World News: 1000 KM में तबाही का अंदेशा… रूस को रोकने के लिए नाटो ने बनाया नया ब्लूप्रिंट, दिखने लगा असर – INA NEWS


युद्धविराम को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तमाम कोशिशें विफल होती दिख रही हैं. वार्ता के तीसरे चरण को लेकर अभी तक कोई हलचल नहीं है. इस बीच रूस और यूक्रेन दोनों तरफ से सर्दियों में विध्वंसक युद्ध की तैयारी की जा रही है. हालात ऐसे हैं कि यूरोप में परमाणु घमासान शुरू हो सकता है क्योंकि यूक्रेन ने दो परमाणु संयंत्रों पर हमला करके रूस का पारा बढ़ा दिया है. जेपोरिजिया और कुर्स्क एटमी प्लांट पर हमला किया गया. रेडिएशन रिसाव की आशंका बढ़ गई है. दरअसल, ये यूक्रेन का नया पैटर्न है. अब रूस को रोकने के लिए वो परमाणु विस्फोट का सहारा ले रहा है, जबकि यूक्रेन को ये समझना होगा कि एटमी बवंडर में पूरा यूरोप घिर सकता है.
अभी रूस इन तीन पैटर्न से यूक्रेन में तबाही मचा रहा है. इसके अलावा जमीन पर उसके टैंक, आर्मर्ड व्हीकल और सैनिक लगातार आगे बढ़ रहे हैं. अब युद्धविराम की संभावना बेहद कम हो चुकी है इसलिए रूस लगातार यूक्रेन का खात्मा करने के लिए आगे बढ़ रहा है. रूस के आक्रामक तेवर देखते हुए कीव में कोहराम मच गया है. जेलेंस्की ने नाटो देशों से मदद की गुहार लगाई है. अब नाटो ने ब्लूप्रिंट बनाया है, जिससे रूस को फिलहाल आगे बढ़ने से रोका जा सके.
रूस के एनर्जी सेक्टर को यूक्रेन टारगेट कर रहा है. इसके अलावा क्रीमिया की घेराबंदी की जा रही है, जिससे रूस का फोकस क्रीमिया और एनर्जी सेक्टर पर फिक्स हो जाए, लेकिन इतना काफी नहीं है इसलिए ब्रिटेन ने जेलेंस्की को एक खुफिया प्लान बनाकर दिया है, जिसमें रूस के न्यूक्लियर ठिकानों पर हमले के लिए कहा है.
यही वजह है कि यूक्रेन के ड्रोन रूस के एटमी पावर प्लांट पर हमले के लिए तैयार हैं. बीती रात कई ठिकानों पर हमले हुए. हांलाकि रूस का दावा है.उसने यूक्रेन के हमलों को इंटरसेप्ट कर लिया है क्योंकि रूस ने डिफेंस सिस्टम पहले ही तैनात कर दिए थे. अलास्का-वाशिंगटन वार्ता विफल होने का मतलब है युद्ध का दूसरा चरण आरंभ होना. एक दिन पहले यूक्रेन के स्वतंत्रता दिवस पर रूस ने ताबड़तोड़ हमले किए. इसके बाद भी नॉनस्टॉप हमले किए जा रहे हैं. डोनेस्क से लेकर बूचा तक ड्रोन दागे जा रहे हैं, लेकिन सबसे बड़ा खतरा जेपोरिजिया और कुर्स्क न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर है, जहां यूक्रेन ने हमले किए वहां रेडियोएक्टिव रिसाव होने की खबर है. रूस की न्यूक एक्सपर्ट टीम कुर्स्क और जेपोरिजिया में रेडियोएक्टिव रिसाव की जांच में जुटी है..
फिर कुर्स्क में भीषण जंग शुरू हुई
यूक्रेन के न्यूक्लियर पावर प्लांट पर हमले से रेडियोएक्टिव रिसाव का खतरा बढ़ गया है, जिससे एटमी तबाही का अंदेशा बढ़ गया है. आशंका है, जेपोरिजिया न्यूक्लियर पावर प्लांट पर अगर बड़ा हमला हुआ तो रिसाव कई स्तर पर होगा. 50 किलोमीटर तक सीवियर जोन रहेगा, जिसमें आने वाले लोग तुरंत मारे जा सकते हैं, जबकि इससे आगे 150 किमी. तक म़ॉडरेट जोन होगा, जिसमें कुछ देर बाद रेडिएशन पहुंचेगा तो वो लोग गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं.
इससे आगे माइल्ड जोन होगा, जिसका दायरा 300 किमी तक हो सकता है. इसमें आने वाले लोगों पर भी असर होगा.जिसका असर काफी वक्त तक रह सकता है. तीनों जोन में 5 लाख से ज्यादा लोगों पर सीधा असर होगा, जबकि इसी तरह का हमला कुर्स्क पर भी किया गया है. जेपोरिजिया-कुर्स्क में दूरी 521 किलो मीटर है, लेकिन तबाही का दायरा 1 हजार किलोमीटर तक हो सकता है यानी यूरोप के कई देश इसमें आ सकते हैं.
