UP News: Pandit Chhannulal Mishra: कौन थे पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र, जिनकी गायकी से पूरी होती थी काशी की होली – INA

UP News: Pandit Chhannulal Mishra: कौन थे पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र, जिनकी गायकी से पूरी होती थी काशी की होली – INA

पद्मभूषण शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र का बीमारी के चलते निधन हो गया. मिर्जापुर में अपनी बेटी के घर पर उन्होंने अल सुबह 4.15 बजे अंतिम सांस ली. पंडित छन्नूलाल मिश्र को हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में उनके योगदान के लिए जाना जाता रहा है. और आगे भी देशवासी उनके इस योगदान को हमेशा याद रखेंगे.

पंडित छन्नूलाल मिश्र का 3 अगस्त 1936 को आजमगढ़ में जन्म हुआ था. उन्हें साल 2020 में पद्म विभूषण, साल 2010 में पद्मभूषण और वर्ष 2000 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है.

छन्नूलाल मिश्रा ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन में शीर्ष ग्रेड कलाकार रह चुके हैं. पंडित छन्नूलाल मिश्रा संस्कृति मंत्रालय (उत्तर-केंद्रीय) सरकार के सदस्य भी रहे हैं. पंडित छन्नूलाल मिश्र को खयाल, ठुमरी, भजन, कजरी, चैती दादरा के गायन के लिए जाना जाता था.

पंडित छन्नूलाल जी ने संगीत की शिक्षा बिहार के मुजफ्फरपुर से पूरी की. लगभग चार दशक पहले छन्नूलाल वाराणसी आ गए और यहीं पर संगीत में साधना की. लोक विधाओं के मर्मज्ञ छन्नूलाल मिश्र चैती दादरा, ठुमरी, कजरी जैसी शास्त्रीय लोग विधाओं के अनुपम मिश्रण थे.

यही नहीं, पंडित छन्नूलाल मिश्र वाराणसी के सांसद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2014 में प्रस्तावक भी रहे हैं. परिवार में पंडित छन्नूलाल मिश्र का एक बेटा रामकुमार मिश्र और चार बेटियां हैं. कोविड के समय संगीता (बेटी) की मौत हो गई. अनीता, ममता और नम्रता ये उनकी तीन बेटियां हैं.

आज वाराणसी में होगा अंतिम संस्कार

पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, पंडित छन्नूलाल मिश्रा का अंतिम संस्कार वाराणसी में किया जाएगा. ‘फागुन मास के समय खेले मसाने में होली दिगम्बर- खेले मसाने में होली’ की गायकी छन्नू लाल जी की पहचान थी. इसके बगैर काशी की होली कभी पूर्ण नहीं मानी जाती थी. एक धार्मिक भजन है जो फागुन के महीने में भगवान शिव के श्मशान घाट में भूत-पिशाचों के साथ होली खेलने का वर्णन करता है, जिसमें “दिगंबर” भगवान शिव का एक विशेषण है जो उनके नग्न रूप को दर्शाता है.

क्या बोले पद्मश्री डॉक्टर राजेश्वर आचार्य?

बनारस संगीत घराने के दिग्गज स्वर्गीय छन्नू लाल जी को याद करते हुए पद्मश्री डॉक्टर राजेश्वर आचार्य कहते हैं- छन्नूलाल जी का पूरा जीवन संघर्ष की एक मिसाल रहा है. काशी के ठाकुर जयदेव सिंह से उन्होंने संगीत की शास्त्रीय दीक्षा ली. ज्यादातर उन्होंने शास्त्रीय और उपशास्त्रीय ही गाया. एक ऐसा शख्स जो आजमगढ़ से काशी संगीत की शिक्षा लेने आया और जीवन भर उसने भारतीय संगीत की शास्त्रीय परम्परा की सेवा की. उनका जाना बनारस संगीत घराने के लिए अपूरणीय क्षति है. मैं उनको अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं.

Pandit Chhannulal Mishra: कौन थे पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र, जिनकी गायकी से पूरी होती थी काशी की होली




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