World News: जंग में अकेला पड़ा यूक्रेन, पुतिन के हमले से कैसे बचेंगे जेलेंस्की? – INA NEWS


अब ये तय होने जा रहा है अगर अगस्त के आखिर तक युद्धविराम को लेकर तीसरी वार्ता नहीं होती है तो यूरोप में हालात काफी बिगड़ जाएंगे. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने विध्वंसक धमकी दी है. अगर यूक्रेन को यूरोपीय देशों ने बारूद की सप्लाई नहीं रोकी, तो यूरोपीय देश रूस के टारगेट पर आ जाएंगे. पोलैंड की सीमा में रूस ने ड्रोन भेजकर ट्रेलर दिखा दिया है. अब भी अगर यूक्रेन बैकफुट पर नहीं आया, तो यूरोप को विध्वंस से कोई नहीं बचा सकता, अब या तो शांति समझौता होगा यूक्रेन का संपूर्ण संहार. इसके लिए क्रेमलिन ने नया ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है. पहले यूक्रेन की तबाही होगी, उसके बाद पुतिन दूसरे देशों पर हमला कर सकते हैं.
पूरे यूरोप को पुतिन ने फाइनल वॉर्निंग दे दी है. अगर युद्ध रोकने का स्थायी फॉर्मूला नहीं निकाला गया, तो पूरे यूरोप में तबाही का सबसे खौफनाक दौर आरंभ हो सकता है, यानी यूक्रेन का संहार होगा, जिसके लिए पुतिन ने हमले तेज कर दिए हैं. साथ ही बाल्टिक देशों पर भी रूस हमले कर सकता है. उसके बाद नॉर्डिक देशों की बारी है. साथ ही वो देश भी रूस के टारगेट पर हैं, जो यूक्रेन को हथियार देते रहे हैं.
अगर अभी भी हथियार सप्लाई जारी रहे, तो पुतिन कह चुके हैं कि वो हमला करने के लिए स्वतंत्र हैं. वैसे भी पुतिन ने अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि शांति प्रक्रिया का मतलब सिर्फ एक हफ्ते, दो हफ्ते या एक साल का युद्धविराम नहीं होना चाहिए, जिससे NATO देश फिर से यूक्रेन को हथियार से भर सकें. हमें ऐसी शर्तें चाहिए जो दीर्घकालिक, टिकाऊ और स्थायी शांति दें. जहां सभी पक्षों की बराबर सुरक्षा सुनिश्चित हो, यानी अब सुरक्षा गारंटी के नाम पर रूस और दूसरे यूरोपीय देश आमने-सामने आ सकते हैं और इस टकराव के लिए रूस तैयार है. इसका संकेत रूस ने पोलैंड में ड्रोन भेजकर दे दिया है.
यूक्रेन को सुरक्षा की गारंटी मिलना मुश्किल
पोलैंड रूस पर प्रतिबंध लगाने के लिए कह रहा है कि क्योंकि रूस ने नाटो के सदस्य देश पर हमला किया है. इसे गंभीरता से लेना होगा. ये पुतिन के विस्तारवादी मंसूबे को दिखा रहा है. जिस जगह ड्रोन गिरा वो वारसॉ से 80 किलोमीटर दूर है और बेलारूस बॉर्डर से 126 किलोमीटर दूर, यानी रूसी ड्रोन पोलैंड की सीमा में काफी अंदर तक घुस आया था, जिसे डिफेंस सिस्टम इंटरसेप्ट करने में नाकाम रहे. ये रूस के हमले का सिर्फ ट्रेलर हो सकता है, जबकि रूस ने इससे कहीं आगे की तैयारी की हुई है.
इस बीच नाटो भी समझ चुका है कि यूक्रेन को सुरक्षा की गारंटी मिलना मुश्किल है. इसी वजह से नाटो देशों ने यूक्रेन को ज्यादा से ज्यादा और जल्दी से जल्दी सैन्य मदद पहुंचाने की तैयारी शुरू कर दी है, जिससे रूस की बौखलाहट बढ़ेगी और तबाही का सबसे खौफनाक दरवाजा यूरोप में खुल सकता है.
यूक्रेन को सैन्य मदद अभी भी जारी है, जिससे वो लगातार रूस पर हमले कर रहा है. आपको बताते हैं वो कौन से देश हैं जिन्होंने लगातार यूक्रेन की मदद की है. इस लिस्ट में पहले नंबर पर ब्रिटेन है, जिसने अभी तक 71 हजार 156 करोड़ की मदद की है. दूसरे नंबर पर जर्मनी है, जिसने 50 हजार 816 करोड़ के हथियार यूक्रेन को भेजे हैं. तीसरे नंबर पर फ्रांस आता है, जिसकी तरफ से अब तक 38 हजार 624 करोड़ की मदद की गई है. चौथे स्थान पर पोलैंड का नाम है, जिससे 31 हजार 512 करोड़ की सैन्य मदद यूक्रेन को मिली है. नीदरलैंड्स ने भी 20 हजार 331 करोड़ की सैन्य मदद यूक्रेन को दी गई है. स्वीडन ने अब तक 13 हजार 216 करोड़ के हथियार यूक्रेन को भेजे हैं. डेनमार्क भी 10 हजार 166 करोड़ की सैन्य मदद कर चुका है.
