UP News: 4000 रुपये की नौकरी के लिए इतना बड़ा फर्जीवाड़ा? बरेली में अमीर महिलाएं भी कागजों पर बनीं गरीब, 38 आवेदन निरस्त – INA

यूपी के बेरली जिले में आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती प्रक्रिया में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. भर्ती में कई महिलाओं द्वारा फर्जी आय और निवास प्रमाण पत्र लकर आवेदन करने का खुलासा हुआ है. जांच के बाद अब तक कुल 38 आवेदकों को निरस्त किया जा चुका है. वहीं मामले सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है.
जिले के शहरी क्षेत्र समेत कुल 16 ब्लॉकों में आंगनबाड़ी सहायिकाओं के 705 पदों के लिए आवेदन मांगे गए थे. आवेदन प्रक्रिया 18 नवंबर 2025 से शुरू होकर 8 दिसंबर 2025 तक चली थी. कुल 5376 महिला अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है. जब आवेदकों के डाॅक्यूमेंट्स का वेरिफिकेशन शुरू हुआ तो बड़ी संख्या में प्रमाण पत्र संदिग्ध पाए गए.
मायके का निवास प्रमाण पत्र लगाकर किया आवेदन
जांच में सामने आया कि कई महिला अभ्यर्थियों ने शादी हो जाने के बाद भी मायके का निवास प्रमाण पत्र लगाकर आवेदन किया, जबकि नियमों के अनुसार निवास प्रमाण पत्र ससुराल का होना चाहिए. वहीं इसके अलावा कई महिला एपीएल कार्ड धारक आवेदकों ने खुद को बीपीएल श्रेणी में दिखाने के लिए फर्जी आय प्रमाण पत्र भी लगाए.
किस ब्लाॅक में मिले कितने फर्जी आवेदन?
जांच के दौरान सबसे ज्यादा 16 फर्जी प्रमाण पत्र मझगवां ब्लॉक ब्लॉक में मिले. इसके अलावा फरीदपुर और नवाबगंज में 5-5, रामनगर में 3 फर्जी प्रमाण पत्र पाए गए. वहीं भुता, मीरगंज और आलमपुर-जाफराबाद में दो-दो फर्जी आवेदन पाए गए. शेरगढ़ और भोजीपुरा में भी फर्जी दस्तावेज लगाकर आवेदन करने के मामले पकड़े गए हैं. शहरी क्षेत्र की रिपोर्ट आना अभी बाकी है.
एमएससी डिग्री धारक भी लाइन में
करीब चार हजार रुपये मानदेय वाली इस नौकरी के लिए एमएससी फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ तक की पढ़ाई कर चुकी युवतियों ने भी आवेदन किया है. अधिकारियों ने कुछ अभ्यर्थियों को उनकी योग्यता के अनुसार बेहतर अवसर तलाशने की सलाह दी.इसके बावजूद अभ्यर्थियों का मानना है कि यह सरकारी व्यवस्था से जुड़ा पद है और भविष्य में मानदेय बढ़ने की संभावना भी है.
पहले भी सामने आए थे इस तरह के मामले
अधिकारियों का कहना है कि पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में भी भर्ती को लेकर 168 शिकायतें मिली थीं. जांच के बाद उनमें से 21 शिकायतें सही पाई गई थीं और संबंधित आवेदन निरस्त किए गए थे.
वहीं पूरे मामले में सीडीओ देवयानी ने बताया कि कई अभ्यर्थियों ने शादी के बाद भी मायके के पते का प्रमाण पत्र लगाया है. वहीं बड़ी संख्या में फर्जी आय प्रमाण पत्र भी मिले हैं. उन्होंने कहा कि पिछली भर्ती में भी ऐसे मामले सामने आए थे. इसलिए इस बार आवेदन की गहन जांच कराई जा रही है.
तो इसलिए अभ्यर्थी ने लगाए फर्जी डाॅक्यूमेंट्स?
भर्ती के लिए तय नियमों के अनुसार सबसे पहले उसी ग्राम पंचायत या वार्ड की बीपीएल विधवा महिला को प्राथमिकता दी जाती है. इसके बाद तलाकशुदा या परित्यक्ता महिलाओं को मौका मिलता है फिर बीपीएल श्रेणी की अन्य महिलाओं को वरीयता दी जाती है. अगर इन श्रेणियों में अभ्यर्थी नहीं मिलते, तब एपीएल वर्ग की विधवा, तलाकशुदा, परित्यक्ता और अन्य महिलाओं को मौका दिया जाता है.
4000 रुपये की नौकरी के लिए इतना बड़ा फर्जीवाड़ा? बरेली में अमीर महिलाएं भी कागजों पर बनीं गरीब, 38 आवेदन निरस्त
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