ईरान में इंटरनेट ब्लैकआउट और हिंसक झड़पें, नई दिल्ली के लिए क्यों है यह 'अलार्म बेल'?
ईरान इस समय गंभीर राजनीतिक और आर्थिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है. दिसंबर 2025 के अंत से शुरू हुए महंगाई, बेरोजगारी और मुद्रा अवमूल्यन के खिलाफ प्रदर्शन अब बड़े पैमाने पर फैल गया हैं. शुरुआती तौर पर आर्थिक मांगों तक सीमित रहे ये विरोध अब शासन के खिलाफ खुली चुनौती के रूप में सामने आ रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिंसक झड़पों में अब तक कम से कम 78 लोगों की मौत हो गई, जबकि वास्तविक आंकड़ा इससे अधिक होने की आशंका जताई जा रही है. हालात की गंभीरता को देखते हुए ईरान सरकार ने 7 जनवरी से इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं पर सख्त पाबंदियां लागू कर दी हैं.
भारत के लिए क्यों अहम है ईरान?
इंडिया ने पिछले कुछ वर्षों में मध्य एशिया, रूस और यूरोप तक अपनी पहुंच मजबूत करने के लिए ईरान को एक प्रमुख ट्रांजिट हब के रूप में विकसित किया है. भारत की कई रणनीतिक कनेक्टिविटी परियोजनाएं ईरान से होकर गुजरती हैं. ऐसे में वहां की किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर भारत की विदेश नीति और व्यापारिक योजनाओं पर पड़ता है.
चाबहार बंदरगाह पर मंडराता खतरा
ईरान के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित Chabahar Port भारत की सबसे अहम रणनीतिक परियोजनाओं में से एक है. यह बंदरगाह पाकिस्तान को बायपास करते हुए भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सीधी पहुंच देता है. अगर ईरान में अशांति और बढ़ती है, तो चाबहार पर परिचालन धीमा पड़ सकता है. इससे न सिर्फ भारत-अफगानिस्तान व्यापार प्रभावित होगा, बल्कि क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ाने की भारत की रणनीति को भी झटका लग सकता है.
INSTC पर असर की आशंका
ईरान, भारत और रूस को जोड़ने वाला इंटरनेशनल नॉर्थ साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर यानी International North South Transport Corridor भारत के लिए यूरोप तक तेज और सस्ता व्यापार मार्ग है. मौजूदा संकट के चलते अगर ईरान में लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा हालात बिगड़ते हैं, तो इस कॉरिडोर के जरिए माल ढुलाई बाधित हो सकती है, जिससे भारतीय निर्यातकों और आयातकों को नुकसान उठाना पड़ सकता है.
ईरान-भारत के बीच व्यापारिक संबंध
वाणिज्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार FY2024-25 में भारत और ईरान के बीच द्विपक्षीय व्यापार 1.68 अरब डॉलर तक पहुंच गया था. इसमें भारत का निर्यात 1.24 अरब डॉलर और आयात 0.44 अरब डॉलर रहा, जिससे भारत को 0.80 अरब डॉलर का ट्रेड सरप्लस मिला. भारत से ईरान को चावल, चाय, चीनी, दवाइयां, कृत्रिम फाइबर और इलेक्ट्रिकल मशीनरी भेजी जाती हैं. वहीं ईरान से भारत सूखे मेवे, रसायन और कांच के उत्पाद आयात करता है.
कोई शक नहीं भारत होगा प्रभावित
अगर ईरान में मौजूदा संकट और गहराता है, तो इसका असर केवल द्विपक्षीय व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा. इससे भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीतिक संतुलन भी प्रभावित हो सकता है. ऐसे में नई दिल्ली की नजर ईरान के हालात पर टिकी हुई है, क्योंकि यह संकट भारत के लिए दूर का नहीं, बल्कि सीधे उसके रणनीतिक हितों से जुड़ा हुआ है.
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