World News: कैसे होती है न्यूक्लियर टेस्टिंग, 80 साल में 2059 बार फूटे परमाणु बम – INA NEWS

World News: कैसे होती है न्यूक्लियर टेस्टिंग, 80 साल में 2059 बार फूटे परमाणु बम – INA NEWS

साल 1945 में जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु अटैक हुआ था. जिसका परिणाम आज तक वहां के लोग भुगत रहे हैं. लेकिन, हिरोशिमा और नागासाकी के बाद दुनिया भर में 2059 बार परमाणु बम फूटे हैं. एक समय ऐसा था जब देश में सभी देशों के बीच परमाणु ताकत हासिल करने की होड़ लग गई. सभी देश इसमें कूद गए और फिर सभी ने न्यूक्लियर टेस्टिंग की. इसी टेस्टिंग के चलते 80 साल में 2059 बार परमाणु बम फोड़े गए.

भारत में 3 मौकों पर यह परमाणु विस्फोट हुआ है. 18 मई 1974 को, भारत ने पहली बार पोखरण परीक्षण स्थल पर एक परमाणु उपकरण का टेस्ट किया था, जिसे स्माइलिंग बुद्धा नाम दिया गया था. चलिए जानते हैं कि कैसे यह न्यूक्लियर टेस्टिंग की जाती है.

कैसे होती है न्यूक्लियर टेस्टिंग?

Arms Control Center की वेबसाइट के मुताबिक, न्यूक्लियर टेस्टिंग का मकसद उपकरण की प्रभावशीलता, विस्फोट की शक्ति और उसकी विस्फोटक क्षमता का निर्धारण करना होता है. परमाणु टेस्ट मुख्य रूप से चार तरह के होते हैं:

  1. वायुमंडलीय टेस्ट (Atmospheric Tests): ये टेस्ट वायुमंडल में या उसके ऊपर किए जाते हैं.
  2. अंडरग्राउंड टेस्ट (Underground Tests): ये पृथ्वी की सतह के नीचे किए जाते हैं. ज्यादातर इसी का इस्तेमाल किया जाता है.
  3. ऊपरी वायुमंडलीय टेस्ट (Upper Atmospheric Tests): ये टेस्ट जमीन से 30 किलोमीटर से ज्यादा ऊंचाई पर किए जाते हैं.
  4. अंडरवॉटर टेस्ट (Underwater Tests): ये पानी के अंदर या उसकी सतह के पास किए जाते हैं.

जमीन के ऊपर या पानी के अंदर किए जाने वाले परमाणु टेस्ट अपने आसपास के क्षेत्र में रेडिएशन फैलाने की संभावना रखते हैं. लेकिन, अगर डिवाइस को पर्याप्त गहराई तक जमीन में दबाया जाए, तो परमाणु विस्फोट को नियंत्रित किया जा सकता है और रेडिएशन को वायुमंडल में फैलने से रोका जा सकता है.

हालांकि, अगर उपकरण पर्याप्त गहराई तक दबाया नहीं गया है, तो विस्फोट के कारण उसके आसपास की जमीन भी फट सकती है.

Nuclear Bomb

कितना होता है खतरनाक?

परमाणु उपकरणों के विस्फोट के समय बड़ी मात्रा में एनर्जी रिलीज होती है. यह एनर्जी इतनी ज्यादा होती है कि एक पल को लग सकता है कि भूकंप आया हो जैसे. वैश्विक स्तर पर एक नेटवर्क ऑफ सीस्मिक सेंसर स्थापित है, जिसने अपनी स्थापना के बाद से हर परमाणु परीक्षण का सफलतापूर्वक पता लगाया है.

उदाहरण के लिए, नॉर्थ कोरिया ने अपना आखिरी परमाणु परीक्षण 2017 में किया था. यह अंडर ग्राउंड टेस्ट नॉर्थ कोरिया के प्रसिद्ध प्यांग्गे-री परीक्षण स्थल के पास हुआ था और इसे यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के अनुसार 6.3 तीव्रता वाले भूकंपीय घटना के रूप में दर्ज किया गया था.

अंडर ग्राउंड न्यूक्लियर टेस्ट कैसे किया जाता है?

परमाणु उपकरणों का अक्सर अंडर ग्राउंड न्यूक्लियर टेस्ट किया जाता है ताकि विस्फोट में जो रेडिएशन रिलीज हो रहे हैं वो सतह तक न पहुंचे. यह तरीका एक हद तक गोपनीयता भी सुनिश्चित करता है.

टेस्ट स्थल को सावधानीपूर्वक भू-वैज्ञानिक सर्वे के बाद ही चुना जाता है और यह आमतौर पर आबादी वाले इलाकों से दूर होता है. परमाणु उपकरण को सतह से लगभग 200800 मीटर (6502,600 फीट) गहरे और कई मीटर चौड़े ड्रिल किए गए छेद या सुरंग में रखा जाता है.

निगरानी उपकरणों से भरा सीसा-पर्त वाला कैनिस्टर छेद के ऊपर वाले हिस्से में डाला जाता है. उसके बाद विस्फोट और गिरावट को भूमिगत सीमित करने के लिए छेद को बजरी, रेत, जिप्सम और बाकी महीन सामग्रियों से बंद कर दिया जाता है. उपकरण को सतह पर स्थित कंट्रोल बंकर से विस्फोट किया जाता है.

armscontrolcenter की वेबसाइट के मुताबिक, अब तक सबसे ज्यादा परमाणु टेस्टिंग अमेरिका ने की है.

देश न्यूक्लियर टेस्ट की संख्या
अमेरिका 1,032
सोवियत संघ 715
फ्रांस 210
यूनाइटेड किंगडम 45
चीन 45
भारत 3
पाकिस्तान 2
नॉर्थ कोरिया 6

हाल के सालों में परमाणु टेस्ट की संख्या काफी कम हो गई है, 21वीं सदी में विस्फोटक टेस्ट करने वाला एकमात्र देश नॉर्थ कोरिया रहा है.

कैसे होती है न्यूक्लियर टेस्टिंग, 80 साल में 2059 बार फूटे परमाणु बम

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