World News: ईरान छोड़िए, खाड़ी में असली खेल तो यूएई के साथ हो गया…यमन के बाद सोमालिया से भगाए गए अमीराती – INA NEWS


यूएई की मुश्किल बढ़ती जा रही है. जहां एक तरफ पहले ही यूएई को यमन में नुकसान हुआ है. यमन में यूएई समर्थित साउदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) को पीछे हटना पड़ा. इसी के बाद अब यूएई को सोमालिया में भी झटका लगा है. सोमालिया ने यूएई के साथ किए गए सभी समझौतों को खत्म कर दिया है. इनमें प्रमुख बंदरगाह संचालन, सुरक्षा सहयोग और रक्षा से जुड़े समझौते शामिल हैं. सोमालिया ने कहा कि यह फैसला उन हानिकारक कार्रवाइयों की वजह से लिया गया है, जो देश की एकता और संप्रभुता को कमजोर करती हैं.
सोमवार को मंत्रिपरिषद की ओर से इस फैसले की घोषणा के बाद, रक्षा मंत्री अहमद मुअल्लिम फिकी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि यह कदम विश्वसनीय रिपोर्टों और सबूतों पर आधारित है. उनके मुताबिक, इन रिपोर्टों में यूएई से जुड़ी ऐसी गतिविधियों का जिक्र है, जो सोमालिया की संप्रभुता, राष्ट्रीय एकता और राजनीतिक स्वतंत्रता को नुकसान पहुंचाती हैं. फिलहाल, अभी इस पर यूएई का कोई कमेंट सामने नहीं आया है.
सोमालिया ने क्यों लिया फैसला?
स्वतंत्र सोमालिया विश्लेषक अब्दिनोर दाहिर के मुताबिक, सोमालिया का यह फैसला दिसंबर में इजराइल की ओर से सोमालिलैंड को मान्यता दिए जाने से जुड़ा हुआ लगता है. सोमालिलैंड, सोमालिया के उत्तर-पश्चिम में स्थित एक ऐसा क्षेत्र है जिसने 1991 में खुद को अलग घोषित कर दिया था, लेकिन उसे अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं मिली है.
दाहिर ने अल जजीरा से कहा, कई सोमाली मानते हैं कि यूएई ने इजराइल की ओर से सोमालिलैंड को मान्यता दिलाने में भूमिका निभाई.
उन्होंने कहा, इसी वजह से सोमाली कैबिनेट का यह फैसला [समझौते रद्द करने का] यूएई के खिलाफ एक जवाबी कदम के तौर पर देखा जा रहा है. यूएई पर अफ्रीका में गैर-सरकारी सशस्त्र समूहों और अलगाववादी ताकतों का समर्थन करने का आरोप लगाया जाता है, जिनमें सूडान की अर्धसैनिक आरएसएफ भी शामिल है. हालांकि, अबू धाबी लंबे समय से इन आरोपों से इनकार करता रहा है कि वो सूडान की सेना के खिलाफ युद्ध में रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) को हथियार मुहैया करा रहा है.
UAE और सोमालिलैंड के रिश्ते
दिसंबर में यूएई ने सोमालिलैंड को इजराइल की ओर से मान्यता दिए जाने की निंदा करने वाले संयुक्त अरब-इस्लामिक बयान पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था. लेकिन, 7 जनवरी को उसने अफ्रीकी संघ के साथ एक संयुक्त बयान जारी कर सोमालिया की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, सुरक्षा और स्थिरता के समर्थन का वादा किया.
सोमालिया से अलग होने वाला सोमालिलैंड पिछले एक दशक में यूएई के लिए व्यापारिक और सुरक्षा निवेश का एक अहम केंद्र बनकर उभरा है. इसमें रणनीतिक बेरबेरा बंदरगाह पर यूएई की कंपनी डीपी वर्ल्ड को दिया गया 30 साल का ठेका भी शामिल है.
यमन के बाद सोमालिया का एक्शन
सोमालिया का यह कदम उन रिपोर्टों के कुछ ही दिन बाद सामने आया है, जिनमें कहा गया था कि दक्षिणी यमन के अलगाववादी समूह साउदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल के नेता ऐदारूस अल-जुबैदी 8 जनवरी को सोमालिलैंड के बेरबेरा बंदरगाह के जरिये यूएई पहुंचे थे. बताया गया कि उन्होंने रियाद में बातचीत के लिए सऊदी अरब के बुलावे को ठुकरा दिया था. इसके बाद सोमालिया की आव्रजन एजेंसी ने जांच शुरू करने का ऐलान किया. एजेंसी का कहना है कि सोमालिया के हवाई क्षेत्र और हवाई अड्डों का बिना अनुमति इस्तेमाल किया गया.
ईरान छोड़िए, खाड़ी में असली खेल तो यूएई के साथ हो गया…यमन के बाद सोमालिया से भगाए गए अमीराती
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