UP News: Noida Techie Death: हादसे के दिन कहां था सिस्टम? आज नाव-रस्सी और लाइफ जैकेट सबकुछ – INA


नोएडा में पुलिस, प्रशासन और प्रॉधिकरण के पास सबकुछ है, पर मौके पर अगर जरूरत पड़ जाए तो कुछ भी नहीं है. इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के चार दिन बाद जब रेस्क्यू टीम युवराज की कार को उस 70 फीट गहरे बेसमेंट से निकालने पहुंची तो उसके पास रस्सियों का बंडल था. पुलिस की एक जीप रस्सियों के बंडल से भरी थी, जबकि जिस दिन युवराज अपनी जान बचाने के लिए कार की छत पर खड़े होकर गुहार लगा रहा था… ‘प्लीज मुझे बचा लो, प्लीज मुझे बचा लो’… तो उस दिन रेस्क्यू टीम की रस्सी ही छोटी पड़ गई. शायद इतनी बड़ी रस्सी तब लेकर रेस्क्यू वाले आते तो युवराज आसानी से बाहर आ सकता था.
बता दें कि NDRF की टीम ने मंगलवार को 7 घंटे रेस्क्यू चलाकर 70 फीट गहरे बेसमेंट से युवराज की गाड़ी को बाहर निकाला. युवराज की कार को बाहर निकालने के लिए दोपहर करीब 12 बजे NDRF के गोताखोरों की टीम पहुंची थी. सात घंटे तक कड़ी मशक्कत के बाद शाम करीब सात बजे गोताखोरों की दो टीमों ने कार को बाहर निकाला. बताया जा रहा है कि 70 फीट गहरे इस बेसमेंट में दो फ्लोर थे. कार इसके बीच में जा फंसी थी. नीचे वाले हिस्से में मिट्टी ज्यादा थी, जिस जमीन दलदली थी.
गोताखोर जब बेसमेंट में नीचे गए तो उन्हें वहां सरिए भी नजर आए. युवराज की कार बाहर निकालते समय दिखा कि उसका सनरूफ खुला हुआ था. कार पूरी तरह से क्षतिग्रस्त थी, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि युवराज ने डूबने से पहले सनरूफ से बाहर निकलकर 40 मिनट तक अपनी जान बचाने की गुहार लगाई, लेकिन लापरवाह सिस्टम ने उसकी जान ले ली.
4 दिन, 7 घंटे के बाद गड्ढे से बाहर आई कार
- मंगलवार दोपहर 12:00 बजे NDRF की टीम घटनास्थल पर पहुंची.
- दोपहर करीब 1:00 बजे दो गोताखोर कंधे पर ऑक्सीजन सिलेंडर रखकर पानी में उतरे.
- 70 फीट गहरे बेसमेंट के पहले फ्लोर पर जाकर रेस्क्यू शुरू किया, लेकिन सफलता नहीं मिली. दोनों गोताखोर बाहर आ गए.
- दोपहर करीब 3:00 बजे फिर दोनों गोताखोरों ने मैग्नेटिक सेंसर के जरिए सर्च ऑपरेशन शुरू किया. कार की लोकेशन दो बेसमेंट के बीच फंसे होने की मिली.
- दोपहर करीब 4:00 दोनों गोताखोर बेसमेंट के दूसरे फ्लोर पर पहुंचे, जहां कार फंसी हुई थी.
- वहां पर मिट्टी इतनी ज्यादा दलदली थी कि कार नीचे खिसकती जा रही थी. फिर 4 और गोताखोर पानी में उतरे
- कुछ 6 गोताखोरों ने कड़ी मशक्कत के बाद रस्सी के जरिए कार को बांध दिया.
- इसी दौरान जांच के लिए SIT टीम भी मौके पर पहुंची. आधे घंटे के बाद टीम वापस चली गई.
- कार को बाहर निकालने के लिए क्रेन को मौके पर लगाया गया. शाम करीब 7 बजे कार बाहर निकाली गई.
- कार को बाहर निकालने के बाद नॉलेज पार्क थाने ले जाया गया है.
सनरूफ खोलकर बाहर आया था युवराज
NDRF टीम में प्रारंभिक जांच में बताया कि कार का सनरूफ खुला हुआ था, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि मृतक इंजीनियर युवराज मेहता सनरूफ के जरिए कार से बाहर आया होगा, लेकिन कार के पीछे और आगे दोनों साइड के शीशे टूटे हुए थे.
युवराज की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने भी उठाए सवाल
घटना के दूसरे दिन इंजीनियर युवराज मेहता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई, जिसमें पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों ने यह मेंशन किया कि पानी में डूबने और फेफड़ों में करीब 3:30 लीटर पानी भरने से सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता को कार्डियक अटैक भी आया, जिससे उसकी मौत हुई. डॉक्टरों की टीम का कहना था कि अगर समय रहते रेस्क्यू किया जाता तो युवराज की जान बचाई जा सकती थी.
