World News: ताइवान के सीक्रेट डिफेंस प्लान पर चीन की नजर, ऐसे बना रहा जासूसी नेटवर्क को निशाना – INA NEWS


चीन, ताइवान के सीक्रेट डिफेंस प्लान पर नजर गड़ाए हुए है. इसी रणनीति के तहत बीजिंग न सिर्फ सैन्य दबाव बढ़ा रहा है, बल्कि अंदरूनी तौर पर जासूसी के जरिए ताइवान की सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश भी कर रहा है. बीते कई सालों में सामने आए कई मामलों से खुलासा हुआ है कि ताइवानी सेना, सरकारी तंत्र और राजनीति तक में चीन की घुसपैठ गहरी होती जा रही है.
साल 2022 में ताइवान की नौसेना में मरीन सार्जेंट रहे चेन यिमिन कर्ज में डूबे हुए थे और पैसों की सख्त जरूरत में थे. इसी दौरान उन्हें इंटरनेट पर एक लोन का विज्ञापन दिखा. बाद में पता चला कि यह विज्ञापन चीन सरकार की ओर से काम करने वाले एक एजेंट का था. एजेंट ने चेन को लालच दिया कि अगर वह ताइवान से जुड़े गुप्त सैन्य दस्तावेज सौंप देंगे, तो बदले में उन्हें नकद पैसे मिलेंगे. मजबूरी में चेन इस सौदे के लिए राजी हो गए.
सैन्य ठिकानों से फाइलें चुराई
इसके बाद करीब एक साल तक चेन ने ताइवान के दो सैन्य ठिकानों के कंप्यूटर सिस्टम से टॉप सीक्रेट फाइलें डाउनलोड और प्रिंट कीं. उन्होंने इन दस्तावेजों की तस्वीरें लीं और ऑनलाइन मैसेजिंग ऐप्स के जरिए अपने बिजनेस मैनेजर को भेज दिया. इस काम के बदले उन्हें 1 लाख 70 हजार न्यू ताइवान डॉलर मिले. साल 2023 की शुरुआत में चेन को गिरफ्तार कर लिया गया और बाद में ताइवान के राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत उन्हें 2 साल 2 महीने की जेल की सजा सुनाई गई.
100 से ज्यादा मामले सामने आए
चेन यिमिन का मामला कोई अकेला उदाहरण नहीं है. हाल के वर्षों में ताइवान के 100 से ज्यादा पूर्व सैनिकों, मौजूदा सैन्य अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों पर चीन के लिए जासूसी करने के आरोप लगे हैं. ताइवान सरकार ने माना है कि इनमें से कुछ लोगों को गोपनीय रक्षा योजनाओं तक पहुंच मिली थी, जो अब चीन के हाथ लग सकती हैं. कई आरोपी जेल में हैं, लेकिन अधिकारियों को शक है कि कुछ जासूस अभी भी गुप्त रूप से काम कर रहे हैं.
ताइवान के चारों ओर चीन लगातार बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास कर रहा है. ऐसे में खतरा सिर्फ बाहर से नहीं, बल्कि अंदरूनी सुरक्षा को लेकर भी गंभीर है. ताइवान के न्याय मंत्रालय के जांच ब्यूरो (MJIB) के उप निदेशक डेविड ह्सू के मुताबिक, चीन जासूसी के लिए तीन मुख्य रास्तों का इस्तेमाल करता है. चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP), पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) और सरकारी खुफिया एजेंसियां, जिनमें स्टेट सिक्योरिटी मंत्रालय शामिल है.
कैसे काम करता है चीन का नेटवर्क
चीन आमतौर पर पहले आमने-सामने मिलकर भरोसा जीतने की कोशिश करता है. चूंकि चीनी नागरिकों के ताइवान आने पर सख्त पाबंदी है, इसलिए एजेंट अक्सर ताइवानी नागरिकों के चीन जाने का इंतजार करते हैं, चाहे वे व्यापार के लिए हों या परिवार से मिलने. इसके अलावा डेटिंग ऐप्स, फेसबुक और लिंक्डइन जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए भी लोगों को फंसाया जाता है.
2023 में ऐसा ही एक मामला सामने आया, जब एक रिटायर्ड ताइवानी सैनिक ने चीन के लिए काम करते हुए 9 अन्य मौजूदा और पूर्व सैनिकों को भर्ती किया. इन लोगों ने सैन्य ठिकानों और ट्रेनिंग से जुड़ी अहम जानकारी चीन को दी. कुछ मामलों में तो राष्ट्रपति लाई चिंग-ते और विदेश मंत्री रह चुके जोसेफ वू के यात्रा कार्यक्रम तक लीक किए गए.
चीन समर्थक नेताओं को भी फंडिंग
चीन राजनीतिक स्तर पर भी घुसपैठ की कोशिश करता है. वह उन लोगों को निशाना बनाता है जो चीन के पक्ष में सोच रखते हैं. चीन कई बार ऐसे लोगों के इलेक्शन कैंपेन को भी फंड करता है. 2025 में विपक्षी पार्टी कुओमिनतांग (KMT) से जुड़े कई लोगों पर जासूसी के आरोप लगे.
ताइवान में जासूसी पर सख्त सजा
इन खतरों को देखते हुए मार्च 2025 में राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने 17 बिंदुओं वाला नया राष्ट्रीय सुरक्षा पैकेज पेश किया. इसमें सैन्य अदालतें दोबारा शुरू करना, सख्त सजा का प्रावधान और कानूनों में बदलाव शामिल हैं. 2024 में जहां 64 जासूसी मामले सामने आए थे, वहीं 2025 में यह संख्या घटकर 15 से 20 रहने का अनुमान है.
ताइवान के सीक्रेट डिफेंस प्लान पर चीन की नजर, ऐसे बना रहा जासूसी नेटवर्क को निशाना
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