UP News: न अपराध न अराजकता ना ही वंशवाद… सुरक्षा की गारंटी और डबल इंजन सरकार से डेवलपमेंट में ऐसे झंडे गाड़ रहा है यूपी – INA


उत्तर प्रदेश जहां संस्कृति किसी कालखंड तक सीमित नहीं रही. जहां धर्म शासन का आधार व जीवन-दर्शन रहा. जहां भारत की आत्मा बसती है. जहां अयोध्या में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने आदर्श शासन की संकल्पना दी, काशी में महादेव ने मोक्ष को जीवन से जोड़ा और मथुरा-वृंदावन में श्रीकृष्ण ने कर्मयोग का अमर संदेश दिया. गोस्वामी तुलसीदास, कबीर, रैदास और भारतेन्दु हरिश्चंद्र की परंपरा ने उत्तर प्रदेश को वैचारिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भारत का केंद्र बनाया, लेकिन इतिहास की एक विडंबना यह भी रही कि जिस राज्य ने देश को नैतिकता, शासन और सामाजिक चेतना का मार्ग दिखाया, वही लंबे समय तक कुशासन, अव्यवस्था और विकासहीनता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया जाता रहा. समय के साथ उत्तर प्रदेश की पहचान धीरे-धीरे बीमारू राज्य, अपराध-अराजकता और वंशवाद तक सीमित रह गई जिससे उसकी असल क्षमता और ऐतिहासिक भूमिका हाशिए पर चली गई.
निवेशकों को भरोसा नहीं था, युवाओं के सपने दम तोड़ रहे थे, इन हालातों में राज्य की क्षमताओं पर ही प्रश्नचिह्न लग गया था लेकिन अब परिदृश्य बदल चुका है. डबल इंजन सरकार की नीति से लेकर क्रियान्वयन तक की निरंतरता के चलते आज उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य की छवि को तोड़ विकसित भारत के संकल्प की दिशा में प्रमुख भूमिका निभा रहा है.
आत्मनिर्भर भारत के विजन में उत्तर प्रदेश की भूमिका?
आज उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर यह प्रश्न बेहद प्रासंगिक है कि राज्य की स्थिति कैसे बदली और आने वाले समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करने में उत्तर प्रदेश की क्या भूमिका रहने वाली है? पिछले एक दशक के अनुभव और विशेष रूप से 2017 के बाद के घटनाक्रम स्पष्ट संकेत देते हैं कि उत्तर प्रदेश अब अपनी ऐतिहासिक चेतना के अनुरूप विकास की राह पर सरपट दौड़ रहा है. इस बदलाव के केंद्र में है- दूरदर्शी व दृढ़ इच्छा शक्ति वाले नेतृत्व के हाथों में देश की बागडोर होना. केंद्र व राज्य सरकार का समन्वित प्रयास, जिसे राजनीतिक भाषा में डबल इंजन सरकार भी कहा जाता है.
देश का मौजूदा नेतृत्व आज किसी भी सियासी समीकरण या राजनीतिक हानि-लाभ की गणना कर फैसले नहीं लेता, बल्कि अंत्योदय के सिद्धांत पर चलते हुए अंतिम पंक्ति के हर व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुंचाने के प्रण के साथ काम कर रहा है. इसी के चलते शासन की सोच में एक बुनियादी बदलाव आया है. मोदी सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास को नीति का जो आधार बनाया, वही उत्तर प्रदेश में भी शासन-प्रशासन की नीतियों में आत्मसात किया गया. मौजूदा निर्णायक नेतृत्व ने प्रशासनिक अनुशासन, कानून व्यवस्था, आर्थिक व वैचारिक प्रगति तथा गरीब के हक और सम्मान को प्राथमिकता दी, जिसके परिणाम उत्तर प्रदेश में भी साफ दिख रहे हैं.
केंद्र की कल्याणकारी योजनाओं का सबसे बड़ा लाभार्थी राज्य
यह कहते हुए हमें संतोष की अनुभूति होती है कि कभी जिस प्रदेश में सरकारी योजनाओं का लाभ दलालों की जेब में पहुंचता था वहीं आज गरीब कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश अग्रणी राज्यों में पहचाना जा रहा है. मनरेगा में व्याप्त भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में VB-G RAM-G कानून के जरिए 100 दिन के बजाय 125 दिन रोजगार देने का प्रावधान किया गया है. प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाखों परिवारों को पक्के मकान मिले, उज्ज्वला योजना ने महिलाओं को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराया और आयुष्मान भारत योजना ने स्वास्थ्य सुरक्षा का दायरा बढ़ाया.
