UP News: उत्तर प्रदेश SIR से क्यों टेंशन में BJP, कहां चूक गए कार्यकर्ता? CM योगी ने चेताया था – INA

उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद वोटर लिस्ट में भारी कटौती हुई है. प्रदेश अब एक दशक पीछे चला गया है. चुनाव आयोग की फाइनल लिस्ट के अनुसार, SIR से पहले 15.44 करोड़ वोटर थे, जो अब घटकर 13,39,84,792 करोड़ रह गए हैं. यह संख्या 2014 के लोकसभा चुनाव के समय की कुल वोटर संख्या 13.39 करोड़ से भी करीब 49 लाख कम है. जानकार इसे प्रदेश के वोटर लिस्ट के अब तक के सबसे बड़े सफाई अभियान के रूप में देख रहे हैं.
- ‘बीजेपी के लोग घर-घर नहीं निकले’
- ‘SIR में बीजेपी की आंतरिक कलह आई सामने’.
- महिलाओं की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा घटी
- सभी दलों ने 5.82 लाख बूथ लेवल एजेंट बनाए
- SIR का पूरा टाइमलाइन
- गुजरात के बाद यूपी में सबसे ज्यादा कटौती
- बीजेपी काबिज सीटों पर ज्यादा कटौती, सपा पर कम असर
- सीटवार गिरावट का ब्योरा
- शहरों में झटका, गांवों में अपेक्षाकृत स्थिरता
- मुस्लिम बहुल जिलों की स्थिति बेहतर
- क्या बोले डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक
SIR के बाद प्रति विधानसभा सीट औसतन 71,647 वोटर कम हो गए हैं. यह गिरावट 2003 के SIR के बाद की सबसे बड़ी है. उस समय 2002 विधानसभा चुनाव में 9.98 करोड़ वोटर थे, SIR के बाद 2004 लोकसभा चुनाव में संख्या बढ़कर 11.06 करोड़ हो गई थी, लेकिन इस बार आंकड़े उलट गए.
‘बीजेपी के लोग घर-घर नहीं निकले’
वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र कुमार कहते हैं, ‘बीजेपी की सरकार है, उसका सबसे बड़ा संगठन है. नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की ताजपोशी के मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा था कि जिनके नाम कटे हैं, उन्हें जुड़वाइए- तीन करोड़ वोटर कटे हैं. उसके बावजूद दो करोड़ ज्यादा वोटर कट गए. बीजेपी संगठन और सरकार की पोल खुल गई. पंकज चौधरी ने भी कार्यकर्ताओं को SIR में सक्रिय रहने का निर्देश दिया था, लेकिन न मुख्यमंत्री की सुनी, न प्रदेश अध्यक्ष की. बीजेपी के लोग घर-घर नहीं निकले. विपक्ष यानी सपा के कार्यकर्ता और नेता ज्यादा सक्रिय रहे, उन्होंने घर जाकर वोट जुड़वाए. सरकार और संगठन में पद पाने के चक्कर में इन लोगों ने मेहनत नहीं की. जिनका नाम जुड़ा भी है, उन्होंने अपने प्रयास से जुड़वाया. व्यापारी या अन्य भाजपा समर्थक. बीजेपी के लोगों ने मदद नहीं की’.
‘SIR में बीजेपी की आंतरिक कलह आई सामने’.
राजेंद्र कुमार आगे कहा, ‘सरकार और संगठन में पद पाने के चक्कर में इन लोगों ने मेहनत नहीं की. जिनका नाम जुड़ा भी है, उन्होंने अपने प्रयास से जुड़वाया. व्यापारी या अन्य भाजपा समर्थक. बीजेपी के लोगों ने मदद नहीं की’. बीजेपी की मंशा मुस्लिम वोटर ज्यादा काटने की थी, लेकिन उसमें सफलता नहीं मिली. कुल मिलाकर SIR में बीजेपी की आंतरिक कलह एक बार फिर सामने आ गई’.
चुनावी पलड़े पर इसका असर क्या होगा, यह तो आने वाले चुनाव में ही साफ होगा, लेकिन SIR के बाद की यह लिस्ट यूपी की सियासी हकीकत को पूरी तरह बदलने वाली साबित हो सकती है.
महिलाओं की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा घटी
नारी वंदन के नारे के बीच महिलाओं के नाम सबसे अधिक कटे हैं. SIR से पहले 7.21 करोड़ महिला वोटर थे, अब यह संख्या घटकर 6.09 करोड़ रह गई है. यानी 1.12 करोड़ महिलाओं के नाम लिस्ट से हट गए. यह 2014 के मुकाबले भी करीब 20 लाख कम है. वहीं पुरुषों के 93 लाख नाम कटे हैं. कई लोकसभा और विधानसभा सीटों पर महिलाओं का वोट प्रतिशत पुरुषों से ज्यादा रहा है, इसलिए ये आंकड़े सियासी रणनीतिकारों के लिए चिंता का सबब बन सकते हैं.
सभी दलों ने 5.82 लाख बूथ लेवल एजेंट बनाए
जानकारी के मुताबिक मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सियासी दलों के साथ 5 बैठकें कीं. सभी दलों ने 5.82 लाख बूथ लेवल एजेंट बनाए. दावा-आपत्ति अवधि में 4 विशेष अभियान चलाए गए. 1.08 लाख शिकायतें आईं, जिनमें 99.80% का निपटारा हुआ. यूपी इस मामले में देश में दूसरे नंबर पर रहा. सियासी दलों ने 107 ज्ञापन दिए, जिनमें सबसे ज्यादा 85 सपा ने दिए. BLO हेल्पलाइन पर 8.63 लाख कॉल आईं, 8.33 लाख का समाधान हुआ.
