UP News: ये संविधान की जीत…जमात के मर्कज़ी तालीमी बोर्ड ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले का किया स्वागत – INA


जमात-ए-इस्लामी हिंद के मर्कज़ी तालीमी बोर्ड (MTB) ने बिना मान्यता वाले मदरसों के संचालन को वैध बताए जाने के इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है. बोर्ड ने कहा है कि यह फैसला भारतीय संविधान की सर्वोच्चता और संवैधानिक मूल्यों की स्पष्ट जीत है. कोर्ट ने अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान के संवैधानिक अधिकारों को बरकरार रखा है. साथ ही उत्तर प्रदेश में गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों के काम करने के बारे में कानूनी स्थिति को को भी स्पष्ट किया है.
मर्कज़ी तालीमी बोर्ड के सेक्रेटरी सैयद तनवीर अहमद ने कहा कि हाई कोर्ट के इस फ़ैसले का अल्पसंख्यक शिक्षा पर दूरगामी असर होगा. उन्होंने कहा कि यह फ़ैसला भारत के संविधान के अनुच्छेद 30 की आत्मा को सुदृढ़ करता है, जो धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यक को अपनी शैक्षिक संस्था स्थापित करने और प्रबंधन का अधिकार देता है.उन्होंने देश भर के मदरसों के व्यवस्थापकों को भी शुभकामनाएं दीं.
गैर-मान्यता प्राप्त मदरसे पर बड़ा फैसला
तनवीर अहमद ने कहा कि कोर्ट ने एक ऐसे सरकारी आदेश को रद्द कर दिया है जिसमें एक गैर-मान्यता प्राप्त मदरसे को बंद करने और उसे सील करने का आदेश दिया गया था. कोर्ट ने साफ किया कि ऐसा कोई कानूनी नियम नहीं है जो संबंधित अधिकारियों को सिर्फ़ मंज़ूरी न मिलने के आधार पर मदरसे को बंद करने का अधिकार देता हो. उन्होंने कहा कि कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि जो अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान सरकारी मदद या औपचारिकताओं को पूरी नहीं करते हैं, वे संविधान के आर्टिकल 30(1) के तहत सुरक्षा के हकदार हैं.
‘सरकारी मदद के हकदार नहीं हैं’
हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ़ किया कि गैर-मान्यता प्राप्त संस्थान सरकारी मदद के हकदार नहीं हैं और ऐसी संस्था में पढ़ने वाले छात्र बोर्ड एग्जाम या दूसरी सरकारी सुविधाओं के लिए तब तक योग्य नहीं होंगे जब तक संस्था को औपचारिक अनुमोदन नहीं मिल जाता.
तनवीर अहमद ने कही ये बात
मर्कज़ी तालीमी बोर्ड के सेक्रेटरी सैयद तनवीर अहमद ने कहा कि यह फ़ैसला संवैधानिक सुरक्षा उपायों और नियामक ज़रूरतों के बीच संतुलित दृष्टिकोण पेश करता है. उन्होंने कहा कि कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि किसी शैक्षणिक संस्थान को बंद करने जैसे प्रशासनिक कार्रवाई को स्पष्ट कानूनी अधिकार के बिना सही नहीं ठहराया जा सकता, साथ ही मान्यता प्राप्त संस्था के स्तर को बनाए रखने में राज्य के हितों को भी स्वीकार किया गया है.
ये संविधान की जीत…जमात के मर्कज़ी तालीमी बोर्ड ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले का किया स्वागत
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