World News: नरक हो गया है लंदन… कभी अरबपतियों का घर कही जाती थी ब्रिटेन की राजधानी, अब क्यों मुंह मोड़ रहे हैं रईस लोग? – INA NEWS


ब्रिटेन की राजधानी लंदन नरक है. अरबपति जॉन फ्रेडरिकसन ने शहर को छोड़ने से पहले ये टिप्पणी की थी. इनकी गिनती ब्रिटेन के सबसे धनी लोगों में होती है. फ्रेडरिकसन उन अरबपतियों की सूची में शुमार हो गए हैं, जिन्होंने हाल के दिनों में लंदन को अलविदा कहा. ब्रिटेन छोड़ने वाले अन्य लोगों में अरबपति क्रिश्चियन एंगरमेयर और नासेफ साविरिस शामिल हैं, जिनमें से नासेफ साविरिस एस्टन विला फुटबॉल क्लब के मालिक हैं
फ्रेडरिकसन UAE शिफ्ट हो रहे हैं. नॉर्वे में जन्मे शिपिंग दिग्गज फ्रेडरिकसन लंदन में अपनी 300 साल पुरानी संपत्ति को भी बिक्री के लिए रख रहे हैं. फ्रेडरिकसन के जाने के बाद सवाल उठ रहा है कि आखिर रईसों का लंदन से मोह भंग क्यों हो गया है. जो शहर कभी अमीरों का घर होता था वो उनको रोक क्यों नहीं पा रहा है.
लंदन ने मॉस्को को भी छोड़ा पीछे
लंदन के अमीरों ने देश छोड़ने के मामले में रूस की राजधानी मॉस्को को भी पीछे छोड़ दिया है. यही वजह है कि दुनिया के टॉप 5 सबसे अमीर शहरों की लिस्ट से लंदन का नाम बाहर हो चुका है. न्यू वर्ल्ड हेल्थ और एडवाइजरी फर्म हेनली एंड पार्टनर्स के मुताबिक, दुनिया में सबसे अधिक सुपर रिच लोगों का पलायन लंदन से ही हो रहा है. केवल 2024 की ही बात करें, तो 10 लाख डॉलर से अधिक संपत्ति वाले करीब 11,300 मिलियनेयर ने लंदन छोड़ दिया.
लंदन 220,600 मिलियनेयर के साथ लॉस एंजिल्स से पीछे रह गया है, जिससे लंदन विश्व के सबसे धनी शहरों की सूची में छठे स्थान पर आ गया है. लंदन से रईसों के पलायन की वजह कोई एक नहीं है. आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक कारण इसकी वजह बन रहे हैं.
क्यों लंदन छोड़ रहे अरबपति?
लंदन में रहने वाले लोगों के लिए ज्यादा टैक्स एक बड़ी समस्या है. जाहिर है कि पलायन करने वाले लोग टैक्स में भी रियायत चाहते होंगे. लंदन से जाने वाले अमीर दुबई, पेरिस, जेनेवा, फ्रैंकपर्ट और एम्सटर्डम जैसे देशों में जाकर बस रह हैं, जहां टैक्स बेहद कम है. ब्रिटेन में दुनिया भर में सबसे ज़्यादा टैक्स है, खासकर एस्टेट ड्यूटी और कैपिटल गेन जैसे क्षेत्रों में. चूंकि ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था 2008 के वित्तीय संकट से पूरी तरह उबर नहीं पाई है, इसलिए अमीर नागरिक बेहतर आर्थिक संभावनाओं वाले क्षेत्रों की तलाश कर रहे हैं. एक जमाने में लंदन का स्टॉक एक्सचेंज दुनिया का सबसे बड़ा बाजार हुआ करता था. लेकिन अब यह 11वें स्थान पर है. पाउंड की कीमत भी लगातार गिर रही है.
ब्रेक्सिट ने भी लंदन को नुकसान पहुंचाया है, क्योंकि अब यह पहले की तरह यूरोपीय संघ के बाज़ारों में प्रवेश के लिए खुला नहीं है. समृद्ध वर्ग के अधिकांश सदस्यों के लिए, इसने ब्रिटेन में अपने निवास स्थान का पुनर्मूल्यांकन किया है, खासकर जब उनकी तुलना यूरोपीय संघ के उन अन्य शहरों से की जाए जो सुरक्षित व्यापारिक संबंध प्रदान करते रहते हैं.
मिलियनेयर के पलायन का एक और कारण प्रौद्योगिकी उद्योग में अमेरिका और एशिया का बढ़ता प्रभुत्व है. सिंगापुर, सिलिकॉन वैली और अन्य प्रमुख तकनीकी केंद्र अब धन सृजन के केंद्र बन गए हैं. खासकर तकनीकी उद्यमियों के लिए.
लंदन में इतना पैसा कैसे?
लंदन की अरबपति आबादी में विविध पृष्ठभूमि और उद्योगों से आने वाले लोग शामिल है. कई लोगों ने वित्त, प्रौद्योगिकी, रियल एस्टेट जैसे उद्योगों में कंपनियां स्थापित करके अपनी संपत्ति बनाई है. लंदन का स्टार्टअप इकोसिस्टम और वैश्विक कनेक्टिविटी इसे व्यावसायिक सफलता के लिए एक प्रमुख स्थान बनाते हैं. उच्च आय वाले बैंकर, हेज फंड मैनेजर और पर्सनल इक्विटी ऑफिसर अरबपति वर्ग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं.
पीढ़ीगत संपत्ति एक प्रमुख भूमिका निभाती है, क्योंकि लंबे समय से स्थापित ब्रिटिश परिवार निवेश के माध्यम से वित्तीय प्रभाव बनाए रखते हैं. एक महानगरीय राजधानी के रूप में लंदन का दर्जा यूरोप, मध्य पूर्व, एशिया और उत्तरी अमेरिका के धनी व्यक्तियों को आकर्षित करता है. कई लोग इस शहर को इसकी वित्तीय स्थिरता, कानूनी व्यवस्था और उच्च-स्तरीय शिक्षा तक पहुंच के लिए चुनते हैं.
2025 तक लंदन में 36 अरबपति होंगे जो पिछले साल के 89 अरबपतियों से थोड़ी कम है. इस विशिष्ट समूह में लंबे समय से धनी परिवार और समकालीन उद्योगों से लाभ कमाने वाले स्व-निर्मित उद्योगपति, दोनों शामिल हैं.
नरक हो गया है लंदन… कभी अरबपतियों का घर कही जाती थी ब्रिटेन की राजधानी, अब क्यों मुंह मोड़ रहे हैं रईस लोग?
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