World News: फ्रांस के बाद अब अमेरिका में प्रदर्शनकारियों का हल्ला बोल, सड़कों पर उतरेंगे 8 लाख से ज्यादा लोग – INA NEWS


फ्रांस के बाद अबअमेरिका में सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन होने जा रहा है. आज से 8 दिन बाद यानी 18 अक्टूबर को. ये प्रदर्शन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ होगा. खबरों के मुताबिक 2500 से ज्यादा जगहों पर लोग जुटेंगे, वो भी लाखों की संख्या में. इस आंदोलना को नाम दिया गया है- No Kings यानी कोई राजा नहीं.
खास बात ये है कि ठीक इसी नाम से एक आंदोलन ट्रंप के खिलाफ चार महीने पहले भी हो चुका है. तब अमेरिका के छोटे-बड़े शहरों में पाँच मिलियन से ज्यादा लोगों ने सड़कों पर उतरकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बढ़ते कार्यकारी अधिकार यानी Executive Power के विस्तार का विरोध किया था. आइए जानते हैं इस बार ये आंदोलन क्यों हो रहा है?
ये आंदोलन क्यों हो रहा है?
नो किंग्स नाम अपने आप में संदेश देता है. संदेश ये कि अमेरिका किसी राजा का देश नहीं है. आंदोलनकारी मानते हैं कि ट्रंप लोकतांत्रिक सीमाओं को तोड़कर अपने हाथ में ज्यादा ताकत लेने की कोशिश कर रहे हैं. वे अदालतों की अनदेखी कर रहे हैं, विरोधी आवाजों को दबा रहे हैं, मीडिया, कलाकारों पर सेंसरशिप लगाने की कोशिश कर रहे हैं.
आयोजक संगठन Indivisible और कई मजदूर संघों का कहना है कि यह प्रदर्शन ट्रंप सरकार की तानाशाही रवैये के खिलाफ है. हाल में संघीय सरकार के बंद यानी Shutdown हो जाने से लाखों सरकारी कर्मचारियों की नौकरी पर असर पड़ा है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह भी ट्रंप का सत्ता को अपने कब्जे में लेने की चाल है.
नो किंग्स का मतलब क्या है?
यह आंदोलन मूल रूप से 50501 मूवमेंट से शुरू हुआ था. मतलब 50 राज्यों में 50 प्रदर्शन, एक आंदोलन. इसका मकसद है ट्रंप की राजा जैसी राजनीति को चुनौती देना. इस आंदोलन के आयोजकों का कहना है कि ट्रंप खुले तौर पर तीसरी बार राष्ट्रपति बनने की बात करते हैं और अपने आपको किंग डोनाल्ड की तरह पेश कर रहे हैं. इसलिए लोग अब फिर से सड़कों पर उतरकर यह याद दिलाना चाहते हैं कि अमेरिका में कोई राजा नहीं होता.
आंदोलन के समर्थन में कौन है?
इस आंदोलन को मज़दूर संघों, सरकारी कर्मचारियों के संगठनों, और सामाजिक संस्थाओं का व्यापक समर्थन मिल रहा है. American Federation of Government Employees (AFGE) ने भी अपने 8 लाख से ज़्यादा सदस्यों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है. रिपब्लिकन नेता इन प्रदर्शनों को हेट अमेरिका रैली यानी देशविरोधी बता रहे हैं. उनका आरोप है कि डेमोक्रेटिक पार्टी जानबूझकर शटडाउन हटाने में देरी कर रही है ताकि यह रैली पहले हो सके.
फ्रांस के बाद अब अमेरिका में प्रदर्शनकारियों का हल्ला बोल, सड़कों पर उतरेंगे 8 लाख से ज्यादा लोग
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