World News: दादा रसोइया, मां फैक्ट्री मजदूर… गरीब परिवार में जन्में पुतिन कैसे बने दुनिया के सबसे ताकतवर राष्ट्रपति – INA NEWS

World News: दादा रसोइया, मां फैक्ट्री मजदूर… गरीब परिवार में जन्में पुतिन कैसे बने दुनिया के सबसे ताकतवर राष्ट्रपति – INA NEWS

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दुनिया के उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्हें लेकर हमेशा दो तरह के बातें सामने आती हैं. कुछ लोगों उनके लिए कड़े फैसलों को रूस को महाशक्ति बनाने की ओर बढ़ाया गया कदम मानते हैं तो कुछ लोग इसे हिटलरशाही के तौर पर देखते हैं. लेकिन इन तमाम बहसों के बीच यह तथ्य बेहद कम लोग जानते हैं कि पुतिन का शुरुआती जीवन गरीबी और संघर्ष से भरा हुआ था. उनका जन्म 7 अक्टूबर 1952 को लेनिनग्राड (अब सेंट पीटर्सबर्ग) में हुआ था. उन्होंने बचपन का बड़ा हिस्सा तंगहाल परिस्थितियों में बिताया. पुतिन की मां एक फैक्ट्री में मजदूर थीं, जबकि उनके दादा सोवियत संघ के दो सबसे शक्तिशाली नेताओं, व्लादिमीर लेनिन और जोसेफ स्टालिन के निजी रसोइये के रूप में काम करते थे.

पुतिन का परिवार द्वितीय विश्व युद्ध में पूरी तरह से बिखर गया. उनके पिता, स्प्रिडोनोविच पुतिन, को सोवियत सेना में अनिवार्य रूप से भर्ती किया गया और वे दूसरे विश्व युद्ध में लड़े. इस दौरान परिवार पर कई व्यक्तिगत संकट टूट पड़े. बचपन में ही पुतिन के दोनों भाइयों की मौत हो गई. एक बीमारी से तो दूसरा भाई लेनिनग्राड की घेराबंदी के दौरान भुखमरी और युद्धजनित हालात के कारण दम तोड़ गया. गरीबी और लगातार बढ़ते तनाव के बीच पुतिन ने बहुत कम उम्र में जीवन का कठिन दौर देख लिया था. इन अनुभवों ने उनके व्यक्तित्व में दृढ़ता, अनुशासन और कठोर निर्णय लेने की क्षमता को जन्म दिया, जो बाद में उनके राजनीतिक करियर की पहचान भी बना.

कानून की पढ़ाई और फिर बने KGB खुफिया एजेंट

पुतिन ने लेनिनग्राड स्टेट यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई पूरी की. छात्र जीवन के दौरान ही वे खुफिया एजेंसी केजीबी की ओर आकर्षित हुए. ब्रितानिका की रिपोर्ट के मुताबिक, पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद उन्होंने केजीबी में भर्ती होकर खुफिया सेवाओं की दुनिया में कदम रखा. कुल 15 साल तक उन्होंने सोवियत खुफिया तंत्र में सेवा दी. इस दौरान पुतिन ने छह साल पूर्वी जर्मनी में तैनात रहकर खुफिया जानकारी जुटाने का अहम काम किया.

1990 में वे लेफ्टिनेंट कर्नल के पद से रिटायर हुए और यहीं से उनके राजनीतिक करियर की नींव पड़नी शुरू हुई. सोवियत संघ के टूटने और राजनीतिक उथल-पुथल के दौर में पुतिन को सेंट पीटर्सबर्ग के पहले निर्वाचित मेयर का सलाहकार नियुक्त किया गया. शांत, अनुशासित और निर्णय लेने की क्षमता के कारण वे जल्द ही मेयर के विश्वसनीय सहयोगी बन गए. 1994 में उन्हें शहर का डिप्टी मेयर नियुक्त किया गया, जिसने आगे चलकर राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचने का रास्ता खोल दिया.

