UP News: तो क्या अब औरंगाबाद का भी बदलेगा नाम? मेयर को भेजा पत्र, कहा- आपके पास ये है विकल्प – INA

यूपी के काशी में औरंगजेब के नाम पर बसे औरंगाबाद मोहल्ले का नाम बदलने की मांग को लेकर हिन्दू संगठन के लोग अबसक्रिय हो गए हैं. हिन्दू संगठन विश्व वैदिक सनातन न्यास के अध्यक्ष और उसके सदस्यों ने औरंगाबाद का नाम बदलकर शिवा नगर रखने के लिए नगर निगम में नगर आयुक्त और मेयर को प्रार्थना पत्र दिया. विश्व वैदिक सनातन न्यास के प्रमुख संतोष सिंह ने कहा कि जिस शख्स ने हमारे श्री काशी विश्वनाथ मंदिर को तुड़वाया हो उसी के नाम पर काशी में एक मोहल्ला है ये बर्दाश्त से बाहर है.
संतोष सिंह ने कहा कि हम लोगों ने औरंगाबाद का नाम बदलकर शिवा नगर रखने के लिए नगर आयुक्त और मेयर को प्रार्थना पत्र दिया है. औरंगाबाद के लोगों का भी कहना है कि 1300 साल पहले ये मोहल्ला बसा था और तब इसका नाम शिवा नगर था. औरंगजेब ने 1669 में जब काशी पर हमला किया और विश्वनाथ मंदिर तुड़वाया तब इस पूरे शहर का नाम औरंगाबाद रख दिया, लेकिन बनारस वासियों ने ये नाम स्वीकार नहीं किए. ऐसे में धीरे धीरे औरंगाबाद एक मोहल्ले तक सिमट कर रह गया.
फिर से रखा जाना चाहिए मोहल्ले का पुराना नाम
संतोष सिंह ने कहा कि मोहल्ले का पुराना नाम शिवा नगर फिर से रखा जाना चाहिए. काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में मध्यकालीन भारत (मिडिवल हिस्ट्री )के प्रोफेसर राजीव श्रीवास्तव बताते हैं कि दारा शिकोह संस्कृत का अध्ययन करने यहां आया था. शिकोह ने यहीं रहकर गीता, रामायण और स्मृतियों का फ़ारसी में अनुवाद किया. कुरान शरीफ की कुछ आयतों का भी उसने संस्कृत में अनुवाद किया था. उस दौरान काशी के मौलवियों ने औरंगजेब तक ये बात पहुंचाई कि दाराशिकोह दीन और इस्लाम के ख़िलाफ काम कर रहे हैं.
दारा शिकोह के प्रति वैमनस्य का भाव रखने वाले औरंगजेब ने दारा की हत्या कर जब बादशाह बना तो अप्रैल 1669 में काशी विश्वनाथ मंदिर तोड़ने और संस्कृत पाठशालाओं को बंद करने का फरमान जारी किया. उसके इस फैसले के पीछे दारा का काशी में रहकर सनातन ग्रंथो का अध्ययन एक बड़ा कारण माना जाता है. औरंगाबाद के रहने वाले प्रकाश त्रिपाठी बताते हैं कि दारा ने अध्ययन करने के बाद शिवा नगर में पांच शिवालय बनवाए थे और त्रिपाठी परिवार को जमीन दान किया था.
कमला पति त्रिपाठी से जुड़ा हुआ है औरंगाबाद का नाम
यूपी के सीएम रहे और एक ज़माने में कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे स्वर्गीय पंडित कमला पति त्रिपाठी के ही पूर्वजों ने दाराशिकोह को संस्कृत की शिक्षा दी थी और यहीं रहकर उसने गीता, रामायण और स्मृतियों का फ़ारसी अनुवाद किया था. त्रिपाठी परिवार की आज 18 वीं पीढ़ी यहां रहती है. वहीं आज इसे ‘द औरंगाबाद हाउस’ के नाम से लोग जानते हैं.
तो क्या अब औरंगाबाद का भी बदलेगा नाम? मेयर को भेजा पत्र, कहा- आपके पास ये है विकल्प
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