World News: जापान में अब नहीं दिखाई देंगे पांडा, 50 साल बाद ऐसा होने की वजह क्या है? – INA NEWS


जापान के टोक्यो स्थित यूएनो चिड़ियाघर में रविवार को पांडा प्रेमियों ने आखिरी बार ट्विन पांडा शियाओ शियाओ और लेई लेई को देखा. दोनों पांडा 27 जनवरी को चीन लौट रहे हैं. इनके जाने के बाद जापान में लगभग 50 साल में पहली बार कोई पांडा नहीं रहेगा. टोक्यो और बीजिंग के बीच कूटनीतिक तनाव के कारण नए पांडा आने की संभावना कम है. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन से नए पांडा भेजने को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा, ‘मुझे पता है कि वहां पांडा बहुत पसंद किए जाते हैं. जापानी लोग चीन आकर पांडा देख सकते हैं.’
चीन ने जापान को पहली बार 1972 में पांडा गिफ्ट किए थे. यह गिफ्ट दोनों देशों के रिश्ते सामान्य करने के लिए था. पांडा तुरंत जापानी लोगों के दिलों में घर कर गए. इसके बाद आए पांडा भी जापान में लोकप्रिय रहे हैं. यूएनो चिड़ियाघर ने हर दर्शक को सिर्फ एक मिनट के लिए पांडा देखने की परमिशन दी, फिर भी पांडा देखने आए लोगों की भीड़ बहुत बड़ी थी. लोगों ने पांडों की हर गतिविधि रिकॉर्ड करने की कोशिश की.
जापान-चीन के बीच तनाव
हाल के महीनों में जापान और चीन के बीच तनाव बढ़ा है. इसकी वजह है ताइवान को लेकर जापानी प्रधानमंत्री साना ताकाएची का दिया बयान. ताकाएची ने कहा था कि अगर ताइवान पर हमला हुआ तो जापान दखल दे सकता है. इसके बावजूद पांडा जापान में बेहद लोकप्रिय हैं. जापानी लोग चाहते हैं कि पांडा जल्द लौटें और यूएनो चिड़ियाघर में खुशियों का माहौल वापस आए.
पांडा जापानी संस्कृति और लोगों के जीवन का हिस्सा बन चुके हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर पांडा कई सालों तक जापान नहीं आए, तो इससे हर साल करीब 20 अरब येन (लगभग 128 मिलियन डॉलर) का आर्थिक नुकसान हो सकता है.
चीन की पांडा डिप्लोमेसी
चीन ने 1970 के दशक में अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे पश्चिमी देशों को भी पांडा उपहार में दिए थे. बाद में 1980 के दशक में चीन ने पांडा देने की नीति बदली और उन्हें स्थायी रूप से देने के बजाय किराये पर देना शुरू किया. इसके तहत विदेशों के चिड़ियाघरों को हर साल तय फीस देनी होती है, जो पांडा संरक्षण और साइंटिफिक रिसर्च में इस्तेमाल होता है.
चीन पांडा दूसरे देशों को देता जरूर है, लेकिन उनका मालिकाना हक अपने पास ही रखता है. पांडा से पैदा होने वाले बच्चे भी चीन के ही माने जाते हैं. यूएनो चिड़ियाघर में शाओ शाओ और उसकी बहन लेई लेई का जन्म साल 2021 में हुआ था. पांडा चीन की कूटनीति का हिस्सा हैं. चीन उन्हें उपहार या लीज पर भेजता है.
जापान में अब नहीं दिखाई देंगे पांडा, 50 साल बाद ऐसा होने की वजह क्या है?
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