World News: Iran Protests: ईरान में बवाल, अब तक 572 लोगों की मौत; लेकिन सऊदी ने क्यों साध रखी है चुप्पी? – INA NEWS

World News: Iran Protests: ईरान में बवाल, अब तक 572 लोगों की मौत; लेकिन सऊदी ने क्यों साध रखी है चुप्पी? – INA NEWS

करीब 9 साल पहले सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को नया हिटलर कहा था. यह बयान उन्होंने न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में दिया था. उस समय दोनों देशों के रिश्ते बेहद खराब थे. ईरान की तरफ से भी इस बयान पर जवाब आया और सऊदी शासकों का मजाक उड़ाया गया. लेकिन 2023 के बाद हालात बदलने लगे. चीन की मध्यस्थता से सऊदी और ईरान ने रिश्ते दोबारा बहाल किए.

इसके तहत सऊदी अरब ने अब्दुल्ला बिन सऊद अल-अनजी को ईरान में अपना राजदूत बनाकर तेहरान भेजा. वहीं, ईरान ने भी अली रजा एनायती को सऊदी अरब में राजदूत नियुक्त किया. 2026 में ईरान के 31 प्रांतों में 500 से ज्यादा सरकार-विरोधी प्रदर्शन हो चुके हैं. हिंसक प्रदर्शन में 572 लोगों की मौत हो चुकी है. हालांकि सऊदी अरब ने आधिकारिक तौर पर चुप्पी साध रखी है. आइए जानते हैं इसके पीछे की वजह क्या है?

क्या है MBS का विजन 2030?

इस चुप्पी के पीछे सबसे बड़ी वजह है सऊदी क्राउन प्रिंस का महत्वाकांक्षी प्लान विजन 2030. इस योजना का मकसद सऊदी अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से बाहर निकालना, विदेशी निवेश लाना और बड़े विकास प्रोजेक्ट्स पूरे करना है. सऊदी नेतृत्व को डर है कि ईरान में अस्थिरता या किसी बड़े टकराव से पूरे क्षेत्र में हालात बिगड़ सकते हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा डगमगा सकता है.

सऊदी मीडिया में ईरान पर रिपोर्टिंग

सऊदी सरकार चुप है, लेकिन सऊदी मीडिया पूरी तरह शांत नहीं है. अल-अरबिया, अल-हदथ और लंदन से पब्लिश होने वाले अखबार अशरक अल-अवसत लगातार ईरान की हालात पर रिपोर्टिंग कर रहे हैं. ईरान में इंटरनेट और फोन सर्विस बंद होने के बावजूद, कुछ पत्रकार चोरी-छिपे ईरानी नागरिकों से संपर्क कर खबरें सामने ला रहे हैं.

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची की लेबनान यात्रा पर सऊदी मीडिया ने खास ध्यान दिया. सऊदी मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, बेरूत में उन्हें ठंडा स्वागत मिला. लेबनान के विदेश मंत्री यूसुफ रज्जी बातचीत में ज्यादा इंटरेस्ट नहीं दिखा रहे थे और मीटिंग जल्दी खत्म हो गई. अराघची तय समय से पहले ही लौट आए. अराघची ने उन खबरों को भी खारिज किया जिनमें कहा गया था कि वे अपने परिवार को लेबनान शिफ्ट करने आए हैं.

ईरान मामले पर US के संपर्क में सऊदी

पर्दे के पीछे रियाद और वॉशिंगटन के बीच लगातार संपर्क बना हुआ है. सऊदी अरब डोनाल्ड ट्रंप की उस नीति से सहमत दिखता है, जिसमें ईरान के हालात पर नजर रखी जा रही है, लेकिन फिलहाल सीधे दखल से बचा जा रहा है. इसके अलावा मोहम्मद बिन सलमान अमेरिका को सीरिया और लेबनान को लेकर सुझाव दे रहे हैं. हालांकि जानबूझकर जॉर्डन और मिस्र को इस चर्चा से दूर रखा गया है.

ईरान को लेकर सऊदी अरब की चुप्पी कमजोरी नहीं, बल्कि सोची-समझी रणनीति है. रियाद हालात को बिगड़ने देने के बजाय इंतजार करना चाहता है. ताकि क्षेत्रीय स्थिरता, Vision 2030 और अपने हितों को सुरक्षित रखा जा सके.

Iran Protests: ईरान में बवाल, अब तक 572 लोगों की मौत; लेकिन सऊदी ने क्यों साध रखी है चुप्पी?

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