अमेरिका की सख्ती – ‘थर्ड वर्ल्ड’ देशों से आने वालों पर रोक की तैयारी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिया कि वे उन देशों से आने वाले लोगों पर प्रतिबंध लगाने की योजना बना रहे हैं, जिन्हें उन्होंने ‘तीसरी दुनिया’ की श्रेणी में रखा है। वाशिंगटन में एक अफगान नागरिक द्वारा दो नेशनल गार्ड सैनिकों को कथित रूप से गोली मारने की घटना के बाद ट्रंप ने यह कड़ा बयान दिया।
‘तीसरी दुनिया’ की अवधारणा कैसे शुरू हुई?
‘प्रथम’, ‘द्वितीय’ और ‘तृतीय’ विश्व की अवधारणा शीत युद्ध के समय विकसित हुई थी, जब दुनिया दो बड़े ब्लॉक्स में बंट चुकी थी –
- अमेरिका समर्थित पश्चिमी ब्लॉक
- सोवियत समर्थित साम्यवादी ब्लॉक
जो देश किसी भी गुट में शामिल नहीं हुए, उन्हें ‘तृतीय विश्व’ में रखा गया। समय के साथ यह शब्द गरीब, विकासशील या कृषि प्रधान देशों के लिए भी इस्तेमाल होने लगा।
प्रथम विश्व – अमेरिका, पश्चिमी यूरोप, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और कुछ तटस्थ यूरोपीय देश
द्वितीय विश्व – सोवियत गणराज्य, पोलैंड, पूर्वी जर्मनी, चीन, मंगोलिया, उत्तर कोरिया, वियतनाम आदि
तृतीय विश्व – अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के वे देश जो किसी भी गुट के साथ नहीं थे और आर्थिक रूप से पिछड़े माने जाते थे
कौन से देश बने अमेरिका की चिंता का कारण?
अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) के निदेशक जोसेफ एडलो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि ‘चिंताजनक देशों’ से आने वाले हर विदेशी नागरिक के ग्रीन कार्ड की कड़ाई से जांच की जाएगी।
USCIS के अनुसार यह वही सूची है, जिसे ट्रंप प्रशासन ने जून के एक आदेश में परिभाषित किया था। इस आदेश में 19 देशों को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चिंताजनक’ बताया गया था।
इन देशों पर प्रवेश प्रतिबंध लगाया गया था – अफगानिस्तान, म्यांमार, चाड, कांगो (ब्राजाविल), इक्वेटोरियल गिनी, इरिट्रिया, हैती, ईरान, लीबिया, सोमालिया, सूडान, यमन
इन देशों पर आंशिक प्रतिबंध था
बुरुंडी, क्यूबा, लाओस, सिएरा लियोन, टोगो, तुर्कमेनिस्तान, वेनेज़ुएला
विशेषज्ञों का कहना है कि इन देशों को अलग करने से अमेरिका का प्रभाव कमजोर पड़ेगा और चीन इन क्षेत्रों में और मजबूत हो सकता है।