World News: युद्ध का काउंटडाउन! पहली फांसी देकर ईरान ने अमेरिका को दी खुली चुनौती, ट्रंप का दावा खारिज – INA NEWS


ईरान में शुक्रवार को सत्ता विरोधी प्रदर्शनों का सबसे बड़ा केंद्र रहे मशहद से गिरफ्तार एक शख्स अली रहबर को फांसी दे दी गई. अली को ईरान में सत्ता विरोधी प्रदर्शनों के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. वह पेशे से एक स्पोर्ट्स कोच और फिटनेस ट्रेनर थे. जिनकी उम्र महज 33 साल थी. बता दें कि ईरान में सत्ता विरोधी प्रदर्शनों के आरोप में लगभग 30 हजार लोगों को अरेस्ट किया गया, जिसमें पहली फांसी अली रहबर को दी गई है.
डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के बावजूद प्रदर्शनकारी को फांसी ने अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की आग को और भड़का दिया है. ये फांसी ऐसे समय दी गई है जब अमेरिका जंगी जहाज ईरान की तरफ बढ़ रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ने खुद बताया था कि अमेरिका का बहुत बड़ा नौसैनिक बेड़ा ईरान की तरह तेजी से आगे बढ़ रहा है.
800 लोगों की फांसी रोकने का दावा
इससे पहले ट्रंप ने अपने दखल से ईरान में 800 लोगों की फांसी रोकने का दावा किया था. लेकिन ईरान की तरफ से इसे भी झूठा करार दे दिया गया है. ईरान के शीर्ष अभियोजक ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे को पूरी तरह गलत बताकर खारिज कर दिया कि देश भर में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिए गए 800 लोगों की फांसी उनके दखल देने की वजह से रुकी है.
पांच हजार से ज्यादा लोगों की मौत
इस बीच, अधिकार कार्यकर्ताओं ने कहा कि देशभर में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई हिंसक कार्रवाई में मरने वालों की संख्या बढ़कर कम से कम 5,002 हो गई है. ट्रंप ने बार-बार कहा है कि ईरान ने विरोध-प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए 800 लोगों की फांसी रोक दी है. हालांकि, उन्होंने इस दावे के स्रोत के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है.
ईरान की समाचार एजेंसी ‘मिजान’ की ओर से शुक्रवार को देश के शीर्ष अभियोजक मोहम्मद मोवाहेदी के हवाले से प्रसारित खबर में इस बात का पुरजोर खंडन किया गया है. मिजान के मुताबिक, मोवाहेदी ने कहा, यह दावा पूरी तरह से गलत है. ऐसी कोई संख्या उपलब्ध नहीं है और न ही न्यायपालिका ने ऐसा कोई फैसला लिया है.
‘हम विदेशी शक्तियों से निर्देश नहीं लेते’
उन्होंने कहा कि हमारे यहां शक्तियों का पृथक्करण है, प्रत्येक संस्था की जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से परिभाषित हैं और हम किसी भी परिस्थिति में विदेशी शक्तियों से निर्देश नहीं लेते हैं. इस बीच, अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी ने मृतकों की नवीनतम संख्या जारी करते हुए बताया कि मरने वालों में 4,716 प्रदर्शनकारी, सरकार के 203 सहयोगी, 43 बच्चे और 40 ऐसे नागरिक शामिल हैं, जो विरोध-प्रदर्शन का हिस्सा नहीं थे. एजेंसी ने यह भी बताया कि 26,800 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है.
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा तनाव
उधर, यूएसएस अब्राहम लिंकन सहित अमेरिकी विमानवाहक पोतों के एक बेड़े के पश्चिम एशिया की ओर बढ़ने के चलते अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है. विश्लेषकों का कहना है कि सैन्य मौजूदगी से ट्रंप को हमले करने का विकल्प मिल सकता है. हालांकि, तेहरान को बार-बार चेतावनी देने के बावजूद उन्होंने अभी तक ऐसा करने से परहेज किया है.
न्यूयॉर्क स्थित थिंकटैंक सूफान सेंटर ने एक विश्लेषण में कहा कि हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप अब क्षेत्रीय नेताओं के दबाव के चलते और यह जानते हुए कि अकेले हवाई हमले शासन को हटाने के लिए अपर्याप्त होंगे, पीछे हटते हुए प्रतीत होते हैं, लेकिन सैन्य बलों का क्षेत्र में भेजा जाना संकेत देता है कि सैन्य कार्रवाई अब भी हो सकती है.
फास्ट-ट्रैक जस्टिस का ऐलान
वहीं ईरान की न्यायपालिका पहले ही फास्ट-ट्रैक जस्टिस का एलान कर चुकी है और रहबर को फांसी की सजा में यही मॉडल लागू किया गया. ईरान ने इसके जरिए प्रदर्शनकारियों को कड़ा संदेश दिया है कि सरकार के विरोध की सजा मौत है, जो सड़कों पर खामेनेई के खिलाफ उतरेगा. उसका यही अंजाम यही होगा. इसे फांसी को ईरान में डर का शासन स्थापित करने की कोशिश माना जा रहा है.
अंतरराष्ट्रीय दबाव की परवाह नहीं करते खामेनेई
ईरान ने फांसी देकर ये संदेश भी दिया है कि खामेनेई अंतरराष्ट्रीय दबाव की परवाह नहीं करते हैं और विरोध करने वाला कोई भी व्यक्ति खुद को सुरक्षित ना समझे. ईरान में विरोध का झंडा उठाने वाले छात्रों मजदूरों और फिटनेस ट्रेनर को भी मौत की सजा दी जाएगी. इस फांसी को नई और खतरनाक लाइन इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि ईरान पहले भी फांसी देता रहा है, लेकिन आमतौर पर ये सालों की प्रक्रिया होती थी. या फिर सीधे आतंकी मामलों से जुड़ी रहती थी, लेकिन इस बार सिर्फ 10 दिन में फांसी दे दी गई.
युद्ध का काउंटडाउन! पहली फांसी देकर ईरान ने अमेरिका को दी खुली चुनौती, ट्रंप का दावा खारिज
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