UP News: Varanasi Dev Diwali: 5 घाट, 5000 दिये और हजार का खर्चा… ऐसे शुरू हुई थी काशी की देव दिवाली – INA


यूं तो काशी में कार्तिक मास में गंगा किनारे दीपक जलाने की परंपरा द्वापर काल से मानी जाती है, लेकिन वर्तमान में देव दिवाली का जो स्वरूप है, इसको मनाने की शुरुआत महज 40 साल पहले से हुई है. 27 नवंबर 1985 को कार्तिक पूर्णिमा के दिन से वाराणसी के पंचगंगा घाट से इसकी शुरुवात हुई. स्थानीय लोगों की मदद से 10-15 युवकों ने इसकी शुरुआत की थी.
मंगला-गौरी मंदिर के महंत नारायण गुरू के नेतृत्व में पंचगंगा घाट पर बने हजारा को जलाकर इसकी शुरुआत हुई.
हजारा दीपक स्तम्भ इंदौर की महारानी अहिल्या बाई होल्कर ने 1780 में बनवाया था. लाल पत्थरों से बने इस हजारा दीपक स्तम्भ को जलाने के साथ-साथ पंच गंगा घाट सहित कई घाटों और गलियों में दिये जलाकर इसकी शुरुआत हुई.
टीवी9 डिजिटल से बातचीत में मंगला गौरी मंदिर के महंत और देव दिवाली की शुरुवात करने वालों में से एक नारायण गुरू ने बताया कि पौराणिक मान्यता और घाटों की स्वच्छता दोनों बातों को ध्यान में रखकर ही इस देव दिवाली की शुरुआत हुई थी. देव दिवाली मनाने के बाद से लोगों का नजरिया बदला और घाटों पर स्वच्छता बढ़ने लगी.
1991 से नियमित गंगा आरती
इसका असर ये हुआ कि हम लोगों ने फिर 1991 से नियमित गंगा आरती की शुरुआत कराई. जब हम लोगों ने शुरुआत की थी, तब 1000 दिया जलाने पर 125 रुपए का खर्च आता था. अब तो करोड़ों का वारा न्यारा होता है. 1985 में शाम 5:35 पर दिए जलाने की शुरुआत हुई थी. इस बार भी दिया जलाने का वही समय रहेगा.
1990 तक दो दर्जन घाटों तक ये देव दिवाली सीमित थी. सन 2000 के बाद से इसकी ख्याति बढ़नी शुरू हुई और सभी 84 घाटों सहित कुंडों, जलाशयों, पोखरों के किनारे और घरों के बाहर और गलियों में दिये जलने शुरू हो गए. ये बनारस का उत्सव बन चुका था और लोकल चैनल्स और प्रिंट मीडिया ने भी इसकी ब्रांडिंग करनी शुरू कर दी थी.
2014 के बाद देव दिवाली की ग्लोबल ब्रांडिंग
2010 तक तो इसकी ख्याति देशभर में पहुंच चुकी थी, लेकिन इसकी ग्लोबल ब्रांडिंग 2014 के बाद से शुरू हुई. 2020
में पीएम मोदी के देव दिवाली में शिरकत करने के बाद से इसकी भव्यता और बढ़ी. अब तो दुनियां भर से लोग देव दिवाली देखने और मनाने के लिए काशी में आते हैं. देव दिवाली के दिन बनारस में होटलों और नावों का किराया कई गुना बढ़ जाता है.
40 साल तक की तपस्या और अब…
नारायण गुरू से जब टीवी9 डिजिटल ने पूछा कि गुरूजी देव दिवाली पर इतना महंगा होटल और नाव होना… ये क्या ठीक है? धर्म पर अर्थ हावी नहीं हो रहा? इस पर नारायण गुरू कहते हैं कि 40 साल तक बनारस के लोगों ने तपस्या की है और आज जब कमाने का मौका आया है तो इसमें कुछ गलत नहीं है.
Varanasi Dev Diwali: 5 घाट, 5000 दिये और हजार का खर्चा… ऐसे शुरू हुई थी काशी की देव दिवाली
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