World News: चीन, अमेरिका से फ्रांस तक…दुनिया के 5 सुपरपावर्स ईरान के इस घातक हथियार की नकल क्यों बना रहे? – INA NEWS

World News: चीन, अमेरिका से फ्रांस तक…दुनिया के 5 सुपरपावर्स ईरान के इस घातक हथियार की नकल क्यों बना रहे? – INA NEWS

ईरान ने जून में हुए इजराइली हमले के दौरान 100 से ज्यादा शाहेद ड्रोन लॉन्च किए थे और इजराइल को मुंहतोड़ जवाब दिया था. ईरान में बने इस आधुनिक ड्रोन को रूस ने यूक्रेन के खिलाफ भी इस्तेमाल किया है. इस ड्रोन की खासियत यह है कि यह सस्ता, सटीक और लंबी दूरी तक उड़ने वाला है. अमेरिका, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों की कंपनियां अब ईरान के शाहेद ड्रोन की नकल बना रही हैं. अमेरिकी रक्षा विभाग ने हाल ही में कई तरह के ड्रोन पेश किए, जिनमें शाहेद जैसे मॉडल भी शामिल थे.

पहले के युद्धों में सटीक हमलों के लिए महंगे मिसाइलों का इस्तेमाल होता था, लेकिन यूक्रेन युद्ध में यह साबित हुआ है कि ड्रोन दोनों ही काम कर सकते हैं. यानी सस्ते होने के साथ-साथ सटीक भी. शाहेद ड्रोन की कीमत लगभग 30,000 से 40,000 डॉलर (करीब 27 से 35 लाख रुपये) के बीच है. यह कीमत मिसाइलों के मुकाबले बहुत कम है. शाहेद ड्रोन लगभग 1,000 मील तक उड़ सकता है.

सस्ते लेकिन प्रभावशाली

शाहेद ड्रोन उन्नत तकनीक से लैस होते हैं. ये ड्रोन दुश्मन की निगरानी कर सकते हैं, टोही कर सकते हैं और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने पर दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को बर्बाद कर सकते हैं. सबसे खास बात यह है कि ये सस्ते होने के बावजूद बहुत प्रभावशाली हैं. इसलिए अब अमेरिका समेत कई देश इस ड्रोन की नकल बनाने में जुट गए हैं, ताकि वे कम खर्च में प्रभावशाली हथियार तैयार कर सकें.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा था कि ईरान के ड्रोन बहुत सस्ते और प्रभावी हैं, जबकि अमेरिकी ड्रोन बहुत महंगे हैं. उन्होंने कहा था कि ईरान के ड्रोन की कीमत लगभग 35,000 से 40,000 डॉलर है, जबकि अमेरिका के ड्रोन की कीमत 41 मिलियन डॉलर तक हो सकती है. इसकी उड़ान गति लगभग 150 से 300 किमी प्रति घंटे होती है, जिससे यह लंबे सफर के लिए किफायती बनता है. इसमें छोटे पिस्टन या रोटरी टाइप के इंजन लगे होते हैं, जो एविएशन फ्यूल या डीजल जैसे तरल ईंधन से चलते हैं. ईंधन टैंक ड्रोन के अंदर होते हैं ताकि रेंज बढ़ाई जा सके.

ईरान ने ड्रोन तकनीक में प्रगति की

ईरान ने ड्रोन तकनीक में काफी तेजी से प्रगति की है. इसके कारण अब वह लंबी दूरी तक सटीक हमले कर सकता है. इससे उसकी सैन्य ताकत पश्चिम एशिया में काफी बढ़ गई है. ईरान ने वर्षों की अमेरिकी पाबंदियों और धमकियों के बावजूद अपने हथियार खुद बनाने पर जोर दिया है, ताकि उसकी सेना आत्मनिर्भर बने.

ईरानी अधिकारियों का कहना है कि उनकी सेना केवल देश की रक्षा के लिए है, लेकिन वे सैन्य ताकत बढ़ाने से पीछे नहीं हटेंगे. शाहेद ड्रोन ने आधुनिक युद्ध के नियम बदल दिए हैं, क्योंकि ये कम खर्च में ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाले हथियार हैं जो आज के युद्ध में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं.

चीन, अमेरिका से फ्रांस तक…दुनिया के 5 सुपरपावर्स ईरान के इस घातक हथियार की नकल क्यों बना रहे?

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