Delhi-Ncr ‘VB-G RAM-G’ पर क्यों बरपा हंगामा, मनरेगा से कितनी अलग है ये योजना?- #INA

'VB-G RAM-G' पर क्यों बरपा हंगामा, मनरेगा से कितनी अलग है ये योजना?

‘VB–G RAM G’ पर मचा घमासान.

केंद्र सरकार ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने जा रही है. अब मनरेगा की जगह नई योजना VB-G RAM-G को लागू करने की तैयारी है, जिसके लिए विधेयक पेश किया जाएगा. सरकार इसे विकसित भारत 2047 का रोडमैप बता रही है. हमने आपके लिए इस बिल को लेकर सरल शब्दों में फिक्र की प्रश्नोत्तरी तैयार की है ताकि आपको हर सवाल का जवाब मिल सके.

पहला प्रश्न है- नई योजना का नाम क्या होगा? उत्तर है- विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण). दूसरा प्रश्न है- नई योजना में कितने दिन रोजगार की गारंटी? अब ग्रामीण इलाकों में हर साल 125 दिन रोजगार देने की तैयारी है.

ये योजना मनरेगा की जगह लाई जा रही है तो दोनों में फर्क क्या है? मनरेगा में 100 दिन रोजगार का नियम है जबकि इसमें 125 दिन. मनरेगा में सिर्फ केंद्र का खर्च होता है जबकि नई स्कीम में केंद्र के साथ राज्यों को भी आर्थिक योगदान देना होगा. राज्यों के हिसाब से अलग-अलग योगदान का अनुपात अलग-अलग हो सकता है.

काम के हिसाब से पंचायतों की ग्रेडिंग

नई स्कीम में काम के हिसाब से पंचायतों की A, B, C…ग्रेडिंग होगी यानी जहां जैसा काम वैसी ग्रेडिंग. अभी ये व्यवस्था नहीं है. बुआई के सीजन में मजदूरों की कमी को दूर करने के लिए भी इसमें प्रावधान है. उस दौरान राज्य चाहे तो काम रोककर मजदूरों को खेती के कार्यों के लिए छुट्टी दे सकती है. इस व्यवस्था के तहत साल में कुल 60 दिन की राहत होगी.

ये छुट्टी एक साथ नहीं बल्कि अलग-अलग चरणों में मिलेगी. जैसे किसी सीजन में 15 दिन, किसी में 20 दिन. अगला प्रश्न ये है कि ग्रामीण विकास के लिए कितने क्षेत्र चिन्हित किए गए हैं. सरकार का फोकस चार क्षेत्रों पर है. इनमें जल सुरक्षा, कोर ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका से जुड़ी अवसंरचना और मौसमी घटना से निपटने के लिए विशेष कार्य शामिल हैं.

योजना पर विवाद क्यों हो रहा?

एक प्रश्न ये भी है कि इस योजना पर विवाद क्यों हो रहा है. एक तो इसका नाम है G RAM G. यानी नाम में राम है. हालांकि, ये इस स्कीम का ABBREVIATION है लेकिन आपत्ति हो सकती है. दूसरा- महात्मा गांधी का नाम हटाने का विरोध हो रहा है. नाम में बदलाव से जुड़ा बिल संसद में कल केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह पेश करेंगे.

आप सोच रहे होंगे तो फिर अब मनरेगा का क्या होगा? जाहिर है नया बिल पास होने पर मनरेगा निरस्त हो जाएगा. सरकार के मुताबिक, नए बिल में रोजगार सृजन के साथ टिकाऊ ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर विशेष जोर दिया गया है. पारदर्शिता के लिए AI आधारित धोखाधड़ी की पहचान और साल में दो बार सामाजिक ऑडिट का प्रावधान किया गया है.

नाम बदलने के मुद्दे पर कांग्रेस आक्रामक

कांग्रेस नाम बदलने के मुद्दे पर आक्रामक है. पार्टी नेता के सी वेणुगोपाल के मुताबिक महात्मा गांधी के विचारों को खत्म करने के लिए उनका नाम मिटाया जा रहा है. मनरेगा कांग्रेस सरकार के अहम प्रोजेक्ट्स में एक है. कांग्रेस का कहना है कि नरेंद्र मोदी ने ‘महात्मा गांधी रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट’ का नाम बदलकर ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ रख दिया है.

कांग्रेस ने कहा, महात्मा गांधी को इनके गोडसे ने मारा और उनके नाम को हटाने का पाप यह पापी कर रहे हैं. पर सिर्फ नाम ही नहीं बदला है. असल में मोदी सरकार ने काम के अधिकार की गारंटी वाले इस कानून को बदलकर उसमें शर्तें और केंद्र का नियंत्रण बढ़ा दिया है, जो राज्यों और मजदूरों दोनों के खिलाफ है.

कांग्रेस ने आगे कहा, वो MGNREGA जो ग्रामीण भारत के लिए संजीवनी साबित हुआ, जिसने गांव-देहात में लोगों को काम का अधिकार दिया, जिसने ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत की- उसे पूरी तरह से तबाह किया जा रहा है. ये अकुशल मजदूरों के लिए स्कीम थी, जिसका बजट केंद्र सरकार देती थी. अब बजट का 60% भार केंद्र सरकार और 40% भार राज्य सरकारों को उठाना पड़ेगा. यह राज्यों के राजस्व पर हमला है.

ब्यूरो रिपोर्ट टीवी9 भारतवर्ष

‘VB-G RAM-G’ पर क्यों बरपा हंगामा, मनरेगा से कितनी अलग है ये योजना?

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