World News: जंग पर मनीष झा की ग्राउंड रिपोर्ट: ओमान ईरान के प्रकोप से बचा, दुबई की चमक पर सबसे बड़ी चोट – INA NEWS

ईरान और अमेरिका के बीच जिस मुल्क ने बातचीत की कोशिश की थी वो ओमान था. इस वक्त मैं ओमान की राजधानी मस्कट में मौजूद हूं. मध्य पूर्व के लगभग सभी देशों से लोग सुरक्षित ठिकाने की तलाश में मस्कट भाग कर आ रहे हैं. हालांकि यहां भी ईरानी ड्रोन आए थे लेकिन फिलहाल ओमान कमोबेश ईरान के प्रकोप से अभी बचा हुआ है.

मध्य पूर्व की यह आग जल्दी बुझने वाली नहीं है

पिछले चार वर्षों में मैंने रूसयूक्रेन की बर्फीली सरहदों से लेकर इसराइलहमास और इसराइलईरान टकराव ( जून 2025) समेत कई युद्ध को अपनी आंखों से देखा है लेकिन इस बार के खाड़ी युद्ध की कहानी एकदम अलग है. इस बार पूरा मध्य पूर्व एक साथ जल रहा हैं और इस तपिश के बीच मैं मस्कट और दुबई के बीच डोल रहा हूं.

मस्कट इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर खड़े विमानों को देखकर पहली बार लगा कि उड़ानें सिर्फ तकनीक से नहीं, भरोसे से भी उड़ती हैं और इस समय यह भरोसा बुरी तरह डगमगाया हुआ है. मध्य पूर्व के लगभग सभी एयरपोर्ट पिछले कुछ दिनों से बेजान पड़े हैं. हजारों फ्लाइट कैंसिल हो चुकी है, लागों लोग बदहवास है और अरबों रुपये रोजाना अरब सागर के गर्त में जा रहा है.

दुबई की चमक पर सबसे बड़ी चोट

दो साल पहले इजराइल जाने के दौरान दुबई में Burj Khalifa के पास बैठा सोच रहा था कि दुबई और Doha की जीवनशैली तेल अवीव से कितनी मिलती है और तेहरान से कितनी विपरीत है! हालांकि तब ईरान और इन देशों के बीच युद्ध की कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था. आज हालत यह है कि 4 मार्च को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के विदेश मंत्रालय के बयान में यह दर्द छलक आया कि ईरान ने 28 फरवरी से लेकर अब तक UAE पर एक हजार से अधिक हमले किए हैं जो मध्य पूर्व के बाकी देशों पर ईरानी हमलों की कुल संख्या से भी अधिक है.

UAE का कहना है कि ईरान ऐसा तब कर रहा है जब ईरान पर हमले के लिए UAE ने अपनी जमीन, आसमान या पानी का इस्तेमाल तक नहीं होने दिया. दुबई के एयरपोर्ट से लेकर बुर्ज खलीफा बिल्डिंग और अल -जुमैरा होटल तक सभी टारगेट किए जा रहे हैं. ड्रोन और मिसाइलों ने युद्ध की परिभाषा बदल दी है. खाड़ी देशों की स्थिरता जो इसकी असली ताकत थी, अब सवालों के घेरे में है.

ईरान की रणनीति: लंबी लड़ाई, अमेरिका पर दबाव

Iran इस युद्ध को जल्द खत्म नहीं करना चाहता. कम लागत वाले ड्रोन, महंगे एयर डिफेंस को चुनौती दे रहे हैं. कुछेक हजार डॉलर के एक एक ड्रोन को खत्म करने में मिलियन डॉलर के एयर डिफेंस मिसाइल खर्च हो रहे हैं जबकि ड्रोन बिल्कुल मच्छरों की तरह रेगिस्तान के ऊपर मंडरा रहे हैं.

रणनीति पूरी तरह साफ है –

युद्ध लंबा खिंचेगा तो अमेरिका समर्थित ढांचे पर दबाव बढ़ेगा. हर वह ड्रोन जो इंटरसेप्शन से बच निकलता है, केवल नुकसान नहीं करता बल्कि वह अमेरिकी सुरक्षा गारंटी की प्रतिष्ठा पर भी चोट करता है.

जमीन पर डर, आसमान में अनिश्चितता

मैंने कई यात्रियों से बात की. किसी का बिजनेस रुका है, कोई परिवार को लेकर चिंतित है, कोई जल्दी निकल जाना चाहता है. दुबई से मस्कट आ रहे लोग कह रहे हैं कि कम से कम यहां से फ्लाइट तो मिल रही है. Oman फिलहाल संतुलन का द्वीप लगता है, लेकिन यह भी उसी समुद्र का हिस्सा है जहाँ लहरें तेज हो चुकी हैं.

भारत के लिए खतरे की घंटी?

यह युद्ध हमसे दूर नहीं है. खाड़ी में 80 लाख से अधिक भारतीय खाड़ी देशों में काम करते हैं. यदि हालात बिगड़ते हैं तो इसका सीधा असर इन लोगों के रोजगार पर होगा जिसका सीधा प्रभाव भारत को मिल रहे रेमिटेंस में बड़ी गिरावट के रूप में दिखेगा. भारत सरकार को बड़े स्तर पर संभावित निकासी अभियान करना पड़ा तो वो एक अलग किस्म की चुनौती होगी.
भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा भी यहीं से आता है. युद्ध लंबा खिंचा तो पेट्रोल-डीज़ल की कीमतें और महंगाई पर दबाव तय है. मध्य पूर्व हमारे लिए यूरोप और अफ्रीका का प्रवेश द्वार है. यहां अस्थिरता का मतलब सप्लाई चेन पर असर.

मस्कट: तूफान के बीच ठहराव?

मस्कट की सड़कों पर फिलहाल दुबई से लेकर रियाद से आ रहे लोगों की भीड़ है. तेजी से यहां आने या UAE-सऊदी अरब जाने वाले लोगों के लिए किराया बढ़ता जा रहा है. बाजारों में एक अलग किस्म की रौनक आ गई है जो आपदा में अवसर की कहानी सुना रही है. कैफे खुले हैं लेकिन बातचीत में बस युद्ध की चर्चा है. मोबाइल स्क्रीन पर अलर्ट की भरमार हैं.

यह सिर्फ मिसाइलों और ड्रोन का युद्ध नहीं है. यह प्रतिष्ठा, अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय संतुलन की लड़ाई है. मैं मस्कट में हूं यहां से मध्य पूर्व के अलग अलग हिस्सों में जाऊंगा ताकि इस महायुद्ध की परतें समझ सकूं , लोगों की आवाज सुनने और सच को आप तक पहुंचाने का मिल सके. युद्ध सिर्फ मोर्चे पर नहीं लड़ा जाता वह एयरपोर्ट, बाजार, और आम लोगों की धड़कनों में भी लड़ा जाता है.

जंग पर मनीष झा की ग्राउंड रिपोर्ट: ओमान ईरान के प्रकोप से बचा, दुबई की चमक पर सबसे बड़ी चोट


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