World News: बगराम पर अमेरिका से सीधी जंग की तैयारी कर रहा तालिबान, कितने ताकतवर हैं अफगानी? – INA NEWS


अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अफगानिस्तान के बगराम एयरबेस पर दिए गए हालिया बयानों के बाद तनाव और गहरा गया है. ट्रंप ने साफ चेतावनी दी है कि अगर तालिबान ने बगराम को नहीं सौंपा, तो बुरा होगा. इधरअफगानिस्तान में तालिबान की हलचल एक बार फिर तेज हो गई है. कंधार में तालिबान सुप्रीमो हिब्तुल्लाह अखुंदजादा ने अपने शीर्ष मंत्रियों, खुफिया प्रमुखों और सैन्य कमांडरों के साथ लगातार बैठकें की हैं. सूत्रों का कहना है कि इन बैठकों में सबसे अहम मुद्दा रहा बगराम एयरबेस.
जानकारी के मुताबिक कंधार में अखुंदजादा के आवास के आसपास भारी संख्या में कमांडो तैनात कर दिए गए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक इन बैठकों में तय किया गया है कि तालिबान बगराम किसी भी हाल में नहीं सौंपेंगा और अगर अमेरिका ने ऐसी कोई कोशिश भी की तो वो सीधे जंग लड़ने को तैयार है. सवाल यह है कि तालिबान के पास कितनी ताकत है और अगर जंग छिड़ी तो वह कितना टिक पाएगा?
किसी भी हाल में नहीं सौंपेंगे बगराम: तालिबान
तालिबान के नेताओं ने हाल के दिनों में धार्मिक नेताओं और सैन्य कमांडरों के साथ गहन चर्चा की है. इसका मकसद सिर्फ सैन्य तैयारी नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी है कि वे किसी भी विदेशी दबाव में झुकने वाले नहीं हैं. उन्होंने साफ कह दिया है कि वे किसी भी हाल में अमेरिका को बगराम एयरबेस नहीं सौंपेंगे. सूत्रों के मुताबिक, कंधार में सुरक्षा अभूतपूर्व स्तर पर बढ़ा दी गई है.
तालिबान की सैन्य ताकत कितनी है?
इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज़ (IISS) की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान के पास फिलहाल करीब 1.5 लाख सक्रिय लड़ाके हैं. यही नहीं, तालिबान के सैन्य प्रमुख ने दावा किया था कि इस ताकत को 50 हजार और बढ़ाया जाएगा. हालांकि, यह विस्तार कब तक होगा, इस पर उन्होंने कोई समयसीमा नहीं बताई. अगर सैनिकों की संख्या की बात करें तो अमेरिका के पास 21 लाख से ज्यादा सैनिक हैं. अमेरिका के पास 13,398 सैन्य विमान हैं. टैंकों की संख्या भी अमेरिका के पक्ष में है, अमेरिका के पास 6,287 टैंक हैं. 24 एयरक्राफ्ट कैरियर हैं.
हथियार और मशीनरी कितनी आधुनिक?
2021 में अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय सेनाओं की अफगानिस्तान से अराजक वापसी के बाद तालिबान ने बड़ी मात्रा में हथियार और गाड़ियाँ कब्जे में लीं. तालिबान के पास कई आर्मर्ड गाड़ियाँ और खींचकर ले जाई जाने वाली तोपें मौजूद हैं. तीन हल्के विमान और 14 हेलिकॉप्टर, जिनमें अमेरिकी ब्लैक हॉक भी शामिल हैं, तालिबान के पास हैं. अफगान नेशनल डिफेंस एंड सिक्योरिटी फोर्स (ANDSF) से कुछ रूसी अटैक हेलिकॉप्टर भी तालिबान के हाथ लगे.
अमेरिकी सेनाओं ने अफगानिस्तान छोड़ते वक्त करीब 7 अरब डॉलर का सैन्य सामान पीछे छोड़ दिया था. इसमें हाई-टेक हथियार और उन्नत तकनीक के सिस्टम भी शामिल थे. लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि तालिबान की इन्हें संचालित करने की क्षमता सीमित है. यानी महंगे और आधुनिक हथियार होने के बावजूद उनका इस्तेमाल तालिबान के लिए उतना आसान नहीं है.
ट्रंप का बयान और तनाव की जड़
डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान ने तालिबान को चिढ़ा दिया है. उन्होंने कहा था कि अमेरिका बगराम एयरबेस को फिर से अपने कब्जे में लेना चाहता है. बगराम कभी अमेरिकी ताकत का प्रतीक माना जाता था. तालिबान के लिए यह एयरबेस सिर्फ एक सैन्य ठिकाना नहीं, बल्कि प्रतीकात्मक जीत है. इसलिए इसे सौंपना उनके लिए न सिर्फ हार, बल्कि साख का भी नुकसान होगा.
हालांकि तालिबान के पास संख्या बल और हथियार हैं, लेकिन उनकी सबसे बड़ी चुनौती है प्रशिक्षण और तकनीकी दक्षता. उन्नत हथियारों को चलाना और बनाए रखना आसान नहीं है. यही कमजोरी तालिबान की सीमाएं भी तय करती है.
बगराम पर अमेरिका से सीधी जंग की तैयारी कर रहा तालिबान, कितने ताकतवर हैं अफगानी?
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