World News: नहीं मिला H-1B वीजा तो बेंगलुरु के इस लड़के ने अमेरिका जाने के लिए अपनाया ये रास्ता – INA NEWS


व्हाइट हाउस प्रशासन की ओर से H-1B वीजा की फीस बढ़ाने के बाद से अमेरिका में काम करने का सपना देखने वाले हजारों लोगों को झटका लगा है. लेकिन ऐसा नहीं है कि H-1B वीजा सभी को मिल जाता था, कई लोगों का H-1B वीजा आवेदन रिजेक्ट भी किया जाता रहा है. बेंगलुरु के एक टैक एक्सपर्ट के साथ भी ऐसा ही हुआ और तीन साल तक उनका H-1B वीजा रिजेक्ट होता रहा, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत से अमेरिका आने का रास्ता निकाल लिया.
कैलिफ़ोर्निया में IBM में काम कर ने वाले 26 साला तनुश शरणार्थी ने बताया कि कैसे H-1B वीजा के लिए तीन बार रिजेक्ट होने के बाद, उन्होंने अपनी असाधारण क्षमता से O-1 वीजा हासिल किया. तनुश शरणार्थी ने बताया कि उन्हें यह O-1 उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में अपने काम और रिसर्च की बदौलत मिला है.
कैसे मिला O-1 वीजा?
अपनी लिंक्डइन पोस्ट में तनुश ने लिखा, “तीन साल तक H-1B लॉटरी में असफल रहने से लेकर… आखिरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में O-1 ‘आइंस्टीन’ वीजा के लिए मंजूरी मिलने तक, लगातार तीन साल मैंने H-1B के लिए किस्मत का खेल खेला. तीन बार नाकामयाब होने के बाद मुझे लगा कि मैं वेगास का सबसे बदकिस्मत इंसान हूं.”
उन्होंने आगे कहा, “लेकिन किस्मत के भरोसे बैठने की बजाय, मैंने पूरी तरह से उन चीजों पर ध्यान दिया जो मेरे बस में थीं. देर रात तक काम करना, प्रोडक्ट बनाना, रिसर्च पेपर पब्लिश करना और उस क्षेत्र में योगदान देना जो मुझे पसंद है. ऐसा करना लॉटरी से ज़्यादा फायदेमंद होता है. इस हफ्ते मुझे O-1 वीजा के लिए मंजूरी मिल गई, जो अपने क्षेत्र में टॉप पर रहने वाले लोगों के लिए रिजर्व है.
तनुश की कहानी बताती है कि कैसे आप अपनी मेहनत से अपनी किस्मत बदल सकते हो. तनुश इस बात स्वीकार किया कि जो उनके बस में था उन्होंने उसमें अपनी पूरी जान लगा दी और उसका फल उन्हेंO-1 वीजा के रूप में मिला.
H-1B वीजा और 0-1 वीजा में क्या फर्क है?
O-1 वीजा उन लोगों को दिया जाता, जिनके पास किसी खास क्षेत्र (जैसे कला, विज्ञान, शिक्षा, व्यवसाय, या खेल) में असाधारण योग्यता (extraordinary ability) होती है. इसके लिए आपको को अपने काम को राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलानी होती है, जैसे अवार्ड, प्रकाशन, या विशेषज्ञों के पत्र.
वहीं H-1B वीजा विशेष व्यवसायों के लिए है, जिनमें उच्च शिक्षा (कम से कम बैचलर डिग्री) की आवश्यकता होती है. यह आमतौर पर तकनीकी, इंजीनियरिंग, मेडिकल, या अन्य पेशेवर नौकरियों के लिए काम आता है.
नहीं मिला H-1B वीजा तो बेंगलुरु के इस लड़के ने अमेरिका जाने के लिए अपनाया ये रास्ता
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