UP News: जिस मुस्लिम दूल्हे का वेडिंग कार्ड हुआ था वायरल, आज है उसकी शादी, पिता बोले- सरनेम तो दूबे ही रहेगा – INA

UP News: जिस मुस्लिम दूल्हे का वेडिंग कार्ड हुआ था वायरल, आज है उसकी शादी, पिता बोले- सरनेम तो दूबे ही रहेगा – INA

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक अनोखी शादी की पिछले कुछ दिनों से हर कहीं खूब चर्चा हो रही है. जिसने सामाजिक सौहार्द और भाईचारे की मिसाल पेश की है. जौनपुर के डेहरी गांव में रहने वाले एक मुस्लिम परिवार ने अपने बेटे की शादी के वेडिंग कार्ड पर हिंदू ब्राह्मण सरनेम ‘दूबे’ लिखवाया है. वहीं, दावत-ए-वलीमा को ‘बहुभोज’ नाम दिया गया है. यह शादी आज यानी 14 दिसंबर को हो रही है, जिसमें करीब 2000 मेहमानों को आमंत्रित किया गया है.

खास बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी शादी का न्योता भेजा गया है, हालांकि उनके शामिल होने का कोई आधिकारिक प्रोटोकॉल नहीं है. जौनपुर जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित डेहरी गांव की आबादी लगभग 10 हजार है, जहां हिंदू और मुस्लिम समुदाय की संख्या लगभग बराबर है. इसी गांव में नौशाद अहमद दूबे का परिवार रहता है. उनके बेटे खालिद की शादी आजमगढ़ जिले के असाऊ गांव में हो रही है. खालिद सऊदी अरब में कपड़ों का कारोबार करते हैं.

नौशाद अहमद दूबे द्वारा छपवाए गए वेडिंग कार्ड ने सबका ध्यान खींचा है. कार्ड के लिफाफे पर लिखा गया है- श्री लालबहादुर दुबे (1669 ई.) के जमींदार, आठवीं पीढ़ी के वंशज खालिद ‘दूबे’ की शादी एवं बहुभोज (दावत-ए-वलीमा)… यही पंक्तियां इस कार्ड को खास और चर्चा का विषय बना रही हैं.

पीढ़ियों के नाम बदले, दूबे टाइटल नहीं छोड़ा

नौशाद अहमद दूबे का कहना है कि उनके पूर्वज लाल बहादुर दुबे थे, जिन्होंने बाद में धर्म परिवर्तन किया, लेकिन जाति नहीं बदली. उनके मुताबिक- हम मानते हैं कि जाति बदली नहीं जा सकती. हमारे पूर्वज ब्राह्मण थे, इसलिए हम दूबे टाइटल आज भी अपनाए हुए हैं. नौशाद बताते हैं कि उनके पूर्वज लाल बहादुर दूबे बाद में लाल मोहम्मद शेख कहलाए और आगे की पीढ़ियों में नाम बदले, लेकिन उनके परिवार ने दूबे टाइटल नहीं छोड़ा.

नौशाद यह भी कहते हैं कि वे अपने इतिहास को समझने और प्रमाण जुटाने के लिए 150 साल पुराने दस्तावेजों तक की तलाश कर चुके हैं. वे खुद को ब्राह्मण परिवार का हिस्सा मानते हैं और मुस्लिम ब्राह्मणों की पहचान और खोज का प्रयास भी कर रहे हैं. उनका कहना है कि उनका उद्देश्य भारतीय जड़ों को समझना और समाज में फैली नफरत को खत्म करना है.

‘आधार कार्ड में नौशाद अहमद दूबे नाम हो’

हालांकि, इस टाइटल को अपनाने के कारण उन्हें अपनी ही कौम के कुछ लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा, लेकिन सरकारी दस्तावेजों में कोई परेशानी नहीं आई. वे चाहते हैं कि उनके आधार कार्ड और खतौनी में उनका नाम नौशाद अहमद दूबे दर्ज हो. हमारा सरनेम दूबे ही रहेगा.

बहुभोज के नाम से दावत-ए-वलीमा

शादी में बहुभोज के नाम से दावत-ए-वलीमा का आयोजन किया गया है, जिसमें हिंदू, मुस्लिम और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों को आमंत्रित किया गया है. गांव के लोगों का कहना है कि इस शादी से भाईचारे को मजबूती मिली है. ग्रामीण संतोष कुमार और श्रवण कुमार के मुताबिक, गांव में पहले भी सौहार्द था और आगे भी बना रहेगा. यह शादी न केवल एक पारिवारिक आयोजन है, बल्कि सामाजिक एकता और आपसी सम्मान का संदेश भी दे रही है.

जिस मुस्लिम दूल्हे का वेडिंग कार्ड हुआ था वायरल, आज है उसकी शादी, पिता बोले- सरनेम तो दूबे ही रहेगा




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