मास्को की केंद्रीय राजनीति और येल्तसिन का भरोसा

1996 में पुतिन मॉस्को चले गए, जहां वे धीरे-धीरे सत्ता के केंद्र में पहुंचने लगे. 1998 में तत्कालीन राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन ने पुतिन को रूस की घरेलू खुफिया एजेंसी-FSB (फेडरल सिक्योरिटी सर्विस) का प्रमुख बना दिया. कुछ ही समय बाद वे रूस की शक्तिशाली सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव नियुक्त किए गए, जिससे उनकी राजनीतिक पकड़ और मजबूत हुई. 1999 में जब येल्तसिन अपने उत्तराधिकारी की तलाश कर रहे थे, तब उन्होंने पुतिन को प्रधानमंत्री बनाने का फैसला किया. पुतिन का शांत स्वभाव, बिना विवाद के फैसले लेने की शैली और मजबूत प्रशासनिक क्षमता येल्तसिन को प्रभावित कर चुकी थी. इस नियुक्ति के साथ ही पुतिन के लिए राष्ट्रपति पद का दरवाज़ा खुल गया.

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चेचन विद्रोहियों के खिलाफ चलाया सख्त अभियान

प्रधानमंत्री बनते ही पुतिन ने चेचेन विद्रोहियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई शुरू की. इस अभियान ने उन्हें रूस की जनता के बीच तेजी से लोकप्रिय बना दिया. जनता लंबे समय से अस्थिरता और आतंकवादी घटनाओं से परेशान थी और पुतिन की सख्त नीति उन्हें मजबूत नेता के रूप में स्थापित करने लगी. येल्तसिन के लगातार विवादों और जनआक्रोश के चलते 31 दिसंबर 1999 को उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया और पुतिन को रूस का कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित किया. महज तीन महीनों बाद मार्च 2000 में हुए चुनावों में पुतिन भारी बहुमत के साथ रूस के राष्ट्रपति चुने गए.

Victory Day Military Parade In Moscow

अपने पिता की तस्वीर के साथ व्लादिमीर पुतिन

रूस को दोबारा संगठित करने का प्रयास

सत्ता संभालते ही पुतिन ने रूस को फिर से स्थिर और शक्तिशाली बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए. भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई, बाजार पर नियंत्रण स्थापित करना और सरकार का केंद्रीकरण उनकी प्रारंभिक नीतियों की मुख्य बातें रहीं. उन्होंने सोवियत संघ के टूटने के बाद बिखरे हुए 89 प्रशासनिक क्षेत्रों को मिलाकर सात संघीय प्रांतों में संगठित किया ताकि केंद्र सरकार का नियंत्रण अधिक प्रभावी हो सके. पुतिन ने मीडिया मोगलों और बड़े उद्योगपतियों के उस प्रभाव को भी सीमित किया, जो 1990 के दशक में सरकार को दबाव में रखते थे. इस कदम ने उन्हें आलोचनाओं के बीच भी एक मजबूत और निर्णायक नेता के रूप में स्थापित किया.

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पुतिन पर सोवियत संघ के विघटन की छाया

पुतिन का पूरा बचपन और युवावस्था उन घटनाओं से भरा हुआ था, जिन्होंने सोवियत इतिहास की दिशा बदल दी. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की गरीबी, 1989 में जर्मनी का विभाजन और 1991 में सोवियत संघ का टूटना, इन सभी घटनाओं ने पुतिन को गहराई से प्रभावित किया. उन्होंने कई बार कहा है कि सोवियत संघ का विघटन 20वीं सदी की सबसे बड़ी भू-राजनीतिक त्रासदी थी. शायद इसी कारण वे लगातार यह सुनिश्चित करने में लगे रहे कि पूर्व सोवियत देश रूस के प्रभाव से दूर न जाएं. उनकी विदेश नीति में सोवियत संघ की खोई हुई प्रतिष्ठा को वापस लाने की झलक हमेशा दिखाई देती है.

President Putin Makes A State Visit To Kyrgyzstan

लगातार सत्ता में बने रहने पर हुआ विवाद

पुतिन 1999 से 2008 तक लगातार राष्ट्रपति रहे. संविधान के अनुसार तीसरी बार लगातार राष्ट्रपति बनना संभव नहीं था, इसलिए 2008 से 2012 तक वे प्रधानमंत्री बने रहे और उनकी जगह दमित्री मेदवेदेव राष्ट्रपति रहे. 2012 में पुतिन फिर से राष्ट्रपति बने और तब से अब तक लगातार इस पद पर हैं. हालांकि उनका शासन विवादों से भी घिरा रहा है. विपक्षी नेता एलेक्सी नेवलनी सहित कई नेताओं ने उन पर दमनकारी नीतियों, सत्ता के दुरुपयोग और विपक्ष को फर्जी आरोपों में जेल भेजने का आरोप लगाया है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पुतिन की नीतियों को अक्सर कठोर, राष्ट्रवादी और पश्चिम-विरोधी बताया जाता रहा है.

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