World News: Explainer: अंतरिक्ष में डेटा सेंटर क्यों बना रहे हैं एलन मस्क? टक्कर देने के लिए चीन भी तैयार – INA NEWS

World News: Explainer: अंतरिक्ष में डेटा सेंटर क्यों बना रहे हैं एलन मस्क? टक्कर देने के लिए चीन भी तैयार – INA NEWS

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की दुनिया में अब मुकाबला सिर्फ धरती तक सीमित नहीं रहा. टेस्ला के मालिक एलन मस्क अब इस रेस को सीधे अंतरिक्ष में ले जाना चाहते हैं. उनका प्लान है स्पेस में डेटा सेंटर बनाना. स्पेस-बेस्ड डेटा सेंटर का मतलब है सैकड़ों सोलर-पावर्ड सैटेलाइट्स, जो पृथ्वी की कक्षा में रहकर AI का सारा भारी-भरकम डेटा प्रोसेस करें.

मस्क के इस आइडिया को अब चीन भी सीधी चुनौती देने की तैयारी में है. मगर सवाल है कि आखिर अंतरिक्ष में ही एलन मस्क डेटा सेंटर क्यों बनाना चाहते हैं? आइए इसे विस्तार से समझते हैं

अंतरिक्ष में डेटा सेंटर का मतलब क्या है?

मस्क का ऐसा करने की वजह साफ है. दरअसल AI को चलाने के लिए जिस तरह की बिजली, कूलिंग और कंप्यूटिंग पावर चाहिए, वह धरती पर दिन-ब-दिन महंगी और मुश्किल होती जा रही है. धरती पर डेटा सेंटर को ठंडा रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है, जबकि अंतरिक्ष में ठंडा वातावरण अपने आप मिल जाता है. साथ ही, वहां सूरज की रोशनी लगभग लगातार मिलती है, जिससे बिजली की दिक्कत भी कम हो जाती है.

एलन मस्क ऐसा क्यों करना चाहते हैं?

एलन मस्क की कंपनी SpaceX पहले ही हजारों सैटेलाइट्स लॉन्च कर चुकी है, खासकर Starlink के जरिए. मस्क का मानना है कि अगर भविष्य AI का है, तो उसे चलाने की सबसे सस्ती और टिकाऊ जगह अंतरिक्ष होगी. खुद मस्क कह चुके हैं कि अगले 2 से 3 साल में स्पेस में सोलर पावर्ड डेटा सेंटर बनाना धरती से सस्ता पड़ सकता है. SpaceX की संभावित IPO से मिलने वाला पैसा भी इसी दिशा में लगाया जा सकता है.

Ai Space

क्या यह अभी संभव है?

फिलहाल यह आइडिया शुरुआती दौर में है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि स्पेस में डेटा सेंटर बनाना आसान नहीं होगा. इंजीनियर और स्पेस एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इसमें कई बड़ी चुनौतियां हैं जैसे अंतरिक्ष में मौजूद मलबा (space debris), कॉस्मिक रेडिएशन से हार्डवेयर को बचाना, खराबी आने पर मरम्मत करना और सैटेलाइट लॉन्च की ऊंची लागत. हालांकि उम्मीद जताई जा रही है कि 202728 तक छोटे स्तर पर ऐसे सिस्टम का टेस्ट किया जा सकता है. अगर ये सफल रहे, तो 2030 के दशक में सैकड़ों या हजारों सैटेलाइट्स का बड़ा नेटवर्क तैयार हो सकता है.

मस्क अकेले नहीं, मुकाबला कड़ा है

एलन मस्क इस रेस में अकेले खिलाड़ी नहीं हैं. जेफ बेजोस की कंपनी Blue Origin भी स्पेस-बेस्ड डेटा सेंटर पर काम कर रही है. बेजोस पहले ही कह चुके हैं कि भविष्य में अंतरिक्ष में बने मेगा डेटा सेंटर धरती से ज्यादा सस्ते और असरदार हो सकते हैं. Google भी Project Suncatcher के तहत सोलर-पावर्ड सैटेलाइट्स के जरिए AI कंप्यूटिंग पर रिसर्च कर रहा है. वहीं Nvidia समर्थित Starcloud ने तो AI चिप वाला सैटेलाइट लॉन्च कर टेस्टिंग भी शुरू कर दी है.

चीन की एंट्री: स्पेस क्लाउड का प्लान

अब इस कहानी में चीन की एंट्री सबसे अहम मोड़ है. चीन ने साफ कर दिया है कि वह अगले पांच साल में स्पेस-बेस्ड AI डेटा सेंटर बनाने की दिशा में काम करेगा. उसका लक्ष्य है कि गीगावॉट लेवल की सोलर-पावर्ड स्पेस क्लाउड तैयार करना, जहां धरती का डेटा सीधे अंतरिक्ष में प्रोसेस हो सके. चीन पहले ही बड़ी संख्या में रॉकेट लॉन्च कर चुका है और अब वह AI, स्पेस और एनर्जी तीनों को एक साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रहा है. हालांकि उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती रीयूजेबल रॉकेट टेक्नोलॉजी है, जहां फिलहाल SpaceX को बढ़त हासिल है.

Explainer: अंतरिक्ष में डेटा सेंटर क्यों बना रहे हैं एलन मस्क? टक्कर देने के लिए चीन भी तैयार

[ad_2]


देश दुनियां की खबरें पाने के लिए ग्रुप से जुड़ें,

[ad_1]

#INA #INA_NEWS #INANEWSAGENCY
Copyright Disclaimer :-Under Section 107 of the Copyright Act 1976, allowance is made for “fair use” for purposes such as criticism, comment, news reporting, teaching, scholarship, and research. Fair use is a use permitted by copyright statute that might otherwise be infringing., educational or personal use tips the balance in favor of fair use.
Credit By :-This post was first published on https://www.tv9hindi.com/, we have published it via RSS feed courtesy of Source link,

Back to top button