World News: नेपाल में आसान नहीं अंतरिम प्रधानमंत्री का चयन, जानिए क्या हैं संवैधानिक प्रावधान? – INA NEWS


नेपाल में जनरेशन-जी का बवाल जैसे-जैसे धीमा होता जा रहा है. वैसे-वैसे सियासी जटिलताएं बढ़ती जा रही है. राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने अंतरिम प्रधानमंत्री के चयन पर चर्चा के बीच एक पत्र जारी कर दिया है. पौडेल ने अपने पत्र में साफ-साफ कहा है कि हम संविधान के भीतर ही विकल्प ढूंढ रहे हैं. पौडेल का यह बयान ऐसे वक्त में सामने आया है, जब नेपाल के 3 पूर्व पीएम (बाबूराम भट्टराई, प्रचंड और केपी शर्मा ओली) ने संविधान के दायरे में कार्रवाई की मांग की है.
जानकारों का कहना है कि संविधान के दायरे में अगर काम होता है तो जनरेशन-जेड की मांगों को झटका लग सकता है. क्योंकि नेपाल का संविधान काफी उलझा है और उसमें कई चीजें स्पष्ट नहीं है. खासकर अंतरिम सरकार बनाने और संसद को भंग करने को लेकर.
क्या है संवैधानिक प्रावधान?
नेपाल के संविधान के अनुच्छेद 76 में सरकार और प्रधानमंत्री के चयन के बारे में विस्तार से बताया गया है. इसके मुताबिक राष्ट्रपति प्रतिनिधि सभा में बहुमत के आधार पर प्रधानमंत्री को चुनेंगे. प्रतिनिधि सभा का चुनाव हर 5 साल में कराया जाएगा. नेपाल प्रतिनिधि सभा में कुल 275 सीटें हैं.
अनुच्छेद 76 के कई उपखंड बनाए गए हैं. इन्हीं में से एक उपखंड 3 में बहुमत न होने पर भी सरकार गठन के बारे बताया गया है. इसमें कहा गया है कि राष्ट्रपति सबसे बड़े दल के नेता को प्रधानमंत्री चुन सकते हैं. बहुदलीय व्यवस्था के तहत भी राष्ट्रपति पीएम चुनने का फैसला कर सकते हैं. चुने गए पीएम को 30 दिन में बहुमत साबित करना होगा.
उपखंड 5 में कहा गया है कि अगर सबसे बड़े दल के नेता भी अगर बहुमत साबित नहीं कर पाते हैं, तो राष्ट्रपति प्रतिनिधि सभा के किसी शख्स को प्रधानमंत्री नियुक्त कर सकते हैं. आखिर में पीएम संसद को बहुमत न होने की स्थिति में ही भंग कर सकते हैं. संसद को सिर्फ बहुमत न होने की स्थिति में ही भंग करने की बात नेपाल के संविधान में लिखा गया है.
इसमें यह भी कहा गया है कि जो शख्स संसद भंग होने के वक्त में नेपाल के पीएम रहेंगे. वही आम चुनाव होने तक केयरटेकर पीएम भी रहेंगे. यानी नेपाल के संविधान में अंतरिम सरकार के बारे में कुछ नहीं कहा गया है.
यहीं पर फंस गया है पेच
नेपाल में वर्तमान में जो प्रतिनिधि सभा है. उसमें कांग्रेस को बहुमत है. केपी शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया है. ऐसे में अब अगर राष्ट्रपति संविधान से चलने की बात करते हैं तो उन्हें 2 काम करना होगा. पहला कांग्रेस पार्टी से सरकार चलाने के बारे में पूछना होगा. कांग्रेस अगर सरकार चलाने को इच्छुक नहीं होती है, तो किसी ऐसे शख्स को पीएम नियुक्त करना होगा, जो बहुमत साबित कर दे.
वहीं अगर सभी पार्टियां एक सुर में चुनाव में जाने की बात करती है तो प्रतिनिधि सभा के ही किसी एक शख्स को केयरटेकर पीएम बनाना होगा. वर्तमान में जनरेशन-जेड ने जिन नामों को आगे किया है, उनमें से कोई भी प्रतिनिधि सभा के सदस्य नहीं हैं. यानी राष्ट्रपति अगर किसी को अंतरिम प्रधानमंत्री नियुक्त करते हैं तो वो संविधान के अनुच्छेद 76 का खुला उल्लंघन होगा.
यही वजह है कि राष्ट्रपति ने विवाद के बीच एक पत्र जारी कर संविधान के भीतर ही विकल्प ढूंढने की बात कही है. वहीं जेनरेशन-जेड के आंदोलनकारी रक्षा बम का कहना है कि राष्ट्रपति संविधान के नाम पर हमें उलझा रहे हैं. संविधान को सभी लोग मानते हैं, लेकिन आगे का चुनाव इन्हें नागरिक सरकार के अधीन ही कराना होगा.
नेपाल में आसान नहीं अंतरिम प्रधानमंत्री का चयन, जानिए क्या हैं संवैधानिक प्रावधान?
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