Nation- जयपुर में 42 इमारतों पर चला बुलडोजर, 78 पर लाल निशान, 6 किए गए सील; क्यों लिया गया ये एक्शन?- #NA

जर्जर इमारतों को किया जा रहा ध्वस्त
राजस्थान की राजधानी जयपुर शहर के मनिहारी रास्ता, खेजड़ों का रास्ता, त्रिपोलिया और किशनपोल जैसे पुराने मोहल्ले अब सिर्फ विरासत की पहचान नहीं रहे, बल्कि खतरे का निशान बन चुके हैं. इन इलाकों में कई पीढ़ियों से किराए पर रह रहे लोग आज जर्जर होती इमारतों के नीचे जान जोखिम में डालकर रह रहे हैं. ऐसे में नगर निगम और हेरिटेज विंग ने अब सख्त रुख अपनाया है. शहर में कुल 126 जर्जर भवन को चिह्नित किया गया है, जिन पर जल्द ही बुलडोजर कार्रवाई हो सकती है.
हेरिटेज जोन के वार्ड 72 में एक इमारत के आंशिक रूप से गिरने के बाद सील किया गया है, जबकि त्रिपोलिया के नाटाणीयों की हवेली में बुलडोजर की दस्तक सुनाई दी. लेकिन यह महज शुरुआत है. असली चिंता का विषय किशनपोल जोन है, जहां सबसे ज्यादा 65 मकानों को खतरनाक घोषित किया गया है, इनमें से 6 को ‘बेहद खतरनाक’ श्रेणी में रखा गया है. यह इमारतें किसी भी वक्त ढह सकती हैं. मानसून की तेज बारिश और हवाएं इन इमारतों की हालत और भी नाजुक बना रही हैं.
8 इमारतें सील
हेरिटेज आयुक्त डॉ. निधि पटेल ने इस पूरे अभियान की निगरानी के लिए विशेष टीम गठित की है, जिसने चारों जोन में 48 ऐसी इमारतों की पहचान की है, जो हादसों को न्योता दे रही थीं. इनमें से 8 को सील कर दिया गया है और बाकी के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई की गई है. भवनों की फिजिकल वेरिफिकेशन भी की जा रही है ताकि मरम्मत के नाम पर सिर्फ लीपापोती न हो. आरपीएस पुष्पेंद्र सिंह राठौड़, डिप्टी कमिश्नर (हेरिटेज विंग) के अनुसार सबसे बड़ी चुनौती उन किराएदारों को बाहर निकालना है, जो दशकों से इन इमारतों में रह रहे हैं.
मकान मालिकों को मिली लास्ट वार्निंग
मकान मालिक मरम्मत नहीं करवा रहे और किराएदार निकलने को तैयार नहीं. इस परिस्थिति में प्रशासन ने अब मजबूरी में सीलिंग और ध्वस्तीकरण का रास्ता चुना है. मकान मालिकों को अंतिम चेतावनी दी गई है. वह मकानों की मरम्मत कराएं, नहीं तो निगम खुद इमारत गिरा देगा. यह पहली बार नहीं जब ऐसी लिस्ट बनाई गई है, लेकिन इस बार प्रशासन गंभीर है. बीते सालों में हुई घटनाओं ने सबक दिया है कि अब लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है.
नगर निगम एक्शन मोड में
किशनपोल से लेकर हवामहल और सिविल लाइन तक, हर जोन में निगम की टीमें एक्शन मोड में हैं. जयपुर की पहचान अब सिर्फ उसकी विरासत नहीं, उसकी मजबूती भी होगी. जर्जर दीवारें अब इतिहास बनेंगी और शहर सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ेगा.
जयपुर में 42 इमारतों पर चला बुलडोजर, 78 पर लाल निशान, 6 किए गए सील; क्यों लिया गया ये एक्शन?
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