत्सव है. किसानों ने सरकार और गन्ना विभाग से सख्त कार्रवाई की मांग की है. किसानों का कहना है कि जब तक बकाया नहीं मिलता, वे आवाज उठाते रहेंगे और यदि जरूरत पड़ी तो धरना-प्रदर्शन और सड़क आंदोलन भी किए जाएंगे. उन्होंने साफ कहा कि मिल चलाने से पहले किसान का पैसा लौटाओ. पसीने की कमाई किसी की जागीर नहीं है.

मशीनें चलीं, पर जेबें खाली… मलकपुर मिल की ‘मीठी’ बेवफाई पर बागपत के किसानों में उबाल, दे डाली चेतावनी




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उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में स्थित मलकपुर चीनी मिल पर किसानों का करोड़ों रुपए बकाया है. किसान आए दिन दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं, लेकिन उनका भुगतान नहीं हो पा रहा है. दरअसल, गन्ना किसानों की मेहनत की कमाई को बागपत की मलकपुर शुगर चीनी मिल ने लंबे समय से बकाया के रूप में रोक रखा है, जिसकी वजह से क्षेत्र के किसान आर्थिक तंगी में जूझ रहे हैं. मिल ने 26 जनवरी के बाद का भुगतान रोका हुआ है, और अब मलकपुर मिल पर लगभग 184 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया हो गया है. इसके चलते किसानों में भारी रोष व्याप्त है और वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं.

मलकपुर शुगर चीनी मिल में नया पेराई सत्र 2025-26 आरंभ हो गया है, लेकिन गन्ना किसान अब भी अपने पुराने भुगतान का इंतजार कर रहे हैं. मिल में हवन और विधिवत पूजा कर मशीनों को चालू किया गया. यूनिट हेड विपिन चौधरी, गन्ना जीएम मुकेश मलिक सहित कर्मचारियों ने हवन यज्ञ कर मशीनें चालू कीं. इस दौरान मिल पर आए बरवाला गांव निवासी किसान बिजेंद्र ने बताया कि उनका 1 लाख, सुरेंद्र निवासी बरवाला का 1.75 लाख, विशु निवासी बरवाला का 2 लाख, खड़खड़ी गॉव निवासी देशपाल का 1.20 लाख, रुस्तमपुर निवासी सतपाल राणा का 1.5 लाख, और पवन का करीब 50 हजार रुपये मिल पर बकाया है. ये केवल कुछ नाम हैं, जबकि जिले और आसपास के सैकड़ों किसान इसी संकट से जूझ रहे हैं.

‘परिवार की रीढ़ है गन्ना’

किसानों का कहना है कि गन्ना उनके परिवार की रीढ़ है, और अब यही रीढ़ टूटने के कगार पर है. मिल पर मौजूद किसानों ने बताया कि कई परिवारों में बेटियों की शादी थी, बच्चों की स्कूल फीस, और पशुओं के चारे और दवाओं की जरूरत थी. लेकिन मिल द्वारा भुगतान न किए जाने से किसान उधार, साहूकारों और बैंकों की देरी वाली प्रक्रियाओं के सहारे मजबूर होकर झुकने पर विवश हो गए हैं. किसानों ने कटाक्ष करते हुए कहा कि उनकी मेहनत और लहू से बनी चीनी मीठी जरूर है, लेकिन मिल प्रबंधन का रवैया किसान के जख्मों में नमक छिड़कने जैसा है.

बकाया भुगतान के लिए भटक रहे किसान

इधर, आश्चर्यजनक बात यह है कि किसानों का बकाया चुकाए बिना ही गुरुवार को मलकपुर शुगर चीनी मिल ने पेराई सत्र 2025-26 का विधिवत शुभारंभ कर दिया. जबकि किसान अपने भुगतान के लिए दर-दर भटक रहे हैं. किसानों ने कहा कि यह किसी कार्यक्रम का शुभारंभ नहीं, बल्कि किसानों के धैर्य की परीक्षा है. जब तक बकाया भुगतान नहीं होता, तब तक नया सत्र किसानों के लिए केवल कागजी उत्सव है. किसानों ने सरकार और गन्ना विभाग से सख्त कार्रवाई की मांग की है. किसानों का कहना है कि जब तक बकाया नहीं मिलता, वे आवाज उठाते रहेंगे और यदि जरूरत पड़ी तो धरना-प्रदर्शन और सड़क आंदोलन भी किए जाएंगे. उन्होंने साफ कहा कि मिल चलाने से पहले किसान का पैसा लौटाओ. पसीने की कमाई किसी की जागीर नहीं है.

मशीनें चलीं, पर जेबें खाली… मलकपुर मिल की ‘मीठी’ बेवफाई पर बागपत के किसानों में उबाल, दे डाली चेतावनी




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