World News: BRICS को बर्बाद करने की तैयारी, यूं ही नहीं इन 5 देशों पर कंट्रोल चाहता है अमेरिका – INA NEWS


अमेरिका ने 3 जनवरी 2026 को वेनेजुएला पर हमला किया और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर अमेरिका ले गए. यह हमला कई महीनों की योजना के बाद किया गया. अब ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अमेरिका वेनेजुएला को तब तक चलाएगा जब तक वहां नई सरकार नहीं बन जाती. वेनेजुएला के बाद ट्रंप ने 5 देशों को लेकर खुलकर धमकी या संकेत दिए हैं. ट्रंप के नए प्लान के तहत मेक्सिको, ग्रीनलैंड, क्यूबा, कोलंबिया और ईरान अमेरिका के निशाने पर हैं. क्या ये ब्रिक्स देशों के लिए खतरे की घंटी है…
अमेरिका के निशाने पर ये 5 देश
1. कोलंबिया
ट्रंप ने कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेत्रो को बीमार आदमी बताया और कहा कि वह कोकेन बनाते और अमेरिका को बेचते हैं. जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वेनेजुएला जैसा ऑपरेशन कोलंबिया में भी होगा, तो उन्होंने कहा- मुझे यह बात अच्छी लग रही है.
2. क्यूबा
वेनेजुएला में अमेरिकी ऑपरेशन के दौरान 32 क्यूबाई सैनिक मारे गए. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि क्यूबा की सरकार बड़ी मुसीबत में है. हालांकि ट्रंप ने कहा कि क्यूबा खुद ही गिर जाएगा, हमें सैन्य कार्रवाई करने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी.
3. ग्रीनलैंड
ट्रंप ने दोहराया कि अमेरिका को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड चाहिए. उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड के तटों पर रूसी और चीनी जहाज घूम रहे हैं. हालांकि डेनमार्क ने ट्रंप के बयान का विरोध किया है.
4. ईरान
ईरान में बढ़ती महंगाई और खराब आर्थिक हालत को लेकर सरकार के खिलाफ लगभग एक हफ्ते से प्रदर्शन जारी है. ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान प्रदर्शनकारियों को मारता है, तो अमेरिका बहुत सख्ती से हमला करेगा. उन्होंने कहा कि हम तैयार हैं.
5. मेक्सिको
ट्रंप ने कहा कि मेक्सिको को अपने आप को संभालना होगा और कुछ तो करना ही होगा. अपनी हरकतें सुधारनी होगी और ड्रग्स तस्करी से बेहतर ढंग से निपटना होगा. ट्रंप ने कहा कि उन्होंने कई बार मेक्सिको को अमेरिकी सेना की पेशकश की है. हालांकि उन्होंने मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम को अच्छा इंसान बताया.
व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर की पत्नी कैटी मिलर ने ग्रीनलैंड का यह नक्शा 4 जनवरी को सोशल मीडिया पर शेयर किया था. इसमें ग्रीनलैंड अमेरिकी झंडे के रंग में रंगा हुआ है.
BRICS देशों ने क्या प्रतिक्रिया दी?
वेनेजुएला पर हमले के बाद BRICS देशों ने प्रतिक्रिया दी है. ब्राजील के राष्ट्रपति लूला ने अमेरिकी हमले को खतरनाक मिसाल बताया. उन्होंने कहा यह लैटिन अमेरिका के इतिहास के सबसे बुरे दखल जैसा है. रूस ने इसे सशस्त्र आक्रामकता बताया. रूस युद्ध में फंसा है और सीधे कुछ नहीं कर सकता. चीन ने कहा यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है. हालांकि भौगोलिक दूरी के कारण चीन की कैरैबियन सी में पहुंच सीमित है. भारत ने वेनेजुएला के घटनाक्रम पर गहरी चिंता जाहिर की. विदेश मंत्रालय ने सभी पक्षों से बातचीत और शांतिपूर्ण तरीके से समस्या सुलझाने की अपील की.
इन देशों पर कंट्रोल से क्या होगा?
वेनेजुएला की घटना BRICS के लिए गंभीर चुनौती है. वेनेजुएला ब्रिक्स के दो बड़े देशों रूस और चीन का करीबी साथी था. अगर अमेरिका वेनेजुएला पर नियंत्रण करता है, तो उसकी पहुंच ब्राजील की सीमा तक हो जाएगी. वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है. अब यह अमेरिकी कंपनियों के हाथ में जा सकता है. रूस युद्ध में फंसा है, चीन इतनी दूर कुछ नहीं कर सकता. ब्राजील और भारत सीधे टकराव से बचने की कोशिश करेंगे.
क्या दुनिया का नक्शा बदल जाएगा?
ट्रंप ने 19वीं सदी के मोनरो सिद्धांत को फिर से लागू करने की बात कह चुके हैं. इसके तहत पश्चिमी गोलार्ध को अमेरिका का प्रभाव क्षेत्र माना जाता है. मुनरो डॉक्ट्रिन अमेरिका की विदेश नीति है, जिसे 1823 में राष्ट्रपति जेम्स मुनरो ने घोषित किया था. इसके तहत कहा गया कि यूरोपीय देश अब अमेरिका महाद्वीप के किसी भी हिस्से में नया उपनिवेश नहीं बनाएंगे और न ही दखल देंगे. बदले में अमेरिका यूरोप के आंतरिक मामलों से दूर रहेगा.
BRICS जैसे संगठनों की ताकत कमजोर पड़ सकती है और एक अमेरिका-केंद्रित विश्व व्यवस्था फिर से उभर सकती है. यानी बदलाव नक्शे में नहीं, बल्कि दुनिया को चलाने के तरीके में होगा.
इन 5 देशों पर कंट्रोल से क्या हासिल होगा?
अगर ये 5 देश अमेरिकी नियंत्रण में आते हैं. तो वेनेजुएला का तेल, ग्रीनलैंड के खनिज संसाधन पर इसकी पकड़ हो जाएगी. ग्रीनलैंड से आर्कटिक पर नियंत्रण, वेनेजुएला से दक्षिण अमेरिका में पैठ बनाना और चीन-रूस को दूर रखने की रणनीति कामयाब होगी. ईरान पर पकड़ से अमेरिका को दुनिया के अहम तेल भंडार और समुद्री रास्तों पर नियंत्रण मिलेगा. कोलंबिया और क्यूबा पर प्रभाव से अमेरिका लैटिन अमेरिका और कैरिबियन क्षेत्र में अपनी सुरक्षा मजबूत कर सकेगा और रूस-चीन की मौजूदगी को सीमित कर पाएगा. यानी लैटिन अमेरिका और आर्कटिक में चीन-रूस का प्रभाव खत्म होगा.
ब्रिक्स पर असर: क्या संगठन कमजोर हो जाएगा?
ट्रंप की यह रणनीति पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिकी वर्चस्व को फिर से स्थापित करने की कोशिश है. यानी मोनरो सिद्धांत की वापसी. इससे ब्रिक्स कमजोर हो सकता है क्योंकि रूस और चीन अपने करीबी सहयोगी को खोने के बावजूद कुछ नहीं कर सके. ब्रिक्स के कमजोर होने से वैकल्पिक विश्व व्यवस्था का सपना टूटेगा. अगले कुछ महीनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि दुनिया की शक्ति संतुलन कैसे बदलता है.
BRICS को बर्बाद करने की तैयारी, यूं ही नहीं इन 5 देशों पर कंट्रोल चाहता है अमेरिका
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