World News: 9 महीने बाद सीरिया को फिर से कंट्रोल में लेने के लिए मैदान में उतरी रूस की सेना – INA NEWS

World News: 9 महीने बाद सीरिया को फिर से कंट्रोल में लेने के लिए मैदान में उतरी रूस की सेना – INA NEWS

व्लादिमीर पुतिन की सेना की फिर से सीरिया में एंट्री हो गई है. मिडिल ईस्ट में इसे अमेरिका और तुर्की के लिए झटका बताया जा रहा है. रूस की सेना सबसे पहले कामिशली हवाई अड्डे के जरिए सीरिया में एंटर की है. शुरुआत में गश्ती के बाद रूस की सेना सीरिया के दक्षिण पूर्व इलाके को कंट्रोल करने में जुट गई है.

कुछ ही महीने पहले सीरिया की अल-शरा सरकार ने अपने मुल्क में रूसी सेना को आमंत्रित किया था. सीरिया की सरकार का कहना था कि रूस की सेना अगर यहां आकर कंट्रोल करती है, तो सीरिया का विभाजन रूक सकता है.

हेलिकॉप्टर और रडार एक्टिव

सीरिया टीवी के मुताबिक कामिशली एयर पोर्ट पर उतरने के बाद रूस की सेना ने उस इलाके में हेलिकॉप्टर और रडार की तैनाती कर दी है. इसके अलावा बेस पर सैनिकों की संख्या भी बढ़ा दी है. हालांकि, कितने सैनिक यहां तैनात किए गए हैं, उसके बारे में आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है.

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि रूस की सेना लगातार इस एयर पोर्ट के जरिए रसद और सैनिकों को सीरिया में जुटा रही है. सीरिया के सैन्य जानकारों का कहना है कि रूस फिर से सीरिया में अपनी सेना का पुनर्गठन कर रहा है.

सीरिया में क्यों एक्टिव हुआ रूस?

1. मध्य पूर्व में ईरान के बाद सीरिया रूस का भरोसेमंद देश रहा है. बशर अल असद शासन के वक्त रूस की सेना सीरिया में तैनात थी. रूस सीरिया के जरिए पूरे मिडिल ईस्ट को मॉनिटर कर रहा था, लेकिन दिसंबर 2024 में तुर्की और अमेरिका के संयुक्त प्रयास से सीरिया में बशर अल असद का तख्तापलट हो गया. इसके बाद से रूस का कंट्रोल कमजोर पड़ गया. हालांकि, नए सिनेरियो ने रूस को सीरिया में फिर से एक्टिव होने का मौका दिया है.

2. पिछले महीने सीरिया के अंतरिम विदेश मंत्री विदेश मंत्री असद अल-शैबानी मॉस्को गए थे. शैबानी ने इस दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात की. शैबानी का कहना था कि रूस अगर सीरिया में सैनिक नहीं भेजता है तो सीरिया टुकड़ों में बंट जाएगा. सीरिया पर इजराइल और अमेरिका की बुरी नजर है.

3. दरअसल, सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अल-शरा की तमाम कोशिशों के बाद एकजुटता को लेकर बात नहीं बन रही है. सीरिया में एक तरफ सीरिया डेमोक्रेटिक फोर्स तो दूसरी तरफ आईएसआईएस के लड़ाके एक्टिव हैं. ड्रूज के जरिए इजराइल की कोशिश भी अलग देश बनाने की है. इसे सुलझाने में अल शरा नाकाम रहे हैं. इतना ही नहीं, इजराइल ने अल शरा को मारने के लिए दमिश्क में स्ट्राइक भी पिछले महीने कर दिया था.

तुर्की-अमेरिका के लिए झटका क्यों?

सीरिया में बशर अल असद की सरकार गिराने में तुर्की और अमेरिका ने बड़ी भूमिका निभाई थी. दोनों की कोशिश सीरिया से असद के जरिए रूस को भगाना था, लेकिन बदले परिस्थिति में रूस फिर से सीरिया में एक्टिव हो गया है.

तुर्की सीरिया का पड़ोसी मुल्क है. दोनों की सीमा 909 किमी की है. वहीं अमेरिकी सीरिया से कई उर्जा डील करना चाहता है. रूस अब जिस तरीके से सीरिया में एक्टिव हुआ है, उससे अमेरिका के मंसूबों को झटका लग सकता है.

9 महीने बाद सीरिया को फिर से कंट्रोल में लेने के लिए मैदान में उतरी रूस की सेना

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