World News: कतर की वो गलती जिस पर भड़का तालिबान, बदलना पड़ा सीजफायर पर बयान – INA NEWS

World News: कतर की वो गलती जिस पर भड़का तालिबान, बदलना पड़ा सीजफायर पर बयान – INA NEWS

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के हमलों के बाद एक बार फिर डूरंड लाइन सुर्खियों में आ गई है. इसी लाइन के पास दोनों देशों के बीच झड़प हुई. इस लाइन को अफगानिस्तान बॉर्डर नहीं मानता है. इसी के बाद युद्धविराम पर कतर की ओर से जारी बयान में डूरंड रेखा (Durand Line) को सीमा (border) कहे जाने से अफगान अधिकारियों ने नाराजगी जताई. जिसके बाद कतर को संशोधित बयान जारी करना पड़ा.

अब इसी डूरंड लाइन को लेकर अफगानिस्तान के रक्षा मंत्री का बयान सामने आया है. टोलो न्यूज के मुताबिक, इस्लामिक अमीरात अफगानिस्तान के रक्षा मंत्री मौलवी मोहम्मद याकूब मुजाहिद ने कहा कि समझौते में कहीं भी डूरंड काल्पनिक रेखा (Durand Hypothetical Line) का जिक्र नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि यह मुद्दा दो देशों के बीच का है.

कतर ने क्यों बदला बयान

पहले बयान में कतर ने कहा था, विदेश मंत्रालय को उम्मीद है कि यह अहम कदम दोनों भाईचारे वाले देशों के बीच सीमा पर तनाव को खत्म करने में मदद करेगा और क्षेत्र में स्थायी शांति की मजबूत नींव रखेगा.
यही सीमा शब्द अफगान पक्ष को आपत्तिजनक लगा, क्योंकि अफगानिस्तान आधिकारिक रूप से डूरंड रेखा को पाकिस्तान के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा के रूप में मान्यता नहीं देता.

हालांकि, बाद में कतर ने अपने बयान में बदलाव करते हुए दोनों भाईचारे वाले देशों के बीच सीमा पर वाली बात को हटा दिया. संशोधित बयान में कहा गया, विदेश मंत्रालय ने उम्मीद जताई कि यह अहम कदम दोनों भाईचारे वाले देशों के बीच तनाव को खत्म करने में मदद करेगा और क्षेत्र में स्थायी शांति की मजबूत नींव रखेगा. इस बदलाव के जरिए कतर ने डूरंड रेखा को सीमा कहने वाले हिस्से को हटा दिया, ताकि अफगानिस्तान की नाराजगी को कम किया जा सके और बयान को अधिक तटस्थ बनाया जा सके.

तुर्की में होगी अगली बैठक

इसी के साथ पाकिस्तान के हमले को लेकर उन्होंने कहा, किसी को भी अफगानिस्तान की संप्रभुता (sovereignty) का उल्लंघन करने या देश की सुरक्षा को खतरे में डालने की अनुमति नहीं दी जाएगी. कतर के बाद अब पाक और अफगानिस्तान के बीच सीजफायर की बैठक तुर्की में होने वाली है. उस बैठक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, वहां वर्तमान समझौते के लागू होने की प्रक्रिया पर चर्चा की जाएगी.

हमला हुआ तो तालिबान देगा जवाब

इस सवाल पर कि क्या पाकिस्तान दोबारा हमला नहीं करेगा या समझौते का उल्लंघन नहीं करेगा, मुजाहिद ने कहा, पाकिस्तान ने दो अन्य देशों की मौजूदगी में अपना वादा किया है. उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान कोई हमला करता है, तो अफगानिस्तान भी उसका जवाब समान रूप से देगा. मुजाहिद ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने अफगान हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया और इस पर अफगानिस्तान ने पाकिस्तान की सैन्य सरकार को सख्त जवाब दिया.

फिर से सामान्य होगा व्यापार

अफगान रक्षा मंत्री ने बताया कि समझौते के तहत दोनों देशों के बीच व्यापार फिर से सामान्य हो जाएगा. उन्होंने दोहराया कि अफगानिस्तान एक स्वतंत्र देश के रूप में पाकिस्तान सहित सभी देशों के साथ अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर सकारात्मक संबंध बनाए रखता है.

अफगान शरणार्थियों के मुद्दे पर उन्होंने कहा, हमने अफगान शरणार्थियों की स्थिति पर चर्चा की और जोर दिया कि उनके साथ मानवीय व्यवहार किया जाए.

क्या है डूरंड रेखा?

डूरंड रेखा की स्थापना 1893 में हिंदूकुश क्षेत्र में की गई थी, जो जनजातीय इलाकों के रास्ते अफगानिस्तान और ब्रिटिश भारत को जोड़ती थी. यह रेखा 19वीं सदी के ग्रेट गेम की विरासत है. जो रूस और ब्रिटिश साम्राज्य के बीच शक्ति संघर्ष था. उस समय ब्रिटेन ने अफगानिस्तान को रूस के विस्तारवाद को रोकने के लिए एक बफर जोन के रूप में इस्तेमाल किया.

1893 में ब्रिटिश अधिकारी सर हेनरी मॉर्टिमर डूरंड और अफगान शासक अमीर अब्दुर रहमान के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर हुए. इसी समझौते के तहत इस रेखा को चिन्हित किया गया, जो बाद में डूरंड लाइन के नाम से जानी गई.

अब्दुर रहमान 1880 में अफगानिस्तान के शासक बने, दो साल बाद जब दूसरा एंग्लो-अफगान युद्ध खत्म हुआ और ब्रिटिशों ने अफगान साम्राज्य के कुछ हिस्सों पर नियंत्रण पा लिया. डूरंड समझौते के जरिए ब्रिटिश भारत और अफगानिस्तान के प्रभाव क्षेत्रों की सीमाएं तय की गईं.

सात अनुच्छेदों वाले इस समझौते में लगभग 2,670 किलोमीटर लंबी रेखा को मान्यता दी गई थी, जो चीन की सीमा से लेकर अफगानिस्तान-ईरान सीमा तक फैली है.

अफगानिस्तान नहीं मानता बॉर्डर

1947 में भारत की आजादी के बाद पाकिस्तान ने डूरंड रेखा को विरासत में पाया. इसके साथ ही उसने उस ऐतिहासिक विवाद को भी विरासत में लिया जिसमें पश्तून समुदाय इस रेखा को अस्वीकार करता रहा और अफगानिस्तान ने इसे कभी आधिकारिक सीमा के रूप में मान्यता नहीं दी.

इस्लामाबाद डूरंड रेखा को अंतरराष्ट्रीय सीमा के रूप में मान्यता देता है, लेकिन अफगानिस्तान ऐसा करने से इंकार करता है. अफगानिस्तान की सभी सरकारों ने — जिसमें तालिबान भी शामिल है — इसे एक आर्टिफिशियल रेखा बताया है, जो पश्तून जनजातीय इलाकों को दो हिस्सों में बांटती है और अफगान संप्रभुता को कमजोर करती है.

हाल के सालों में यह लाइन दोनों देशों के बीच तनाव का बड़ा कारण बनी हुई है. पाकिस्तान ने इस पर बाड़ लगाना शुरू किया, जबकि अफगान सुरक्षा बलों ने कई बार उस बाड़ को तोड़ा. जहां अफगानिस्तान इस रेखा को औपनिवेशिक विरासत मानता है, वहीं पाकिस्तान के लिए यह अपनी क्षेत्रीय अखंडता का मामला है.

कतर की वो गलती जिस पर भड़का तालिबान, बदलना पड़ा सीजफायर पर बयान

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