World News: ईरान में फिर शुरू ऑपरेशन मोसाद! मुस्लिम देश ने तालिबान से मांगी मदद – INA NEWS

World News: ईरान में फिर शुरू ऑपरेशन मोसाद! मुस्लिम देश ने तालिबान से मांगी मदद – INA NEWS

इजराइल ईरान से युद्ध की तैयारी कर रहा है और ईरान की सेना भी जवाब देने की तैयारियों में जुटी है लेकिन जंग शुरु होने से पहले ही ईरान में लगातार धमाके हो रहे हैं. ईरान जानता है कि इसकी वजह इजराइली खुफिया एजेंसी मोसाद का मजबूत नेटवर्क है. ईरान लाख कोशिशों के बावजूद मोसाद के नेटवर्क को खत्म करने में नाकाम रहा है. अब ईरान ने तालिबान से मदद ली है. तालिबान के पास एक ऐसी लिस्ट है जिसमें अफगानिस्तान में काम करने वाले ब्रिटिश जासूसों की जानकारी है.

उधर मोसाद के जासूसों को पकड़ने के लिए के लिए ईरान पूरी ताकत लगा दी है. घर घर की तलाशी ली जा रही है, लेकिन ईरान अब भी धमाकों से दहल रहा है. ये मोसाद के सबसे नए हमले की तस्वीर है.धमाका IRGC के मिसाइल बेस में हुआ, तरीका वही जो मोसाद का है. ईरान के आसमान में अचानक कुछ ड्रोन दिखाई दिए और फिर ये जोरदार धमाका हो गया.

शिराज इलाके में मची तबाही

ड्रोन मिसाइल बेस से टकराया, एयर डिफेंस सिस्टम एक बार फिर नाकाम हुआ और उसके बाद ईरान के शिराज इलाके में तबाही हुई. जहां धमाका हुआ वहां ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों का ठिकाना बनाया था. बैलिस्टिक मिसाइल के लॉन्च साइट की सुरक्षा के लिए एयर डिफेंस की तैनाती भी थी,लेकिन मोसाद ने कम ऊंचाई पर ड्रोन भेजा जिसे एयर डिफेंस ड्रोन को इंटरसेप्ट नहीं कर सका. ड्रोन से मिसाइल बेस में धमाके के बाद आग लग गई.

ईरान में मोसाद लगातार एक्टिव

ईरान में मोसाद लगातार अपनी मौजूदगी का सबूत दे रहा है.लगातार हमले हो रहे हैं और ईरान को डर है कि मोसाद का ऑपरेशन ईरान की ताकत के लिए बेहद घातक साबित हो सकता है.अब मोसाद और दूसरे जासूसों को पकड़ने के लिए ईरान ने नया तरीका निकाला है. ईरान ने तालिबान से मदद की मांग की है, ब्रिटिश एजेंसी की लीक लिस्ट की मांग की है,लिस्ट में MI-6 और स्पेशल सर्विस स्टाफ की जानकारी है.ये लिस्ट ब्रिटेन की गलती से लीक हो गई थी.ईरान ने तालिबान से लिस्ट की मांग की थी, जिसके जरिए ईरान में मौजूद जासूसों की पहचान की जा सके और पश्चिमी देशों पर दबाव भी बनाया जा सके.

100 से अधिक ब्रिटिश जासूसों के नाम

तालिबान के पास जो डेटा है उसमें 100 से अधिक ब्रिटिश जासूसों और 25,000 अफगानों के नाम हैं जिन्होंने ब्रिटिश सेना के साथ काम किया था. अब इसी डेटा से ईरान जासूसों की तलाश में जुटेगा. इसके लिए एक समिति भी बना दी गई है. ईरान को लिस्ट तो मिल जाएगी लेकिन दिक्कत की बात है कि सभी जानकारी कोड में है. यानी ईरान को जासूसों को पकड़ने के लिए उनके कोड नाम से तलाशना होगा. तालिबान की लिस्ट में मोसाद की जानकारी नहीं है, मोसाद के जासूस ब्रिटिश एजेंसी के संपर्क में जरूर हो सकते हैं
ब्रिटिश जासूस के जरिए मोसाद एजेंट्स को पकड़ने की तैयारी है.

मोसाद नहीं अमेरिकी जासूस भी

ईरान में सिर्फ मोसाद नहीं बल्कि अमेरिका और ब्रिटिश जासूस भी तैनात हैं. अमेरिका बरसों से ईरान के न्यूक्लियर कार्यक्रम पर नजर रख रहा है इसके लिए मोसाद के साथ ब्रिटिश खुफिया एजेंसी MI-6 की मदद ली जा रही है.ईरान की एजेंसियों को लग रहा है कि एक सुराग जासूसों के पूरे नेटवर्क का पता लगा सकता है. ईरान ऐसा इसलिए करना चाहता है क्योंकि इजरायल फिर ईरान पर हमले की तैयारी में है, अमेरिका भी ईरान पर हमले के पक्ष में दिख रहा है. ईरान को न्यूक्लियर मिशन को पूरा करना है.

