World News: न अमेरिका, न चीन…साइलेंट तरीके से बांग्लादेश में सऊदी बढ़ा रहा अपना दबदबा – INA NEWS


बांग्लादेश में यूनुस सरकार के गठन के बाद से ही अमेरिका, चीन, पाकिस्तान और तुर्की जैसे देश अपना दबदबा बढ़ाने में जुटा है. अमेरिका और चीन को आंशिक सफलता भी मिली है, लेकिन अब तक सबसे बड़ी बाजी सऊदी अरब ने मारी है. वो भी साइलेंट तरीके से. दिलचस्प बात है कि इस काम के लिए सऊदी ने बांग्लादेश सरकार से किसी तरह का डील भी नहीं किया.
भारत के पड़ोस में स्थित बांग्लादेश की 18 करोड़ आबादी है. यहां 90 फीसद से ज्यादा मुसलमान रहते हैं. 1971 में पाकिस्तान से अलग होकर बांग्लादेश की स्थापना हुई थी.
क्यों मजबूत हो रही है सऊदी की पकड़?
बांग्लादेश में पिछले एक साल में दरगाह और मंदिरों पर हमले की 250 से ज्यादा घटना घटित हुई है. दरगाह और मंदिरों पर अटैक के लिए स्थानीय स्तर पर वहाबी समुदाय को जिम्मेदार माना जा रहा है. ढाका के आसपास कई जगहों पर इस समुदाय से जुड़े लोगों पर मुकदमे भी दर्ज किए गए हैं.
दूसरे संप्रदाय के लोग भी वहाबियों को लगातार रडार पर ले रहे हैं. कहा जा रहा है कि बांग्लादेश में जो कट्टरपंथ को बढ़ावा मिल रहा है, उसके पीछे वहाबी हैं. इन वहाबियों को सऊदी अरब से ही फंड मिलता है. सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने 2018 में खुले तौर पर वहाबियों को फंड देने की बात कही थी.
ऐसे में वहाबी जिस तरीके से मजबूत हो रहे हैं, उससे आने वाले वक्त में सऊदी को इसका सीधा फायदा हो सकता है. क्योंकि वहाबी समुदाय के लोग सऊदी से ही ट्रेनिंग लेकर आते हैं. फिर अपने यहां इस संप्रदाय को आगे बढ़ाने का काम करते हैं.
बांग्लादेश में वहाबी अल्पसंख्यक हैं. बांग्लादेश में देवबंद और सूफी मुसलमानों की संख्या ज्यादा है.
सवाल- आखिर वहाबी हैं कौन?
इस्लाम धर्म में वहाबी एक परंपरा है, जो खुद को अब्दुल वहाब नजदी के अनुयायी मानते हैं. 18वीं शताब्दी में मक्का में इस्लामी विद्वान अब्दुल वहाब नजदी ने एक आंदोलन की शुरुआत की थी. वहाब का जन्म 1703 में सऊदी के नज्द प्रांत में हुआ था. वहाबी इस्लाम के सबसे कठोर संस्करण का पालन करते हैं.
वहाब को मानने वाले कब्र, इबादत और मजार पर भरोसा नहीं करते हैं. वहाब के लोग सिर्फ पैगंबर साहेब से जुड़े हुए जगहों को ही मान्यता देते हैं. सऊदी में जब वहाब आंदोलन उफान पर था, तो सैकड़ों कब्रों और स्मारकों को तोड़ दिया गया था.
वहाब मानने वाले लोग इस्लाम के भीतर किसी भी प्रकार के रहस्यवाद या संतों की विशेष शक्तियों पर विश्वास नहीं करते हैं.
न अमेरिका, न चीन…साइलेंट तरीके से बांग्लादेश में सऊदी बढ़ा रहा अपना दबदबा
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