UP News: UP: बुंदेलखंड में कैसे ‘साइलेंट किलर’ बन रहा फैटी लिवर? रिपोर्ट में हुआ डरा देने वाला खुलासा – INA

UP News: UP: बुंदेलखंड में कैसे ‘साइलेंट किलर’ बन रहा फैटी लिवर? रिपोर्ट में हुआ डरा देने वाला खुलासा – INA

उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के लोगों के लिए नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD)एक नई स्वास्थ्य चुनौती बनकर फिर उभर कर सामने आई है. यह रोग धीरे-धीरे, बिना स्पष्ट लक्षणों के शरीर को अंदर से नुकसान पहुंचाता है और जब तक इसकी पहचान होती है, तब तक यह गंभीर स्तर पर पहुंच चुका होता है. स्थानीय मेडिकल कॉलेज की ओर से किए गए रिसर्च में यह सामने आया है कि क्षेत्र में इस बीमारी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं.

शोधकर्ताओं ने बताया कि इस बीमारी की प्रमुख वजहें बेतरतीब दिनचर्या, अनियमित खानपान, मादक पदार्थों का सेवन, तथा फास्ट फूड की अधिकता बताई जा रही है. बुंदेलखंड के ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों में लोगों की जीवनशैली में तेजी से बदलाव आया है, जिसमें शारीरिक मेहनत की जगह निष्क्रियता और पौष्टिक भोजन की जगह तैलीय व जंक फूड ने ले ली है.

क्या बोले डॉक्टर?

मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. कुलदीप चंदेल ने बताया कि NAFLD की स्थिति में लिवर में चर्बी जमा होने लगती है, जिससे शरीर में एसजीओटी और एसजीपीटी नामक एंजाइमों का स्तर तेजी से बढ़ जाता है. ये एंजाइम इस बात का संकेत हैं कि व्यक्ति के शरीर में लिवर या हृदय की कोशिकाएं प्रभावित हो रही हैं. ऐसे में व्यक्ति को पाचन संबंधी दिक्कतें, मधुमेह, हाइपरटेंशन और कोलेस्ट्रॉल जैसी परेशानियां घेर लेती हैं.

डॉ. चंदेल ने बताया कि इस रोग के शुरुआती संकेत इतने हल्के होते हैं कि मरीज उन्हें अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. परंतु जब रोग बढ़ता है, तब शारीरिक थकावट, पेट में दर्द, और भूख में कमी जैसी समस्याएं सामने आने लगती हैं. इन लक्षणों को यदि व्यक्ति के द्वारा समय रहते गंभीरता से न लिया जाए, तो व्यक्ति को लिवर सिरोसिस जैसी जानलेवा स्थिति का भी सामना करना पड़ सकता है.

रिसर्च में 80 प्रतिशत लोगों में फैटी लीवर

बुंदेलखंड के झांसी में मेडिकल कॉलेज की ओर किए गए एक वर्ष लंबे शोध में 302 मरीजों की जांच की गई तो नतीजों ने चौंकाने वाला सच उजागर किया 80 प्रतिशत मोटे लोगों में फैटी लिवर पाया गया. वहीं, 46 फीसदी डायबिटिक मरीज, 66 फीसदी उच्च कोलेस्ट्रॉल से ग्रसित व्यक्ति, और 40 प्रतिशत थायराइड व ब्लड प्रेशर के रोगी इस बीमारी से पीड़ित पाए गए.

इस Alarming स्थिति से बचने के लिए विशेषज्ञों का तो यह भी कहना है कि नियमित स्वास्थ्य जांच कराना भी अति आवश्यक है. खासतौर पर पेट संबंधी समस्याओं या पहले से किसी गंभीर रोग से ग्रस्त व्यक्तियों को सबसे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है. फैटी लिवर की पुष्टि होने पर डॉक्टरी परामर्श के अनुसार चिकित्सा लेना, और दिनचर्या में बदलाव लाना लोगों के लिए बेहद जरूरी हो जाता है.

इसके लिए दिन की शुरुआत होते ही सबसे पहले योग, प्राणायाम और हल्की कसरत से करनी चाहिए. भोजन में ज्यादा से ज्यादा हरी सब्जियों, फाइबर युक्त अनाज, और कम वसा वाले पदार्थों का सेवन करना चाहिए. साथ ही शराब और तली-भुनी चीजों से दूर रहना बेहद जरूरी है. बुंदेलखंड की यह बदलती स्वास्थ्य तस्वीर एक चेतावनी भी है कि यदि समय रहते सचेत नहीं हुए, तो आने वाले वर्षों में यह “साइलेंट किलर” अनेक परिवारों की शांति भी छीन सकता है.

UP: बुंदेलखंड में कैसे ‘साइलेंट किलर’ बन रहा फैटी लिवर? रिपोर्ट में हुआ डरा देने वाला खुलासा




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