कुर्स्क न्यूक्लियर प्लांट में हमले से रिसाव हुआ तो सीवियर जोन 30 किमी का हो सकता है, जिसमें आने वाले लोग तुरंत मारे जा सकते हैं. इससे आगे मॉडरेट जोन 120 किमी तक हो सकता है. उसमें आने वाले लोगों पर भी असर होगा, जबकि माइल्ड जोन का दायरा 250 किमी होगा. तीनों जोन में रेडिएशन 3 लाख लोगों के सीधा खतरा बन सकता है.
एक बार फिर से कुर्स्क में भीषण जंग शुरू हो गई है. यूक्रेनी सैनिक बॉर्डर से कुर्स्क में 50 किलोमीटर अंदर तक घुस गए हैं. पूरा इलाका उनके कब्जे में है. उनसे मुकाबले के लिए नॉर्थ कोरिया के सैनिकों ने मोर्चा संभाला हुआ है. फ्रंटलाइन पर पहुंचकर आमने-सामने की जंग हो रही है. इससे बौखलाए यूक्रेन ने कुर्स्क एटमी प्लांट पर ड्रोन स्ट्राइक की. ठीक उसी वक्त जेपोरिजिया परमाणु प्लांट पर भी हमला किया, जो अभी रूस के कब्जे में है. कुर्स्क में एटमी प्लांट का प्रोडक्शन 50 फीसदी कम हुआ है, जबकि जेपोरिजिया से भी रिसाव शुरू हो गया. अब एटमी तबाही का खतरा दो गुना हो गया है.
रूस में कौन-कौन हथियार मचा सकते हैं तबाही
इन दोनों न्यूक्लियर प्लांट पर हमले का मतलब है. रूस समेत. पूरे उत्तरी और पूर्वी यूरोप पर रेडियोएक्टिव विकिरण का खतरा मंडरा रहा है. इस बीच यूक्रेन मिसाइलों से हमले ना कर दे.इसलिए अमेरिका ने रूसी धरती पर उसकी मिसाइलों के इस्तेमाल को बैन कर दिया है. इस बीच यूक्रेन ने दावा किया है कि अब रूसी धरती पर हो रही सभी हमलों में यूक्रेनी हथियारों का इस्तेमाल किया जा रहा है. हमने हथियारों का प्रोडक्शन कई गुना बढ़ा लिया है. यूक्रेन की इतनी बड़ी तैयारी से क्रेमलिन भी सोच में पड़ गया है. अब कहा जा रहा है कि यूक्रेन की मदद यूरोपीय देश कर रहे हैं. जो रणनीति भी बना रहे हैं. और बारूद भी भेज रहे हैं.
रूस में कौन-कौन से हथियार तबाही मचा सकते हैं, जिनका इस्तेमाल यूक्रेन करने जा रहा है. पहला हथियार फ्लेमिंगो मिसाइल है, जिसकी रेज- 3000 किमी है. अक्टूबर तक 1000 फ्लेमिंगो यूक्रेन बनाने जा रहा है. दूसरा हथियार R-360 नेपच्यून मिसाइल है. इसकी रेंज- 1000 किमी है, जबकि स्टॉर्म शैडो की रेंज- 500 किमी है, जिससे यूक्रेन ने काफी हमले किए हैं. ATACMS की रेंज- 300 किमी है. इसका इस्तेमाल यूक्रेन करता रहा है. साथ ही TB-2 ड्रोन की रेंज- 300 किमी है. इसे यूक्रेन ने तुर्किये से लिया था.
रूस की यूरोपीय देशों को धमकी
2295 किमी की रूस-यूक्रेन की सीमा पर 3 साल से ज्यादा वक्त से युद्ध चल रहा है. युद्धविराम की कोशिश फेल होने से युद्ध और तेज हो गया है. रूसी सेना यूक्रेन के कई इलाकों में घुसी हुई है. इसी पैटर्न पर यूक्रेन भी चल रहा है. कुर्स्क और बेलगोरोद उसके टारगेट पर हैं. रूस ने दावा किया है कि रूस के एनर्जी सेक्टर पर हुए हमलों के पीछे यूरोपीय देश हैं, जो लगातार यूक्रेन को हथियार भेज रहे हैं. रूस पहले ही काला सागर में हमले के लिए ब्रिटेन और फ्रांस को जिम्मेदार ठहरा चुका है कि इनकी मदद से ही यूक्रेन आगे बढ़ रहा है. इस बीच क्रेमलिन में खलबली मच गई है क्योंकि अब जर्मनी के बाद नॉर्वे भी यूक्रेन में वेपन प्लांट खोलने जा रहा है.
यूक्रेन के हमले जारी है. रूस के एटमी प्लांट पर अटैक से क्रेमलिन में कोहराम मचा हुआ है. अब रूस ने धमकी दी है कि अगर यूरोपीय देश यूक्रेन को सैन्य सहायता देकर उकसाते रहे तो रूस अपने परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है, यानी यूरोप में खतरे का विस्तार कभी भी हो सकता है.
ब्यूरो रिपोर्ट, TV9 भारतवर्ष
1000 KM में तबाही का अंदेशा… रूस को रोकने के लिए नाटो ने बनाया नया ब्लूप्रिंट, दिखने लगा असर
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