मुफ्त राशन वितरण और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर जैसी व्यवस्थाओं ने यह सुनिश्चित किया कि योजनाओं का लाभ सीधे पात्र व्यक्ति तक पहुंचे. उत्तर प्रदेश, केंद्र की तमाम कल्याणकारी योजनाओं का सबसे बड़ा लाभार्थी राज्य है, जो केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय का प्रमाण है. परिणामस्वरूप राज्य का कैपिटल एक्सपेंडिचर वित्त वर्ष 202425 में बढ़कर 1.47 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो 201617 में 69,789 करोड़ रुपये था. यानी आठ वर्षों में राज्य का पूंजीगत खर्च दोगुने से भी अधिक हो गया है.
कैसे बदल रही राज्य की छवि?
बदले परिदृश्य का एक प्रमाण नीति आयोग के एक्सपोर्ट प्रिपेयर्डनेस इंडेक्स में उत्तर प्रदेश की उपलब्धि के रूप में भी सामने आता है. कल तक जिसे बीमारू राज्य कहा जाता था हालिया रैंकिंग में उसी उत्तर प्रदेश ने एक्सपोर्ट प्रिपेयर्डनेस इंडेक्स में देशभर में चौथा स्थान हासिल किया है. बिना समुद्री तट वाला राज्य होते हुए भी उत्तर प्रदेश का इस सूची में चौथे स्थान पर पहुंचना, उसकी नीतिगत तैयारी, औद्योगिक अवसंरचना और निर्यात-उन्मुख सोच का प्रमाण है. एक जिला-एक उत्पाद जैसी पहल, लॉजिस्टिक्स में सुधार और निर्यातकों के लिए अनुकूल वातावरण ने यह दिखाया है कि उत्तर प्रदेश अब वैश्विक बाजार से जुड़ता हुआ बड़ा उत्पादक राज्य बन रहा है. यह उपलब्धि राज्य की बदली हुई आर्थिक छवि को प्रदर्शित करती है.
व्यापार के लिए बने अनुकूल वातावरण के परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और उसकी जीडीपी में भागीदारी भी उल्लेखनीय है. उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था ने पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है और इसका राष्ट्रीय जीडीपी में योगदान इसके बदलते आर्थिक स्वरूप का एक स्पष्ट प्रमाण है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 202425 में उत्तर प्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) लगभग 29.78 लाख करोड़ रहा और इसका भारत की कुल जीडीपी में लगभग 8.79.2 प्रतिशत का हिस्सा रहा है, जो इसे देश के शीर्ष व्यापक अर्थव्यवस्था वाले राज्यों में स्थापित करता है. यह भागीदारी इस बात का संकेत है कि देश की सबसे अधिक आबादी वाले राज्य में औद्योगिक, सेवा और कृषि क्षेत्रों की सामूहिक वृद्धि हो रही है.
राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद आयोजित हुए ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट ने देश-विदेश के निवेशकों को आकर्षित किया. डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर जैसी पहल ने उत्तर प्रदेश को रणनीतिक औद्योगिक मानचित्र पर स्थापित किया. मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में राज्य की भागीदारी बढ़ी है, जिससे लाखों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं.ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार, सिंगल विंडो सिस्टम और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता ने उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल बनाया है.
अब अपराध-अराजकता प्रदेश की पहचान नहीं
उत्तर प्रदेश के विकास की कहानी समझने के लिए कानून-व्यवस्था की बात भी करनी होगी. 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में संगठित अपराध, माफिया राज और राजनीतिक संरक्षण की चर्चा आम थी. भाजपा सरकार आते ही यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि कानून का राज हर कीमत पर स्थापित होगा. माफिया नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई, अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर की कार्रवाई, फास्ट ट्रैक अदालतों का प्रभावी उपयोग और पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही जैसे कदमों ने राज्य की छवि में निर्णायक बदलाव किया. इसका प्रत्यक्ष असर यह हुआ कि उत्तर प्रदेश को लेकर निवेशकों का भरोसा लौटने लगा.
बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में बड़ा परिवर्तन
कानून-व्यवस्था में सुधार के बाद अगला बड़ा परिवर्तन बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में दिखाई दिया. उत्तर प्रदेश आज देश के उन राज्यों में शामिल है जहां एक्सप्रेसवे नेटवर्क सबसे तेज़ी से विकसित हुआ है. पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे ने राज्य की कनेक्टिविटी को पूरी तरह बदल दिया है. कनेक्टिविटी के इस विस्तार ने उद्योग, कृषि और व्यापार के लिए नए अवसर खोले हैं.