SIR का पूरा टाइमलाइन
- 27 अक्टूबर को SIR कार्यक्रम की घोषणा
- 4 नवंबर से 26 दिसंबर गणना चरण
- 6 जनवरी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी
- 6 मार्च तक दावे-आपत्तियां ली गईं
- 27 मार्च तक नोटिसों पर सुनवाई.
- 10 अप्रैल को फाइनल वोटर लिस्ट आई
गुजरात के बाद यूपी में सबसे ज्यादा कटौती
अन्य राज्यों से तुलना करें तो गुजरात में 13.40% वोटर कटे, यूपी में 13.24%. बाकी राज्यों में कटौती कम रही. राजस्थान 5.74%, तमिलनाडु 11.55%, गोवा 10.76%, केरल 3.22%, बिहार 5.95%, पश्चिम बंगाल 11.61%, छत्तीसगढ़ 11.77%, मध्य प्रदेश 5.77% और पुडुचेरी 5.97%.
बीजेपी काबिज सीटों पर ज्यादा कटौती, सपा पर कम असर
SIR को लेकर विपक्षी आरोपों के बीच फाइनल लिस्ट ने बीजेपी के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी . जहां बीजेपी काबिज है वहां वोटर ज्यादा कटे हैं. वहीं सपा की अगुआई वाली सीटों पर कटौती कम रही. 1 लाख से ज्यादा वोट कटने वाली 16 सीटों में 15 बीजेपी की हैं. सिर्फ लखनऊ पश्चिम में सपा के 1.07 लाख वोट कम हुए.
अयोध्या विधानसभा 2022 में बीजेपी ने 20 हजार से कम अंतर से जीत हासिल की थी, 2024 लोकसभा में अंतर 4,600 रह गया. SIR में यहां 20% यानी 80 हजार से ज्यादा वोट कट गए. लखनऊ कैंट में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक को 2022 में 39 हजार वोटों से जीत मिली थी, अब यहां 1.24 लाख वोट करीब 33% कम हो गए.
सीटवार गिरावट का ब्योरा
- 21 सीटें: 80 हजार से 99 हजार वोट कम
- 82 सीटें: 50 हजार से ज्यादा वोट कम
- 159 सीटें: 30 हजार से 49,999 वोट कम
बीजेपी और सहयोगी सीटों पर औसत गिरावट 34% तक रही, जबकि सपा सीटों पर 15% से नीचे है.
- 18-34% गिरावट वाली ज्यादातर सीटें बीजेपी की हैं.
- 30-50 हजार वोट कटने वाली 159 सीटों में दो-तिहाई बीजेपी की हैं.
- 50-80 हजार वोट कटने वाली सीटों में सिर्फ 18 सपा की, बाकी 55+ बीजेपी की.
- 80 हजार-1 लाख कटौती वाली 21 सीटों में 19 बीजेपी व सहयोगियों की.
शहरों में झटका, गांवों में अपेक्षाकृत स्थिरता
सबसे ज्यादा गिरावट शहरी सीटों पर हुई है, खासकर महानगरों और वेस्ट यूपी-एनसीआर की विधानसभाओं में. अर्ध-शहरी और कस्बाई क्षेत्रों में भी भारी कटौती देखी गई. इनमें ज्यादातर बीजेपी की सीटें हैं. वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में शहरों की तुलना में वोट कम कटे.
मुस्लिम बहुल जिलों की स्थिति बेहतर
वहीं मुस्लिम बहुल जिलों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही. संभल में 14.47 प्रतिशत, रामपुर में 12.33 प्रतिशत, मुरादाबाद में 10.09 प्रतिशत, बिजनौर में 9.63 प्रतिशत, शाहजहांपुर में 17.90 प्रतिशत, सहारनपुर में 10.48 प्रतिशत और मुजफ्फरनगर में 10.38 प्रतिशत मतदाता कम हुए. बीजेपी प्रभाव वाले शहरी और विकसित जिलों में ज्यादा वोट कटे जबकि मुस्लिम बहुल ग्रामीण-शहरी मिश्रित जिलों में अपेक्षा कम कटे.
क्या बोले डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक
इधर SIR की फाइनल लिस्ट में करीब 2 करोड़ वोर्ट्स के नाम कटने पर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का कहना है कि यह लिस्ट पूरी पारदर्शिता और सूचिता से बनाई है, यह अंतिम नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर आप वोटर हैं और आपके पास डॉक्युमेंट्स हैं तो अभी भी आपका नाम जुड़ सकता है. उन्होंने कहा कि हम लोगों ने कोशिश की कि किसी भी वैध मतदाता का नाम न कटे.
वहीं बीजेपी की जीत वालू सीटों पर ज्यादा मतदाता कटने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसे किसी दल से नहीं जोड़ा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि जो वैध मतदाता हैं उनका वोट किसी भी कीमत पर नहीं कटेगा. उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि अगर आपका का मत वैध है तो आप अपना नाम जुड़वाएं. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने बिना किसी दुर्भावना के यह वोटर लिस्ट जारी की है.
उत्तर प्रदेश SIR से क्यों टेंशन में BJP, कहां चूक गए कार्यकर्ता? CM योगी ने चेताया था
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