Political – शहाबुद्दीन के गढ़ सीवान में क्यों नहीं पनप पाई कांग्रेस, क्या राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा से बदलेंगे समीकरण?- #INA

शहाबुद्दीन के गढ़ सीवान में क्यों नहीं पनप पाई कांग्रेस, क्या राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा से बदलेंगे समीकरण?

राहुल, तेजस्वी, शहाबुद्दीन सहित अन्य.

बिहार में SIR के विरोध में दिल्ली में संसद भवन में कांग्रेस की सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य कांग्रेस सांसदों ने बिहार के सीवान जिले के धरोना विधानसभा की मिनता देवी की तस्वीर लगे टीशर्ट पहनकर विरोध प्रदर्शन किया था और आरोप लगाया था कि 35 वर्ष की मिनता देवी की उम्र वोटर लिस्ट में 124 साल बताई गई है. जिस सीवान की महिला की तस्वीर को कांग्रेस ने SIR विरोध का हथियार बनाया था, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी उसी सीवान जिले में शुक्रवार को वोटर अधिकार यात्रा के साथ पहुंचेंगे.

राहुल गांधी 29 अगस्त को बेतिया, पश्चिम चंपारण से गोपालगंज होते हुए सीवान पहुंचेंगे. 30 अगस्त को छपरा, सारण से आरा होते हुए भोजपुर पहुंचेगे. 30 अगस्त को विराम है और 1 सितंबर को पटना में महाजुलूस के माध्यम से वोटर अधिकार यात्रा का समापन होगा.

वोटर अधिकार यात्रा में राहुल गांधी के साथ-साथ आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, भाकपा (माले) के नेता दीपंकर भट्टाचार्य और वीआईपी नेता के मुकेश सहनी कंधे से कंधे मिलाकर चल रहे हैं. 17 अगस्त से सासाराम से शुरू हुई यात्रा अब अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रही है और शुक्रवार को इसका पड़ाव सीवान जिला होगा. बिहार की सियासत में सीवान और गोपालगंज इलाके का राजनीतिक रूप से काफी महत्व है.

सीवान इलाके में था शहाबुद्दीन का वर्चस्व

इस इलाके में कभी बाहुबली शहाबुद्दीन का वर्चस्व था. शुरुआती चुनावी सालों को सीवान लोकसभा इलाके में कांग्रेस के सांसद चुने जाते थे. 1957 में झूलन सिन्हा, 1962, 1967 और 1971 में मोहम्मद युसूफ कांग्रेस के सांसद रहे, 1977 में मृत्युंजय प्रसाद जनता दल से सांसद चुने गए. 1984 तक इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहा, लेकिन उसके बाद फिर कांग्रेस की सीवान में वापसी नहीं हुई.

2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा और उसके बाद 2019 और 2024 में जदयू का इस सीट पर कब्जा है. जून में पीएम नरेंद्र मोदी सीवान में जनसभा को संबोधित कर चुके हैं और यहां से कांग्रेस और जदयू पर जमकर हमला बोला था. ऐसे में राहुल गांधी की सीवान यात्रा से कांग्रेस का कितना लाभ होगा? यह तो आने वाले चुनाव परिणाम बताएगा?

क्या ओसामा शहाब के खाते में जाएगी रघुनाथपुर सीट?

पिछले लोकसभा चुनाव में शहाबुद्दीन की पत्नी ने हेना साहब ने निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ा था और वह जदयू की विजय लक्ष्मी कुशवाहा से पराजित हुईं थीं, लेकिन बिहार चुनाव से पहले ही सीवान को लेकर आरजेडी ने चाल चलनी शुरू कर दी है. शहाबुद्दीन की पत्नी हेना शहाब ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद से मुलाकात की थी और सीवान की रघुनाथपुर सीट से अपने बेटे ओसामा शहाब को उम्मीदवार बनाने की अपील की थी.

