World News: परमाणु कार्यक्रम की जिद पड़ रही ईरान को भारी, अब दवाइयों तक की हुई कमी – INA NEWS

World News: परमाणु कार्यक्रम की जिद पड़ रही ईरान को भारी, अब दवाइयों तक की हुई कमी – INA NEWS

ईरान इस समय मुश्किलों का सामना कर रहा है. दवा उद्योग के एक प्रमुख विशेषज्ञ ने चेतावनी दी है कि मार्च तक ईरान में दवा उत्पादन रुकावटों और गंभीर दवा की कमी का सामना करेगा. इसकी वजह है कि संयुक्त राष्ट्र के फिर से लगाए गए प्रतिबंधों (snapback mechanism) ने विदेशी मुद्रा तक पहुंच और आपूर्ति व्यवस्था दोनों को प्रभावित किया है.

मोजतबा सरकंदी ने रविवार को अखबार एतेमाद को बताया कि 2024 और 2025 के आंकड़ों के अनुसार, ईरान को विदेशी मुद्रा आवंटन और दवा उद्योग की आयात जरूरतों के बीच का अंतर बढ़ता जा रहा है. ये आंकड़े 28 सितंबर को यूएन प्रतिबंध दोबारा लागू होने से पहले तैयार किए गए थे.

प्रतिबंध का दवाओं पर पड़ रहा असर

सरकंदी ने कहा, हमारा उद्योग दो सच्चाइयों पर चलता है. एक तरफ देश की लगभग 99% दवाएं देश के अंदर बनती हैं, लेकिन ज्यादातर सक्रिय दवा तत्व (APIs) और जरूरी केमिलकल कंपाउंड (chemical compound) अब भी विदेशों से, मुख्य रूप से चीन और भारत से, आते हैं.

एतेमाद की रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने ईरान की दवाओं और मेडिकल फेसेलिटी तक पहुंच को बुरी तरह प्रभावित किया है. हालांकि मानवीय चीजों को प्रतिबंधों से छूट है, लेकिन बैंकिंग और बीमा पर लगी रोक के कारण ईरानी आयातकों के लिए जरूरी दवाओं का भुगतान या परिवहन करना बहुत मुश्किल हो गया है. इसके चलते अस्पतालों और दवा दुकानों में अक्सर जीवनरक्षक दवाओं (life saving medicine) की कमी हो जाती है, खासकर कैंसर, मल्टिपल स्क्लेरोसिस और दुर्लभ बीमारियों के इलाज में.

फंड की हुई कमी

सरकंदी के अनुसार, सरकार ने इस साल दवाओं और मेडिकल उपकरणों के लिए लगभग 3.4 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा आवंटित की थी, लेकिन हाल में उपलब्ध विदेशी मुद्रा की कमी की वजह से इस फंड तक पहुंच पहले ही 10 से 20 प्रतिशत तक घट गई है.

उन्होंने कहा, यूएन के प्रतिबंध फिर से लागू होने (snapback) के बाद, कच्चे माल के निर्माता और आयातक बैंकिंग, बीमा और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी नई मुश्किलों का सामना कर रहे हैं. नतीजा साफ है — दवाओं की कमी.

उनके अनुसार, सितंबर के बाद से शिपिंग और बीमा की लागत 30 से 50 प्रतिशत तक बढ़ गई है, जबकि बैंकिंग चैनलों के ठप पड़ जाने से आयात की अवधि तीन महीने से बढ़कर 6 महीने तक हो गई है.

कैंसर की दवा पर होगा असर

उन्होंने कहा कि यह कमी सबसे ज्यादा कैंसर और बायोटेक दवाओं पर असर डालेगी, जैसा कि 2012 और 2018 के प्रतिबंध के समय में हुआ था. इस संकट के चलते मरीजों को महंगी काले बाजार की दवाओं पर निर्भर होना पड़ रहा है या फिर इलाज में देरी झेलनी पड़ रही है, जबकि घरेलू दवा निर्माता सीमित कच्चे माल के चलते संघर्ष कर रहे हैं.

गलत नीतियों का भी पड़ा असर

एक अन्य उद्योग अधिकारी, जिनका नाम एतेमाद ने उजागर नहीं किया, उन्होंने कहा कि सरकारी कुप्रबंधन ने प्रतिबंधों के असर को और बढ़ा दिया है. उन्होंने कहा, प्रतिबंध का असर इस संकट पर लगभग 40 प्रतिशत है. बाकी समस्या गलत नीतियों से पैदा हुई है — जैसे मुद्रा आवंटन में देरी, मनमानी कीमत निर्धारण और पारदर्शिता की कमी.

उनके अनुसार, निर्माताओं को सरकारी मूल्य नियंत्रण (Price Caps) के कारण बढ़ती लागत के बीच भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है.

और गंभीर हो जाएगी कमी

स्वास्थ्य अधिकारियों ने दवा क्षेत्र की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने का वादा किया है, लेकिन उद्योग के जानकारों का कहना है कि अगर दवाओं के लिए विशेष भुगतान चैनल नहीं बनाए गए, तो कमी आने वाले दिनों में और गंभीर हो जाएगी.

संयुक्त राष्ट्र (UN) ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर उस पर सितंबर के महीने में फिर से प्रतिबंध लगाए हैं. इन प्रतिबंधों के चलते हथियारों पर रोक (आर्म्स एम्बार्गो), परमाणु हथियार ले जाने योग्य मिसाइलों पर रोक और संपत्ति फ्रीज और यात्रा पर पाबंदी भी शामिल है. ईरान की अर्थव्यवस्था पहले ही मुश्किलों से गुजर रही है. इस बीच यह प्रतिबंध लगने के बाद इसका असर अर्थव्यवस्था पर और भी गहरा पड़ेगा.

परमाणु कार्यक्रम की जिद पड़ रही ईरान को भारी, अब दवाइयों तक की हुई कमी

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