World News: सैटेलाइट तस्वीरों में दिखी मिडिल ईस्ट में अमेरिका की तैयारी, क्या ईरान पर हमला कर पाएगा? – INA NEWS

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच सैटेलाइट तस्वीरों से पश्चिम एशिया में अमेरिकी सेना की गतिविधियां तेज होती दिख रही हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 28 जनवरी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर के नेतृत्व में एक कैरियर स्ट्राइक ग्रुप ईरान की ओर बढ़ रहा है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने समझौता नहीं किया तो अमेरिका कहीं बड़ा हमला करेगा और ये हमला जून 2025 में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हुए हमलों से ज्यादा खतरनाक होगा.
हाल ही में आई सैटेलाइट तस्वीरों के मुताबिक, हाल के हफ्तों में ईरान के आसपास मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हलचल काफी बढ़ी है. रिपोर्ट के अनुसार, कतर के अल-उदीद एयर बेस पर अब पहले से कहीं ज्यादा KC-135 एयर रिफ्यूलिंग विमान तैनात हैं. इसके अलावा वहां पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम लगाए जाने के संकेत भी मिले हैं.
16 जनवरी की यह तस्वीर कतर के अल उदीद एयरपोर्ट की है. यहां 5 KC-135 रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट दिखाए दिए. फोटो क्रेडिट: MizarVision.
कुवैत में भी बढ़ी तैनाती दिखी
कुवैत के अली अल सालेम एयर बेस पर भी एयर और मिसाइल डिफेंस सिस्टम की तैनाती बढ़ी है. वहीं जॉर्डन के मुवाफ्फक सल्ती एयर बेस पर बड़ी संख्या में F-15E लड़ाकू विमान देखे गए हैं. हालांकि 15 जनवरी तक हालात इतने गंभीर नहीं थे. उस समय कतर, सऊदी अरब और बहरीन के अमेरिकी ठिकानों पर बहुत ही कम विमान और वॉरशिप मौजूद थे. उस समय USS अब्राहम लिंकन कैरियर भी दक्षिण चीन सागर में था.
Photo credit: Mehmet Yaren Bozgun/Anadolu via Getty Images.
क्या ईरान पर हमला करेगा अमेरिका?
इसके बावजूद एक्सपर्ट्स का मानना है कि मौजूदा सैन्य जमावड़ा ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले के लिए अभी भी काफी नहीं है. द वॉर जोन की रिपोर्ट के अनुसार, अगर अमेरिका बड़े सैन्य अभियान की तैयारी कर रहा होता तो बड़ी संख्या में लड़ाकू विमान और रणनीतिक बॉम्बर्स क्षेत्र में पहुंच चुके होते. मिलिट्री एक्सपर्ट झांग जुंशे का कहना है कि B-2 और B-52 जैसे बॉम्बर्स की तैनाती किसी भी बड़े हमले का अहम संकेत होगी, क्योंकि ईरान के कई सैन्य और मिसाइल ठिकाने जमीन के नीचे सुरक्षित हैं.
क्या ट्रंप का वेनेजुएला मॉडल काम करेगा?
ट्रंप ने ईरान पर हमले की धमकी देते समय वेनेजुएला मॉडल का जिक्र किया. हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरान में इसे दोहराना बेहद मुश्किल है. वेनेजुएला में कार्रवाई राष्ट्रपति मादुरो की गिरफ्तारी को ध्यान में रखकर की गई थी दूसरी तरफ ईरान की सत्ता किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है. बिना जमीनी सेना उतारे केवल हवाई हमलों से ईरान की सरकार को गिराना आसान नहीं होगा.
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका का लक्ष्य फिलहाल ईरान की सैन्य और शासन क्षमता को कमजोर करना हो सकता है, न कि लंबा युद्ध छेड़ना. खुद अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति भी पश्चिम एशिया में सैन्य दखल कम करने की बात करती है. ऐसे में इस बात की संभावना कम ही मानी जा रही है कि अमेरिकी, ईरान के खिलाफ जंग शुरू करेगा.
सैटेलाइट तस्वीरों में दिखी मिडिल ईस्ट में अमेरिका की तैयारी, क्या ईरान पर हमला कर पाएगा?
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