पुतिन के हमले से कैसे बचेगा यूक्रेन?
यूक्रेन को लगातार बारूद की सप्लाई और सुरक्षा की गारंटी पर यूरोपीय देशों की प्रतिक्रिया से साफ है कि उन्हें युद्धविराम तभी मंजूर होगा, जब यूक्रेन की सुरक्षा पर फाइनल मोहर लगेगी, जबकि रूस ने यूक्रेन जैसी सुरक्षा की गारंटी खुद के लिए मांगकर मामले के फंसा दिया है. इस बीच चीन के लिए ऐसी ही गारंटी की डिमांड की जा रही है. दरअसल रूस चाहता है कि सुरक्षा गारंटी प्रक्रिया में अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और चीन के साथ रूस को भी इसमें शामिल किया जाए. रूस को इसमें वीटो पावर चाहिए, जिससे वो किसी फैसले को रोक सके, लेकिन यूक्रेन और यूरोपीय देशों ने इस मांग को खारिज कर दिया है, जबकि ट्रंप की कोशिश है. इस महीने के आखिर तक युद्धविराम हो जाए. अगर नही हो पाया तो भीषण युद्ध होगा. पुतिन सर्दियों में युद्ध की तैयारी कर चुके हैं. अब अगर अमेरिका की मदद यूक्रेन को नहीं मिलेगी तो यूक्रेन तबाह हो जाएगा.
अगस्त के आखिर तक अगर युद्ध रोकने को लेकर कोई वार्ता नहीं हुई तो यूरोप में समीकरण बदल सकते हैं. रूस यूक्रेन में भारी तबाही मचा सकता है. सवाल उठ रहा है कि पुतिन के हमले से कैसे बचेगा यूक्रेन, इसके तीन विकल्प हैं. पहला विकल्प है, यूरोप फ्रंटलाइन पर आकर रूस से मुकाबला करे. दूसरा विकल्प है, जेलेंस्की सरेंडर करें और रूस के जीते इलाके सौंपें, जिससे यूक्रेन का संहार रुक सकता है और तीसरा विकल्प है, अमेरिका भी रूस के खिलाफ उतरे, यानी रूस से युद्ध करे, लेकिन इसकी उम्मीद ना के बराबर है क्योंकि ट्रंप खुद चाहते हैं कि जल्द से जल्द यूरोप में युद्ध रोका जाए.
रोमानिया से लेकर बाल्टिक देशों तक हथियारों की तैनाती
अगर युद्धविराम से जेलेंस्की पीछे हटते हैं तो अमेरिका यूक्रेन की सैन्य मदद रोक देगा. इसको लेकर यूक्रेन के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बयान भी दिया है. यूरोपीय देशों को यूक्रेन का बोझ उठाना होगा. अमेरिका अब ज्यादा मदद नहीं कर सकता. अमेरिका ने तस्वीर साफ कर दी है. अगर अगस्त के आखिर तक तीसरी वार्ता नहीं होती है, तो यूक्रेन को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. वैसे भी रूस ने यूक्रेन के पांचवें हिस्से से ज्यादा जमीन पर कब्जा कर लिया है, जिन इलाकों को रूस चाहता है वहां 90 फीसदी उसका कंट्रोल हो चुका है, यानी सिर्फ उन इलाकों के 10 फीसदी हिस्से पर कब्जा करना बाकी है, जो रूस कभी भी कर सकता है. बस उसे इंतजार है. अगर यूक्रेन युद्धविराम समझौते में इस शर्त को मान ले, नहीं तो तबाही के लिए तैयार रहे.
वहीं, नाटो देशों को अंदाजा हो गया है कि अब पुतिन रुकने वाले नहीं है इसलिए रोमानिया से लेकर बाल्टिक देशों तक हथियारों की तैनाती की जा रही है. एयरबेस वॉर रेडी किए जा रहे हैं. रोमानिया में F-35 की तैनाती की गई है. नीदरलैंड्स में पैट्रियट लगाए गए हैं, जबकि लिथुआनिया में ड्रोन हमले के लिए तैयार हैं. इस बीच यूक्रेन में शांति सेना भेजने का फैसला करके नाटो ने संकेत दे दिया है, वो हर परिस्थिति के लिए तैयार है.
ब्यूरो रिपोर्ट, TV9 भारतवर्ष
जंग में अकेला पड़ा यूक्रेन, पुतिन के हमले से कैसे बचेंगे जेलेंस्की?
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