World News: कोलकाता से ढाका तक…भारत-बांग्लादेश के बीच मिली भूकंप की नई फॉल्ट लाइन, मचेगी तबाही? – INA NEWS

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बांग्लादेश के ढाका से लेकर भारत के कोलकाता तक हाल के दिनों में भयानक भूकंप के झटके दर्ज किए गए. इसी के बाद अब एक इंटरनेशनल भूकंप रिसर्च टीम ने बांग्लादेश में एक नई एक्टिव अंडरग्राउंड फॉल्ट लाइन का पता लगाया है. यह फॉल्ट लाइन बांग्लादेश के जमालपुर और म्यमेंसिंह से शुरू होकर भारत के कोलकाता तक फैली हुई है. इसकी लंबाई लगभग 400 किलोमीटर है. चूंकि यह एक्टिव फॉल्ट लाइन है, इसका मतलब है कि इस क्षेत्र में भूकंप आने का जोखिम मौजूद है.

साथ ही कहा गया है कि बांग्लादेश में फॉल्ट लाइन का एक हिस्सा एक्टिव (Seismically Active) है, यानी यह भूकंप पैदा कर सकता है. अध्ययनों से पता चला है कि यह फॉल्ट लाइन 6 तीव्रता तक के भूकंप पैदा करने में सक्षम है.

बांग्लादेश में कितनी फॉल्ट लाइन?

भूकंप वैज्ञानिकों का कहना है कि बांग्लादेश में दो मुख्य फॉल्ट लाइन हैं. इनमें से एक है Dawki fault line और दूसरा Indo-Burma megathrust है.इसके अलावा, देश में Sitakunda coastal fault line, Madhupur, Shahjibazar, Jaflong और Comilla जैसी अन्य fault lines भी मौजूद हैं. इसी के बाद अब एक और फॉल्ट लाइन सामने आ गई है.

बांग्लादेश में पिछले दिनों कई झटके महसूस किए गए हैं. 21 और 22 नवंबर को बांग्लादेश में चार भूकंप आए. 21 नवंबर का भूकंप रिक्टर स्केल पर 5.7 तीव्रता का था. इस भूकंप में 10 लोगों की मौत हुई.

किन हिस्सों में ज्यादा खतरा?

हाल ही में खोजी गई फॉल्ट लाइन की पहचान एक स्टडी के दौरान की गई, जिसका नेतृत्व अख्तरुल अहसान, उप निदेशक, बांग्लादेश जियोलॉजिकल सर्वे ने किया. उनके साथ इस अध्ययन में अमेरिका, फ्रांस, तुर्की और बांग्लादेश के कई रिसर्चर्स भी मौजूद थे. इसी स्टडी में यह फॉल्ट लाइन पहचानी गई.

अख्तरुल अहसान ने बताया कि इस फॉल्ट लाइन को तीन हिस्सों में बांटा गया है. इसके एक हिस्से में कम तीव्रता वाले भूकंप का जोखिम है, दूसरे हिस्से में हाई तीव्रता वाले भूकंप का जोखिम है और तीसरे हिस्से में कोई भूकंप का जोखिम नहीं है. हालांकि, अख्तरुल अहसान ने यह स्पष्ट नहीं किया कि कौन सा हिस्सा ज्यादा जोखिम वाला है और कौन सा कम.

5.6 करोड़ साल पहले बनी थी लाइन

नई रिसर्च के अनुसार, हाल ही में पहचानी गई फॉल्ट लाइन 5.6 करोड़ साल पहले बनी थी. उस समय यह फॉल्ट लाइन एक्टिव थी, लेकिन इसके बाद यह 23 मिलियन साल तक एक्टिव नहीं रही. लगभग 5.6 मिलियन साल पहले यह फॉल्ट लाइन मेघालय की पहाड़ियां उठने के कारण फिर से एक्टिव हो गईं.

2010 में भूकंप वैज्ञानिक हुमायुन अख्तर की ओर से की गई एक रिसर्च में बताया गया कि 1548 से 2009 तक म्यांमार, असम, शिलांग और बांग्लादेश में 33 शक्तिशाली भूकंप आए. इनमें सबसे बड़ा भूकंप 12 जून 1897 को आया, जिसकी तीव्रता 8.7 थी. इस भूकंप ने लगभग 3.9 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को तबाह कर दिया था.

कोलकाता से ढाका तक…भारत-बांग्लादेश के बीच मिली भूकंप की नई फॉल्ट लाइन, मचेगी तबाही?

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