World News: ईरान की सत्ता से जिसे किया गया था बेदखल, उसकी बहू सालों से ऐसे लिख रही खामेनेई की चूलें हिलाने की स्क्रिप्ट – INA NEWS

World News: ईरान की सत्ता से जिसे किया गया था बेदखल, उसकी बहू सालों से ऐसे लिख रही खामेनेई की चूलें हिलाने की स्क्रिप्ट – INA NEWS

ईरान की मौजूदा इस्लामिक सत्ता को चुनौती देने वाले सबसे प्रमुख चेहरों में एक नाम लगातार सक्रिय है. यास्मीन एतेमाद अमीनी. वो कोई और नहीं बल्कि ईरान के आखिरी शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे और पूर्व क्राउन प्रिंस रजा पहलवी की पत्नी हैं. जिस शाही परिवार को 1979 की क्रांति के बाद सत्ता से बेदखल कर निर्वासन में धकेल दिया गया, उसी परिवार की बहू अब धीरे-धीरे ईरानी हुकूमत के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लोकतंत्र की पटकथा लिख रही है.

यास्मीन एतेमाद अमीनी और रजा पहलवी की शादी 1986 में हुई थी. यास्मीन पेशे से वकील हैं और उन्होंने वॉशिंगटन डीसी के जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में स्नातक और कानून में डॉक्टरेट की पढ़ाई की. उन्होंने बच्चों के अधिकारों के लिए कई सालों तक अमेरिका में वकालत की. लेकिन असली पहचान उन्हें तब मिली जब उन्होंने ईरानी बच्चों की मदद के लिए फाउंडेशन फॉर द चिल्ड्रन ऑफ ईरान की स्थापना की.

ईरान के लोगों के लिए कई काम

साल 1991 में शुरू हुई इस संस्था का उद्देश्य था. ऐसे ईरानी बच्चों को मेडिकल हेल्थ सर्विस देना जो देश या विदेश में किसी भी राजनीतिक, धार्मिक या नस्लीय मतभेद के बावजूद इलाज से वंचित हैं. इस संस्था के जरिए यास्मीन ने चुपचाप ईरान के आम नागरिकों के लिए अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की. लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने अपने सामाजिक काम को राजनीतिक संघर्ष में बदल दिया, खासकर महिलाओं और बच्चों के हक के सवाल पर.

ईरानी शासन को बदलने की स्क्रिप्ट

बीते कई सालों से यास्मीन खुलकर ईरान में लोकतंत्र की मांग कर रही हैं. वो दुनिया भर के प्रोटेस्ट्स, सम्मेलनों और डेमोक्रेसी पैनल्स में हिस्सा लेती रही हैं. उनका एक ही मकसद है ईरान की इस्लामिक शासन व्यवस्था को शांतिपूर्ण तरीके से बदला जाए और वहां लोकतंत्र की बहाली हो. वो महिलाओं के अधिकारों, बच्चों की सुरक्षा और ईरानी युवाओं के भविष्य के लिए आवाज़ उठाने वालों में सबसे आगे रही हैं.

कौन है रजा पहलवी?

रजा पहलवी, जो खुद भी लोकतंत्र समर्थक आंदोलन के अगुवा हैं, ने कभी ईरान-इराक युद्ध के दौरान देश लौटकर लड़ने की पेशकश की थी, लेकिन मौजूदा शासन ने उन्हें नकार दिया. रजा ने तीन किताबें भी लिखी हैं जिनमें उन्होंने ईरान में बदलाव की दिशा और लोकतांत्रिक रास्तों का खाका पेश किया. उनकी इस लंबी राजनीतिक लड़ाई में यास्मीन सिर्फ़ जीवनसाथी नहीं, बल्कि विचारधारा की साझेदार बनकर साथ चल रही हैं.

यास्मीन का सबसे बड़ा हथियार

यास्मीन का सबसे बड़ा हथियार है. उनकी सधी हुई लेकिन दृढ़ राजनीतिक शैली. वो सीधे किसी पर हमला नहीं करतीं, लेकिन अपने भाषणों, लेखों और सामाजिक कामों के जरिए मौजूदा ईरानी नेतृत्व को नैतिक चुनौती देती रहती हैं. अयातुल्ला खामेनेई की सत्ता जिस धार्मिक वैधता पर टिकी है, यास्मीन उसी नैरेटिव को चुनौती देती हैं कि धर्म और सत्ता अलग होनी चाहिए और जनता को खुली राय और स्वतंत्रता मिलनी चाहिए.

स्क्रिप्ट की अहम किरदार हैं यास्मीन

आज जब ईरान में विरोध की आवाज़ें सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक गूंज रही हैं, यास्मीन का संघर्ष उस आंदोलन की अंतरराष्ट्रीय धुरी बन चुका है. वो ना सिर्फ़ निर्वासन में रहकर ईरान की जनता की आवाज उठाती हैं, बल्कि दुनिया को बताती हैं कि सत्ता से निकाले गए लोग भी देश के लिए लड़ सकते हैं. सिर्फ़ बंदूक से नहीं, विचारों से. यही वजह है कि खामेनेई की सत्ता को हिलाने वाली इस स्क्रिप्ट की सबसे अहम किरदार बन चुकी हैं. शाह की बहू, यास्मीन एतेमाद अमीनी.

ईरान की सत्ता से जिसे किया गया था बेदखल, उसकी बहू सालों से ऐसे लिख रही खामेनेई की चूलें हिलाने की स्क्रिप्ट

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