UP News: अयोध्या के लिए विनय कटियार क्यों हैं जरूरी? – INA

UP News: अयोध्या के लिए विनय कटियार क्यों हैं जरूरी? – INA

राम नगरी अयोध्या एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मी का केंद्र बन गई है. भाजपा के दिग्गज नेता और राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शुमार विनय कटियार ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अयोध्या सीट से उतरने के स्पष्ट संकेत दे दिए हैं. लंबे समय से मुख्यधारा की राजनीति से दूर रहे कटियार की इस घोषणा से न केवल भाजपा के अंदर हलचल मची है, बल्कि पूरे प्रदेश की सियासत में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं. हाल ही में अयोध्या स्थित अपने आवास पर कार्यकर्ताओं के साथ घंटों चली बंद कमरे की बैठक के बाद मीडिया से रूबरू हुए कटियार ने कहा, ‘किसने कह दिया कि हमारी कोई तैयारी नहीं है? चुनाव की पूरी तैयारी चल रही है. सही समय पर मैदान-ए-जंग में उतरेंगे.’

उन्होंने अयोध्या को अपनी ‘कर्मभूमि’ बताते हुए स्पष्ट किया कि चुनावी डंका यहीं से बजेगा. कटियार ने दावा किया कि जनता उन्हें मैदान में देखना चाहती है और वे 2027 के चुनाव में “एक नहीं, दो-दो हाथ” करने को तैयार हैं. कुर्मी समाज से आने वाले कटियार तीन बार फैजाबाद (अब अयोध्या) लोकसभा सीट से सांसद रह चुके हैं और दो बार राज्यसभा सदस्य भी रहे.

कटियार का नाम अयोध्या से अलग करके नहीं देखा जा सकता

हाल के दिनों में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी से उनकी मुलाकात को भी सियासी नजरिए से देखा जा रहा है. कटियार का नाम अयोध्या से अलग करके नहीं देखा जा सकता. वे राम मंदिर आंदोलन के उन शुरुआती योद्धाओं में से एक हैं, जिन्होंने इस संघर्ष को जन-जन तक पहुंचाया. 1984 में विश्व हिंदू परिषद की युवा शाखा बजरंग दल की स्थापना खुद कटियार ने की थी, जो राम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन का प्रमुख हथियार बना. अयोध्या में उनके घर से ही कई महत्वपूर्ण रणनीतियां बनीं और करसेवकों को संगठित किया गया.

राम मंदिर आंदोलन में कटियार फायरब्रांड नेता के रूप में उभरे

राम मंदिर आंदोलन के स्वर्णिम दौर में कटियार फायरब्रांड नेता के रूप में उभरे. उन्होंने न केवल युवाओं को जोड़ा, बल्कि आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर धार दी. आज जब भव्य राम मंदिर खड़ा है, तो कटियार जैसे नेताओं का योगदान अयोध्या की नई पहचान का आधार है. अयोध्या अब वैश्विक पर्यटन और धार्मिक केंद्र बन रही है और कटियार का मैदान में उतरना राम मंदिर की विरासत को राजनीतिक रूप से मजबूत करने का प्रतीक माना जा रहा है.

कटियार की वापसी से भाजपा का हिंदुत्व आधार और मजबूत होगा

भाजपा नेताओं का मानना है कि कटियार की वापसी से भाजपा का हिंदुत्व आधार और मजबूत होगा. खासकर कुर्मी समाज और राम भक्तों में. विपक्ष के लिए यह चुनौती बन सकती है, क्योंकि अयोध्या सीट अब सिर्फ एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि राम मंदिर की भावनाओं का प्रतीक है. कटियार की इस घोषणा से 2027 का चुनावी रण अयोध्या केंद्रित हो सकता है. देखना यह होगा कि भाजपा उन्हें टिकट देती है या नहीं, लेकिन एक बात साफ है. राम नगरी की सियासत में विनय कटियार का नाम फिर गूंजने वाला है.

अयोध्या के लिए विनय कटियार क्यों हैं जरूरी?




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