ईरान में फिर शुरू ऑपरेशन मोसाद! मुस्लिम देश ने तालिबान से मांगी मदद

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इजराइल ईरान से युद्ध की तैयारी कर रहा है और ईरान की सेना भी जवाब देने की तैयारियों में जुटी है लेकिन जंग शुरु होने से पहले ही ईरान में लगातार धमाके हो रहे हैं. ईरान जानता है कि इसकी वजह इजराइली खुफिया एजेंसी मोसाद का मजबूत नेटवर्क है. ईरान लाख कोशिशों के बावजूद मोसाद के नेटवर्क को खत्म करने में नाकाम रहा है. अब ईरान ने तालिबान से मदद ली है. तालिबान के पास एक ऐसी लिस्ट है जिसमें अफगानिस्तान में काम करने वाले ब्रिटिश जासूसों की जानकारी है.

उधर मोसाद के जासूसों को पकड़ने के लिए के लिए ईरान पूरी ताकत लगा दी है. घर घर की तलाशी ली जा रही है, लेकिन ईरान अब भी धमाकों से दहल रहा है. ये मोसाद के सबसे नए हमले की तस्वीर है.धमाका IRGC के मिसाइल बेस में हुआ, तरीका वही जो मोसाद का है. ईरान के आसमान में अचानक कुछ ड्रोन दिखाई दिए और फिर ये जोरदार धमाका हो गया.

शिराज इलाके में मची तबाही

ड्रोन मिसाइल बेस से टकराया, एयर डिफेंस सिस्टम एक बार फिर नाकाम हुआ और उसके बाद ईरान के शिराज इलाके में तबाही हुई. जहां धमाका हुआ वहां ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों का ठिकाना बनाया था. बैलिस्टिक मिसाइल के लॉन्च साइट की सुरक्षा के लिए एयर डिफेंस की तैनाती भी थी,लेकिन मोसाद ने कम ऊंचाई पर ड्रोन भेजा जिसे एयर डिफेंस ड्रोन को इंटरसेप्ट नहीं कर सका. ड्रोन से मिसाइल बेस में धमाके के बाद आग लग गई.

ईरान में मोसाद लगातार एक्टिव

ईरान में मोसाद लगातार अपनी मौजूदगी का सबूत दे रहा है.लगातार हमले हो रहे हैं और ईरान को डर है कि मोसाद का ऑपरेशन ईरान की ताकत के लिए बेहद घातक साबित हो सकता है.अब मोसाद और दूसरे जासूसों को पकड़ने के लिए ईरान ने नया तरीका निकाला है. ईरान ने तालिबान से मदद की मांग की है, ब्रिटिश एजेंसी की लीक लिस्ट की मांग की है,लिस्ट में MI-6 और स्पेशल सर्विस स्टाफ की जानकारी है.ये लिस्ट ब्रिटेन की गलती से लीक हो गई थी.ईरान ने तालिबान से लिस्ट की मांग की थी, जिसके जरिए ईरान में मौजूद जासूसों की पहचान की जा सके और पश्चिमी देशों पर दबाव भी बनाया जा सके.

100 से अधिक ब्रिटिश जासूसों के नाम

तालिबान के पास जो डेटा है उसमें 100 से अधिक ब्रिटिश जासूसों और 25,000 अफगानों के नाम हैं जिन्होंने ब्रिटिश सेना के साथ काम किया था. अब इसी डेटा से ईरान जासूसों की तलाश में जुटेगा. इसके लिए एक समिति भी बना दी गई है. ईरान को लिस्ट तो मिल जाएगी लेकिन दिक्कत की बात है कि सभी जानकारी कोड में है. यानी ईरान को जासूसों को पकड़ने के लिए उनके कोड नाम से तलाशना होगा. तालिबान की लिस्ट में मोसाद की जानकारी नहीं है, मोसाद के जासूस ब्रिटिश एजेंसी के संपर्क में जरूर हो सकते हैं
ब्रिटिश जासूस के जरिए मोसाद एजेंट्स को पकड़ने की तैयारी है.

मोसाद नहीं अमेरिकी जासूस भी

ईरान में सिर्फ मोसाद नहीं बल्कि अमेरिका और ब्रिटिश जासूस भी तैनात हैं. अमेरिका बरसों से ईरान के न्यूक्लियर कार्यक्रम पर नजर रख रहा है इसके लिए मोसाद के साथ ब्रिटिश खुफिया एजेंसी MI-6 की मदद ली जा रही है.ईरान की एजेंसियों को लग रहा है कि एक सुराग जासूसों के पूरे नेटवर्क का पता लगा सकता है. ईरान ऐसा इसलिए करना चाहता है क्योंकि इजरायल फिर ईरान पर हमले की तैयारी में है, अमेरिका भी ईरान पर हमले के पक्ष में दिख रहा है. ईरान को न्यूक्लियर मिशन को पूरा करना है.

ईरान में फिर शुरू ऑपरेशन मोसाद! मुस्लिम देश ने तालिबान से मांगी मदद

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