UP News: तनाव में ड्यूटी, हेल्थ मॉनिटरिंग तक नहीं… गश्त के बाद कमरे में मिला यूपी पुलिस के सब इंस्पेक्टर का शव; क्या है मौत की वजह? – INA


ग्रेटर नोएडा में पुलिस विभाग को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है. जारचा थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर संजय यादव की मौत ने एक बार फिर पुलिसकर्मियों के स्वास्थ्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अत्यधिक काम के दबाव और समय पर स्वास्थ्य की जांच न होने के चलते एक सब-इंस्पेक्टर की जान चली गई. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि सब-इंस्पेक्टर की मौत ब्रेन हेमरेज और हार्ट अटैक के कारण हुई.
यह घटना सिर्फ एक पुलिसकर्मी की असमय मौत नहीं, बल्कि उस सिस्टम की सच्चाई है, जिसमें वर्दीधारी जवान बिना आराम, बिना नियमित स्वास्थ्य जांच और लगातार मानसिक दबाव में काम करने को मजबूर हैं. जानकारी के मुताबिक, सब-इंस्पेक्टर संजय यादव घटना वाली रात नियमित गश्त ड्यूटी पर थे. रात करीब 11 बजे वह गश्त पूरी कर थाने लौटे थे. उस समय उन्होंने सहयोगी पुलिसकर्मियों से हल्के सीने में दर्द की शिकायत भी की थी.
इसके बाद उन्होंने दवा ली और अपने कमरे में आराम करने चले गए. रात में ठंड भी अधिक थी और लंबे समय से लगातार ड्यूटी के कारण वह पहले से ही शारीरिक और मानसिक रूप से थके हुए बताए जा रहे थे. लेकिन सुबह जब काफी देर तक वह बाहर नहीं निकले और फोन कॉल का कोई जवाब नहीं मिला, तब साथी पुलिसकर्मियों को चिंता हुई.
दरवाजा तोड़ा गया, अंदर मिला शव
काफी देर तक संपर्क न होने पर दो पुलिसकर्मी उनके कमरे के बाहर पहुंचे. अंदर से दरवाजा बंद था और कोई हलचल नहीं थी. संदेह होने पर दरवाजा तोड़ा गया, जहां सब-इंस्पेक्टर संजय यादव कमरे के अंदर बेड पर अचेत अवस्था में पड़े मिले. तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी गई. मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच के बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया और परिजनों को सूचित किया गया.
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि सब-इंस्पेक्टर की मौत ब्रेन हेमरेज और हार्ट अटैक के कारण हुई है. डॉक्टरों के अनुसार, अत्यधिक तनाव, ठंड, लगातार ड्यूटी और समय पर स्वास्थ्य जांच न होना इस तरह की मौतों के बड़े कारण बनते जा रहे हैं. पुलिस अधिकारियों ने कहा कि मामले में किसी तरह की संदिग्ध परिस्थिति या बाहरी हस्तक्षेप के संकेत नहीं मिले हैं.
खुशी का माहौल बदला मातम में
सब-इंस्पेक्टर संजय यादव के परिवार में कुछ दिन पहले ही खुशी का माहौल था. करीब एक सप्ताह पहले उनके बड़े बेटे की पत्नी ने एक बेटी को जन्म दिया था. इस खुशी में संजय यादव ने पूरे थाने में मिठाई बांटी थी. वह परिवार और साथियों के बीच खुशमिजाज और जिम्मेदार अधिकारी के रूप में जाने जाते थे. उनके परिवार में दो बेटे हैं. बड़ा बेटा पुलिस की तैयारी कर रहा है, जबकि छोटा बेटा अभी पढ़ाई कर रहा है. अचानक हुई इस मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है.
पुलिसकर्मियों के स्वास्थ्य पर बड़ा सवाल
इस घटना के बाद पुलिस विभाग में काम के दबाव और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर गंभीर चर्चा शुरू हो गई है. विभाग के कई पुलिसकर्मियों का कहना है कि न तो उन्हें नियमित वीकली ऑफ मिल पाता है और न ही समय-समय पर हेल्थ चेकअप की कोई ठोस व्यवस्था है. लगातार ड्यूटी, सुबह-शाम गश्त, मानसिक तनाव, फील्ड में काम का दबाव और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच पुलिसकर्मी खुद की सेहत पर ध्यान नहीं दे पाते, जिसका नतीजा ऐसी दर्दनाक घटनाओं के रूप में सामने आता है.
तनाव बना साइलेंट किलर?
कार्डियोलॉजी डॉ तुषार अग्रवाल सीनियर डॉ सर्वोदय हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा का कहना है कि ब्रेन हेमरेज और हार्ट अटैक के मामलों में मानसिक तनाव एक साइलेंट किलर की तरह काम करता है. अगर समय पर आराम, नियमित मेडिकल जांच और तनाव प्रबंधन पर ध्यान दिया जाए, तो ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है.
सब-इंस्पेक्टर की मौत के बाद पुलिसकर्मियों और उनके संगठनों की ओर से मांग उठ रही है कि पुलिसकर्मियों को नियमित वीकली ऑफ दिया जाए, समय-समय पर अनिवार्य हेल्थ चेकअप कराया जाए और अत्यधिक ड्यूटी के दबाव को कम करने के लिए स्टाफ की संख्या बढ़ाई जाए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को इस तरह अपने बेटे, पति या पिता को न खोना पड़े.
क्या बोले डीसीपी?
डीसीपी पुलिस लाइन शैलेंद्र कुमार ने बताया कि हर सप्ताह रविवार को पुलिसकर्मियों की नियमित जांच की जाती है. साथ ही प्राइवेट हॉस्पिटल की मदद से हर माह पुलिस लाइन में सिविल हेल्थ चेकअप कैंप लगाया जाता है. समय-समय पर पुलिसकर्मियों को निर्देशित भी किया जाता है कि वे अपनी समय पर जांच कराएं, लेकिन फिर भी कुछ पुलिसकर्मी लापरवाही बरतते हैं. रहा सवाल छुट्टियों का, साल में 30 दिन और आमतौर पर 15 दिन का अवकाश दिया जाता है, जो त्योहारों और व्यक्तिगत कार्यों के लिए होता है. इसके अतिरिक्त चिकित्सा अवकाश, मातृत्व अवकाश और अन्य विशेष परिस्थितियों में अवकाश भी मिलता है, जो नियमों के अनुसार होता है.
तनाव में ड्यूटी, हेल्थ मॉनिटरिंग तक नहीं… गश्त के बाद कमरे में मिला यूपी पुलिस के सब इंस्पेक्टर का शव; क्या है मौत की वजह?
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