नोएडा अथॉरिटी की एक और लापरवाही आई सामने
युवराज मेहता की कार निकालने के बाद अब नए-नए राज से पर्दा उठ रहा है. कल तक नोएडा अथॉरिटी के अधिकारी यह कह रहे थे कि पानी को पंप के जरिए बाहर निकल जाएगा, लेकिन यह बात सरासर झूठा निकली, क्योंकि अगर पंप के जरिए पानी बाहर निकाला जाता तो फिर उसे पानी को किन नालों में छोड़ा जाता? यह अपने आप में बहुत बड़ा सवाल है.
सिंचाई विभाग की चिट्ठी ने यह स्पष्ट किया है कि आसपास की सोसाइटियों से निकलने वाले सीवर के पानी को नालों के बजाए, इसे खाली प्लॉट में छोड़ा जा रहा था. यानी 2023 में जब सेक्टर-150 बसाया जा रहा था, तब सिंचाई विभाग ने अथॉरिटी के अधिकारियों को ऑडिट करने के बाद यह बोला था कि इस सेक्टर को बसाने से पहले पानी की निकासी का विशेष ध्यान रखना होगा, लेकिन अधिकारियों ने सिर्फ हवा-हवाई फाइलों में पानी के निकासी की मनगढ़ंत कहानी एक चिट्ठी के जरिए सुना डाली.
खतरनाक 90 डिग्री T-पॉइंट बना मौत की वजह
जब सेक्टर-150 बसाया जा रहा था, यहां बिल्डिंगें बन रही थीं, तब नोएडा अथॉरिटी के प्रोजेक्ट मैनेजर, सिविल इंजीनियर… ऐसे लोगों ने खतरनाक 90 डिग्री का T-पॉइंट बनाया, जो सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत की वजह बन गया. दिल्ली की तरफ से नोएडा आने के लिए जो एक्सप्रेस-वे हैं, उसका जो सर्विस रोड है और फिर जो रास्ता टाटा यूरेका सोसाइटी के लिए जाता है, उसके सामने बिल्कुल एक T-पॉइंट पड़ता है, जो बिल्कुल 90 डिग्री बना हुआ है. घने कोहरे की वजह से यह T-पॉइंट जानलेवा बन गया. अगर यहां समय रहते कोई बैरिकेड़िंग या दीवार बन जाती तो शायद युवराज की जान नहीं जाती.
4.5 करोड रुपए की सीवर लाइन के दावे और हकीकत
नोएडा अथॉरिटी ने 2023 में यह दावा किया था कि सेक्टर-150 में 4.5 करोड़ रुपए की लागत से सीवर सिस्टम तैयार किया गया था. लाइन बिछाने का काम पूरा हो गया है, लेकिन हादसा सामने आने के बाद यह पता चला कि सीवर लाइन को मुख्य ड्रेनेज सिस्टम से नहीं जोड़ा गया था. नतीजा यह रहा कि बारिश और आसपास इलाके से निकलने वाला पानी इस मौत के बेसमेंट में भरता चला गया.
CM योगी ने लिया संज्ञान, लेकिन सवाल अब भी बाकी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी घटना का संज्ञान लिया. तत्काल नोएडा अथॉरिटी के CEO को हटा दिया गया. अब कई ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब अभी मिलना बाकी है. जिन अधिकारियों ने सेक्टर को बसाने में लापरवाही बरती, क्या उनके खिलाफ अब कोई कार्रवाई होगी? क्या केवल एक अधिकारी को हटाना पर्याप्त है? जिस चिट्ठी का जिक्र आया, वह कहां गई? ऐसे और भी सवाल हैं, जो युवराज मेहता की मौत के बाद लापरवाह सिस्टम ने खड़े कर दिए हैं.
Noida Techie Death: हादसे के दिन कहां था सिस्टम? आज नाव-रस्सी और लाइफ जैकेट सबकुछ
देश दुनियां की खबरें पाने के लिए ग्रुप से जुड़ें,
[ad_1] #INA #INA_NEWS #INANEWSAGENCY
Copyright Disclaimer :-Under Section 107 of the Copyright Act 1976, allowance is made for “fair use” for purposes such as criticism, comment, news reporting, teaching, scholarship, and research. Fair use is a use permitted by copyright statute that might otherwise be infringing., educational or personal use tips the balance in favor of fair use.
Credit By :-This post was first published on https://www.tv9hindi.com/, we have published it via RSS feed courtesy of Source link,










