UP News: ‘मेरी मां मर गई, पिता ने छोड़ दिया, फिर भी अफसर बनूंगी…’, मासूम राधिका की कहानी सुन DM-SP भी हो गए भावुक – INA

UP News: ‘मेरी मां मर गई, पिता ने छोड़ दिया, फिर भी अफसर बनूंगी…’, मासूम राधिका की कहानी सुन DM-SP भी हो गए भावुक – INA

मेरी मां मर गई है और पापा मुझे छोड़कर चले गए. लेकिन सर, मैं पढ़-लिखकर बड़ी अफसर बनना चाहती हूं… ये शब्द जब जन चौपाल के मंच पर 8 वर्षीय मासूम राधिका ने कांपती आवाज में कहे, तो पल भर में पूरा माहौल भावुक हो गया. मंच पर मौजूद अधिकारी, कर्मचारी और ग्रामीण सभी की आंखें नम हो गईं. यह दृश्य था जालौन के विकासखंड रामपुरा की ग्राम पंचायत कंझारी में आयोजित जन चौपाल का, जहां प्रशासन की संवेदनशीलता ने एक अनाथ बच्ची के भविष्य को नई दिशा दे दी.

शासन की मंशा के अनुरूप जालौन जिले में जिला प्रशासन द्वारा जन चौपालों के माध्यम से पात्र लोगों को सरकारी योजनाओं से जोड़ा जा रहा है. इसी क्रम में कंझारी गांव में आयोजित जन चौपाल के दौरान राधिका मंच पर पहुंची और अपनी दर्दभरी कहानी अधिकारियों के सामने रखी. उसने बताया कि उसकी मां का देहांत हो चुका है और पिता ने उसे छोड़ दिया है, जिसके बाद से वह असहाय स्थिति में जीवन जी रही है. बावजूद इसके, उसकी आंखों में सपने हैं वह पढ़-लिखकर एक दिन बड़ी अफसर बनना चाहती है.

राधिका की बात सुनकर जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय और पुलिस अधीक्षक डॉ. दुर्गेश कुमार भावुक हो उठे. दोनों अधिकारियों ने तुरंत राधिका को मंच पर अपने पास बैठाया और उसे ढांढस बंधाया. डीएम राजेश कुमार पाण्डेय ने सार्वजनिक रूप से घोषणा करते हुए कहा कि राधिका की पढ़ाई और आवश्यक जरूरतों की पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन उठाएगा. उन्होंने कहा कि ये सिर्फ एक बच्ची नहीं, बल्कि जिले का भविष्य है और उसके सपनों को साकार करना प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है.

डीएम ने तत्काल सुधार के निर्देश दिए

मौके पर ही डीएम ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि राधिका को बाल सेवा योजना, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना सहित सभी पात्र सरकारी योजनाओं का लाभ तत्काल दिलाया जाए, ताकि उसके भविष्य में किसी भी तरह की आर्थिक बाधा न आए. इसके बाद डीएम और एसपी ने गांव का पैदल भ्रमण कर विभिन्न सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत परखी. आवास, पेंशन, राशन कार्ड, आयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना और स्वच्छ भारत अभियान के तहत कार्यों का सत्यापन किया गया. जहां भी कमियां पाई गईं, वहां तत्काल सुधार के निर्देश दिए गए.

बच्चों के खेलने के लिए कोई मैदान नहीं

निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि गांव में बच्चों के खेलने के लिए कोई मैदान नहीं है. इस पर डीएम ने कड़े निर्देश देते हुए 31 मार्च 2026 तक खेल मैदान का निर्माण पूरा कराने का आदेश दिया. साथ ही गांव के तालाब के सौंदर्यीकरण, पाथवे निर्माण और व्यापक वृक्षारोपण के निर्देश भी दिए गए, ताकि ग्रामीणों को बेहतर वातावरण और सुविधाएं मिल सकें.

राधिका की यह कहानी केवल एक बच्ची की मदद तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह संवेदनशील प्रशासन और सुशासन की एक जीवंत मिसाल बन गई. इस घटना ने यह साबित कर दिया कि जब अधिकारी जनता से सीधे संवाद करते हैं और उनकी पीड़ा को समझते हैं, तो योजनाएं कागजों से निकलकर इंसानियत का रूप ले लेती हैं. राधिका की हिम्मत और जज्बे ने न सिर्फ प्रशासन को झकझोरा, बल्कि पूरे गांव के विकास को भी नई गति दे दी.

‘मेरी मां मर गई, पिता ने छोड़ दिया, फिर भी अफसर बनूंगी…’, मासूम राधिका की कहानी सुन DM-SP भी हो गए भावुक




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