बाद में रघुनाथपुर सीट से आरजेडी के दो बार के विधायक हरिशंकर यादव ने कार्यकर्ता सम्मेलन में ओसामा शहाब को पगड़ी पहनाकर संकेत दिया था कि इस सीट से अगला चुनाव ओसमा शहाब ही चुनाव लड़ेंगे और अब जब शुक्रवार को तेजस्वी यादव और राहुल गांधी सीवान में कदम रखेंगे, तो यह ओसमा शहाब और हेना शाहब के लिए अपनी ताकत दिखाने का अवसर होगा, लेकिन क्या इससे कांग्रेस को कोई फायदा होगा?

राहुल की यात्रा से महागठबंधन की पार्टियों को फायदा

वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक ओम प्रकाश अश्क बताते हैं कि शुरुआती सालों को छोड़ दें तो बाकी समय सीवान लोकसभा सीट पर महागठबंधन के विरोधी दल के उम्मीदवार जीतते रहे हैं. कभी यह सीट जदयू और कभी बीजेपी के पास रही है. फिलहाल यहां से जदयू की विजय लक्ष्मी कुशवाहा सांसद हैं. जनता पार्टी की टिकट पर 1977 में अरविंद प्रसाद के बेटे मृत्युजंय प्रसाद वर्मा चुनाव जीते थे, लेकिन सीवान और गोपालगंज में कांग्रेस की अपनी जमीन खत्म हो चुकी है. सीवान विधानसभा क्षेत्र से 1967 में कांग्रेस के राजा राम चौधरी जीते थे, उसके बाद इस विधानसभा सीट से कांग्रेस का कोई उम्मीदवार नहीं जीता है.

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की सीवान में वोटर अधिकार यात्रा से आरजेडी को मदद को मिल सकती है. भाकपा (माले) को मदद मिल सकती है. भाकपा (माले) का सीवान के दक्षिणऔर पश्चिमी इलाके में काफी प्रभाव रहा है. और उसके विधायक भी चुने जाते रहे हैं. भाकपा (माले) सीवान से संसदीय चुनाव भी लड़ता रहा है, लेकिन कांग्रेस के हिस्से में कुछ भी नहीं रहा. राहुल गांधी सीवान और गोपालगंज की यात्रा जा रहे हैं, लेकिन इससे कांग्रेस को छोड़ महागटबंधन में शामिल दूसरे पार्टियों को ही लाभ मिल पाएगा. कांग्रेस का ज्यादा लाभ मिलने की संभावना नहीं है. संभव है कि कांग्रेस के किसी उम्मीदवार को इस इलाके से सीट भी मिले.

राहुल की यात्रा से क्या बदलेंगे कांग्रेस के हालात?

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की सीवान यात्रा से कांग्रेस को बहुत ज्यादा लाभ मिलने की संभावना नहीं है. वोटर अधिकार यात्रा के दौरान राहुल गांधी बिहार में जिन ज्यादातर इलाकों में गए हैं. वहां महागठबंधन में शामिल पार्टियों को लाभ मिल सकता है. पिछले चुनाव में कांग्रेस ने 19 सीटों पर जीत हासिल की थी.

उन सीटों पर निश्चित रूप से कांग्रेस को लाभ मिलेगा, लेकिन जिस तरह से कांग्रेस ने बिहार में चुनाव प्रचार की शुरुआत की है और वह अंत समय तक उसी तरह से टिकी रहती है, तो निश्चित रूप से सियासत पर इसके प्रभाव पड़ेंगे और राहुल गांधी जो कांग्रेस को बिहार में पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रहे हैं. शायद कामयाब भी हो जाएं, लेकिन बिहार में कांग्रेस आरजेडी और महागठबंधन की पार्टियों के साथ-साथ वोटर अधिकार यात्रा निकालने के बावजूद कांग्रेस अभी तक तेजस्वी यादव को सीएम फेस बनाने का मन नहीं बनाई है, हो सकता है कि यह अधिक सीट हासिल करने की रणनीति हो, लेकिन इससे महागठबंधन की पार्टियों के बीच अच्छा मैसेज नहीं जा रहा है.

शहाबुद्दीन के गढ़ सीवान में क्यों नहीं पनप पाई कांग्रेस, क्या राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा से बदलेंगे समीकरण?

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