World News: चीन के चारों तरफ होगी ब्रह्मोस की तैनाती, मिसाइल खरीदने के लिए भारत से डील कर रहा है ये देश – INA NEWS


भारत की जिस ब्रह्मोस ने पाकिस्तान को ऑपरेशन सिंदूर में घुटनों पर ला दिया. अब उसकी ग्लोबल लेवल पर डिमांड बढ़ती जा रही है. भारत की मेड इन इंडिया सुपरसोनिक क्रूज ब्रह्मोस मिसाइल को अब दुनिया के की देश हासिल करना चाहते हैं. मुस्लिम देश इंडोनेशिया भी ब्रह्मोस को हासिल करना चाहता है. मिसाइल खरीदने के लिए इंडोनेशिया अब भारत से डील कर रहा है. इंडोनेशिया के यह मिसाइल खरीदने के बाद चीन चारों तरफ से ब्रह्मोस से घिर जाएगा. चलिए समझते हैं कैसे…
भारत और इंडोनेशिया के बीच ब्रह्मोस मिसाइल की एक बड़ी डील होने जा रही है. दोनों देशों लगभग 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर की ब्रह्मोस मिसाइलों की डील को अंतिम रूप देने के करीब हैं. यह बातचीत पिछले गुरुवार को तीसरी भारतइंडोनेशिया रक्षा मंत्रियों की बैठक में हुई, जिसकी अध्यक्षता भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री स्याफ्री स्यामसुद्दीन ने की.
डील को लेकर पूरी हो चुकी बातचीत
इस डील के बाद इंडोनेशिया, फिलीपींस के बाद, ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम खरीदने वाला दूसरा दक्षिण-पूर्व एशियाई देश बन जाएगा. इस डील को लेकर नई दिल्ली और जकार्ता के बीच सभी बातचीत पूरी हो चुकी है. अब सिर्फ मॉस्को की औपचारिक मंजूरी बाकी है, क्योंकि रूस का ब्रह्मोस जॉइंट वेंचर में 49.5 प्रतिशत हिस्सा है.
चीन के चारों तरफ होगी ब्रह्मोस की तैनाती
भारत से फिलिपींस ने साल 2022 में ब्रह्मोस मिसाइल खरीदी है. अब इंडोनेशिया 450 मिलियन डॉलर की डील कर रहा है. वियतनाम भी भारत से 700 मिलियन डॉलर की ब्रह्मोस खरीदना चाहता है. यह डील भी इस साल के आखिर में हो सकती है. ऐसा होता है तो चीन के ऊपर रूस, नीचे वियतनाम, इंडोनेशिया और फिलिपींस के पास यह मिसाइल होगी. भारत के पास पहले से यह मिसाइल तैनात है.
यह डील क्यों है अहम?
भारतीय रक्षा थिंक-टैंक यूनाइटेड सर्विस इंस्टिट्यूशन ऑफ इंडिया के रिसर्चर गौरव कुमार ने भारत और इंडोनेशिया के बीच हो रही डील को लेकर कहा, यह सिर्फ कोई सामान्य हथियारों का सौदा नहीं है. यह भारत का उस क्षेत्र (दक्षिण-पूर्व एशिया) में रणनीतिक प्रवेश है, जहां लंबे समय से कड़ी सैन्य शक्ति अमेरिका तय करता रहा है और चीन की दबाव वाली नीति सीमाएं बनाती रही है.
इंडोनेशिया के साथ यह ब्रह्मोस समझौता फिलीपींस की 2022 में की गई 375 मिलियन डॉलर की खरीद के बाद हो रहा है, जिसकी डिलिवरी पिछले साल शुरू हुई. माना जा रहा है कि वियतनाम भी लगभग 700 मिलियन डॉलर के संभावित सौदों पर बातचीत कर रहा है. कुमार के अनुसार, इन कदमों से संकेत मिलता है कि भारत दक्षिण-पूर्व एशिया में एक नए रक्षा साझेदार के रूप में उभर रहा है.
ब्रह्मोस मिसाइल की खासियत
ब्रह्मोस मिसाइल ने ऑपरेशन सिंदूर में शानदार प्रदर्शन किया. पूरी दुनिया ने इसकी ताकत देखी. इस मिसाइल को भारत और रूस ने मिलकर तैयार किया है. यह सबसे तेज और अत्याधुनिक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है.
इस मिसाइल की रफ्तार 2.8 मैक यानी 3,450 किमी प्रति घंटा है. साथ ही इसकी रेंज 290 किलोमीटर है. यह जमीन ,समुद्र और आसमान से सटीक प्रहार करने की ताकत रखती है. सात ही इसे ट्रैक करना बहुत मुश्किल है. जब तक दुश्मन को इस मिसाइल के अटैक के बारे में समझ आता है तब तक यह तबाही मचा देती है. इसके एडवांस वर्जन की रेंज 500-800 किलोमीटर है. ये मिसाइल 200-300 किलोग्राम हाई एक्सप्लोसिव ले जाने में सक्षम है.
चीन के चारों तरफ होगी ब्रह्मोस की तैनाती, मिसाइल खरीदने के लिए भारत से डील कर रहा है ये देश
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