धार्मिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण में प्रदेश की भूमिका
विकास की इस यात्रा में धार्मिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की भूमिका को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता. अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण जागृत राष्ट्रीय चेतना का बड़ा प्रतीक है. इसके साथ ही अयोध्या का समग्र पुनर्विकास, आधुनिक हवाई अड्डा, नई सड़कें और पर्यटन सुविधाएं उत्तर प्रदेश को वैश्विक धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर स्थापित कर रही हैं. कुल मिलाकर रामचरित मानस के बालकांड में जैसा कि गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है, अयोध्या सम न कोउ नगरु, राम सम नहिं कोउ राजा के भाव को आदर्श मानते हुए डबल इंजन सरकार आज धर्म, मर्यादा और आदर्श शासन की राह पर चल रही है.
इसी तरह गोस्वामी तुलसीदास की काशी को मोक्षदायिनी नगरी के रूप में वर्णित करती पंक्ति, कासी बसै जहां अविनासी, तहां न करै भवबंध फांसी, वाराणसी की उस शाश्वत पहचान को दर्शाती है, जो उत्तर प्रदेश को सनातन चेतना का केंद्र बनाती है. इसी भाव के साथ पूरी हुई काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर परियोजना ने वाराणसी की प्राचीन आत्मा को संरक्षित रखते हुए उसे आधुनिक स्वरूप दिया. मथुरा-वृंदावन क्षेत्र में भी तीर्थ विकास और पर्यटन अवसंरचना पर विशेष ध्यान दिया गया है. मिर्जापुर स्थित मां विंध्यवासिनी धाम में कॉरिडोर निर्माण आस्था और विकास के संतुलन के उदाहरण के तौर पर हम सबके सामने है.
अर्बन नक्सलवाद का नरेटिव तोड़ा
उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर हुए इन बदलावों के जरिए केंद्र और प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी की सरकारों ने आज यह साबित कर दिया है कि सांस्कृतिक पुनरुत्थान विकास का विरोधी नहीं बल्कि उसका पूरक है. अर्बन नक्सलवाद द्वारा लंबे समय तक यह भ्रम फैलाने की कोशिश की जाती रही कि आस्था और आधुनिकता एक-दूसरे के विरोधी हैं लेकिन उत्तर प्रदेश में मोदी-योगी शासन ने इस धारणा को चुनौती दी. आज उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन से स्थानीय रोजगार बढ़ा है, छोटे व्यवसायों को नया जीवन मिला है और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है.
राज्य को मिली नई पहचान
इन सभी प्रयासों का समग्र प्रभाव उत्तर प्रदेश की छवि में हुए बदलाव के रूप में सामने आया है. जो राज्य कभी अव्यवस्था और पिछड़ेपन का प्रतीक माना जाता था, वह आज निवेश, आयोजन और नीति-निर्माण की चर्चाओं के केंद्र में है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उत्तर प्रदेश को लेकर धारणा बदली है. धार्मिक पर्यटन, औद्योगिक निवेश और बुनियादी ढांचे के विस्तार ने राज्य को नई पहचान दी है. बेशक, चुनौतियां अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं लेकिन अब उत्तर प्रदेश के पास स्पष्ट दिशा, राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रशासनिक क्षमता व जनसहभागिता की ताकत है. उत्तर प्रदेश आज यह साबित कर रहा है कि यदि नेतृत्व दूरदर्शी हो और नीति में निरंतरता हो तो दशकों की जड़ता भी टूट सकती है.
आज का उत्तर प्रदेश दिवस इसलिए भी खास है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत संकल्प के शुरुआती 20 सालों में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला है. आज का दिन उस ऐतिहासिक यात्रा का स्मरण है जिसमें हमारा राज्य भारत की आत्मा का वाहक रहा है और आज भारत के विकास का इंजन बनने की ओर अग्रसर है. राम की मर्यादा, शिव की चेतना और कृष्ण की कर्मयोगी दृष्टि आज उत्तर प्रदेश में सुशासन, विकास और आत्मविश्वास के रूप में अभिव्यक्त हो रही है. डबल इंजन सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उत्तर प्रदेश की पहचान अब अतीत के कुशासन से नहीं बल्कि वर्तमान के सुशासन और भविष्य की संभावनाओं से तय होगी.
न अपराध न अराजकता ना ही वंशवाद… सुरक्षा की गारंटी और डबल इंजन सरकार से डेवलपमेंट में ऐसे झंडे गाड़ रहा है यूपी
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