World News: एटॉमिक पावर, 57 मुस्लिम देशों का गठजोड़ फिर भी OIC से क्यों नहीं डरता इजराइल? – INA NEWS

World News: एटॉमिक पावर, 57 मुस्लिम देशों का गठजोड़ फिर भी OIC से क्यों नहीं डरता इजराइल? – INA NEWS

जेद्दा में इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) की अहम बैठक बुलाई गई थी, जिसमें 57 मुस्लिम देशों ने हिस्सा लिया. गाजा युद्ध को लेकर सभी सदस्य देशों ने इजराइल के खिलाफ कड़ी बयानबाजी की और गाजा पर कब्जे की इजराइल की योजना को खारिज कर दिया.

संगठन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील भी की कि इजराइल पर दबाव बढ़ाया जाए ताकि फिलिस्तीनियों पर हमले रुकें. लेकिन बैठक के बाद सवाल यह उठने लगे हैं कि इतने बड़े मुस्लिम देशों के संगठन की चेतावनियों से इजराइल आखिर क्यों नहीं डरता?

मजबूत सैन्य ताकत और अमेरिकी सहयोग

असल वजह यह है कि OIC के पास कोई संयुक्त सैन्य या आर्थिक ताकत नहीं है जो इजराइल के लिए सीधा खतरा बन सके. बयानबाजी के अलावा सदस्य देश किसी ठोस कार्रवाई पर सहमत नहीं हो पाते. दूसरी ओर, इजराइल के पास खुद की उन्नत सैन्य तकनीक और मजबूत हथियार व्यवस्था है. OIC के कई सदस्य देशों के पास अटॉमिक पावर भी है मगर जिस तरह इजराइल को अमेरिका और पश्चिमी देशों से राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य मदद लगातार मिलती रहती है वैसा इन देशों के साथ नहीं है. यही इजराइल का सबसे बड़ा आत्मविश्वास है.

OIC सदस्य देशों की दोहरी नीति

OIC के कई सदस्य देश मंच से तो इजराइल की निंदा करते हैं, लेकिन व्यवहार में रिश्ते बनाए रखते हैं.

तुर्की:इजराइल पर हमला बोलने में सबसे आगे रहता है, लेकिन तेल अवीव में इसका दूतावास अभी भी काम कर रहा है. 2024 में तुर्की ने ट्रेड डील रोकने की घोषणा की थी, मगर रिपोर्ट्स के मुताबिक तुर्की से इजराइल तक गुपचुप जहाज़ जाते रहे हैं. ट्रांसपोर्ट डेटा में एर्दोगान के बेटे से जुड़ी कंपनियों के जहाज़ भी इजराइल के पास देखे गए.

अजरबैजान: तुर्की के विदेश मंत्री ने खुद आरोप लगाया था कि अजरबैजान मिस्र के नाम पर गैस और तेल इजराइल भेज रहा है. अजरबैजान ने मिस्र के नाम पर गैस और तेल इजराइल को भेजे.

पाकिस्तान: औपचारिक तौर पर इजराइल को मान्यता नहीं देता, लेकिन उसके खिलाफ कोई सक्रिय कदम भी नहीं उठाता. ईरान की अपील के बावजूद हथियार नहीं भेजे और केवल बड़े मंचों पर बयान तक सीमित रहा.

सऊदी अरब: भाषणों से आगे कोई ठोस कदम नहीं उठाता.

कतर और कुवैत: दोनों देश मध्यस्थता की भूमिका में रहते हैं. इजराइल के साथ इनके रिश्ते अपेक्षाकृत बेहतर हैं, खासकर कतर का प्रधानमंत्री नेतन्याहू से करीबी रिश्ता माना जाता है.

अब्राहम समझौते वाले देश

इसके अलावा, यूएई, बहरीन, मोरक्को और सूडान जैसे मुस्लिम देश अब्राहम समझौते के तहत इजराइल से रिश्ते सामान्य कर चुके हैं. ये देश अब सार्वजनिक रूप से इजराइल के खिलाफ किसी बड़े कदम की संभावना ही खत्म कर चुके हैं.

यानी OIC की बैठकों में चाहे जितनी कड़ी बयानबाजी हो, असल में सदस्य देशों की राजनीतिक और आर्थिक प्राथमिकताएं उन्हें इजराइल से टकराव की ओर नहीं ले जातीं. यही कारण है कि इजराइल OIC की चेतावनियों से न तो डरता है और न ही अपनी नीतियों में कोई खास बदलाव करता है.

एटॉमिक पावर, 57 मुस्लिम देशों का गठजोड़ फिर भी OIC से क्यों नहीं डरता इजराइल?

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