UP News: बेटे को बचाने दौड़ी, तभी रोडवेज बस ने कुचल दिया… तीन बच्चों के सामने मां की मौत, लखनऊ की दर्दनाक घटना – INA


उत्तर प्रदेश के लखनऊ में चारबाग रेलवे स्टेशन के फुटओवर ब्रिज पर रविवार की सुबह जो कुछ भी हुआ, उसे देख लोगों की आंखें नम हो गईं. सात साल का छोटा मासूम आदी सड़क पार करते वक्त मां का हाथ छुड़ाकर अचानक सड़क को पार करने के लिए दौड़ पड़ा. मां संगीता रावत (40) अपनी जान की परवाह किए बिना उसे बचाने की खातिर दौड़ीं. मगर तभी वो चारबाग डिपो की रोडवेज बस की चपेट में आ गईं. इससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई.
संगीता कानपुर नगर निगम में हेड क्लर्क थीं, 2022 में पति सुनील कुमार की मौत के बाद मृतक आश्रित कोटे से उन्हें नौकरी मिली थी, अकेले ही तीन बच्चों- राहुल (17), जाह्नवी (12) और आदी (7) का पालन-पोषण कर रही थीं.
बड़े बेटा राहुल ने रोते हुए बताया- हम लोग शहीद पथ स्थित यूनानी हॉस्पिटल के पास अपनी मौसेरी बहन के घर प्रवेश में गए थे. रविवार सुबह वापस उन्नाव (शुक्लागंज, आर्दशनगर) लौट रहे थे. मैं बहन जाह्नवी का हाथ पकड़े था, मां ने आदी का हाथ थामा था. मामा भी हमारे साथ थे. फुट ओवरब्रिज के नीचे सड़क पार कर मैं और जाह्नवी दूसरी लेन में पहुंच गए. तभी आदी ने मां का हाथ छुड़ाकर दौड़ लगा दी, मां चिल्लाईं- आदी रुक! और उसे बचाने दौड़ीं. राहुल ने बताया- मैंने आते हुए रोडवेज बस को रुकने का इशारा किया. चालक ने बस रोकी भी… लेकिन अचानक फिर से बस की स्पीड बढ़ा दी. आदी तो निकल गया, मां बस के नीचे आ गईं.
गुस्साई भीड़ ने चालक को पीटा, पुलिस ने बचाया
खून से लथपथ मां को तड़पता देख राहुल चीख पड़ा. राहगीरों और पुलिस की मदद से उन्हें तुरंत ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. हादसे के बाद बस चालक मुकेश कुमार सैनी (उन्नाव के पुरवा मिश्रीकला का रहने वाला) बस छोड़कर भागने लगा. आक्रोशित लोगों ने उसे दौड़ा कर पकड़ लिया और जमकर पीटा.
हुसैनगंज पुलिस मौके पर पहुंची और भीड़ के चंगुल से उसे छुड़ाकर थाने ले आई. हुसैनगंज थाना प्रभारी शिवमंगल सिंह ने बताया- चालक को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है. परिजनों ने अभी तहरीर नहीं दी है. तहरीर मिलते ही धारा 304A (लापरवाही से मौत) के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा.
तीन अनाथ बच्चों का अब कौन सहारा?
अब सवाल सिर्फ एक है. इन तीन बच्चों का आगे क्या होगा? 17 साल का राहुल बारहवीं में पढ़ता है. उसने कहा- पापा के जाने के बाद मां ही सबकुछ थीं. अब मां भी चली गईं. माँ की लाश पोस्टमार्टम हाउस के बाहर पड़ी है. बच्चे सदमे में हैं. बस मां को याद करके रोए जा रहे हैं. रिश्तेदारों ने बताया कि संगीता बेहद हंसमुख और जिम्मेदार महिला थीं. घर की सारी जिम्मेदारी अकेले निभा रही थीं. आज चारबाग की उस सड़क पर सिर्फ खून के धब्बे रह गए हैं… और तीन बच्चों का टूटा हुआ बचपन.
बेटे को बचाने दौड़ी, तभी रोडवेज बस ने कुचल दिया… तीन बच्चों के सामने मां की मौत, लखनऊ की दर्दनाक घटना
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