World News: सऊदी-US में होने जा रही है ऐसी डील कि बैठे-बिठाए पाकिस्तान को मिल जाएगा फायदा – INA NEWS

World News: सऊदी-US में होने जा रही है ऐसी डील कि बैठे-बिठाए पाकिस्तान को मिल जाएगा फायदा – INA NEWS

सऊदी अरब और अमेरिका के बीच रक्षा समझौते को लेकर बातचीत चल रही है. इस रक्षा समझौते का मकसद दोनों देशों के बीच सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करना है. फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार, यह डील अगले महीने हो सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक, अगले महीने यह डील तब साइन हो सकती है जब सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) व्हाइट हाउस का दौरा करेंगे.

फिलहाल इसकी डिटेल्स पूरी तरह तय नहीं हुई है, लेकिन बातचीत अभी जारी है. जहां एक तरफ अमेरिका और सऊदी के बीच डिफेंस डील को लेकर बातचीत चल रही है. वहीं, अगर यह डील हो जाती है तो इससे पाकिस्तान को भी फायदा हो सकता है. पाकिस्तान को क्या संभावित फायदा हो सकता है यह समझने से पहले समझते हैं कि आखिर अमेरिका और सऊदी के बीच होने वाली डील क्या है.

क्या है सऊदी-US के बीच की डील?

इस नई रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब और अमेरिका के बीच जो रक्षा समझौता (Defence Deal) तैयार हो रहा है, वो अमेरिकाकतर डील जैसा हो सकता है. डील में क्या-क्या होगा?

  1. सऊदी-अमेरिका डिफेंस गारंटी- इस प्रस्तावित समझौते के तहत अमेरिका सऊदी अरब को सुरक्षा गारंटी (security guarantee) देगा. लेकिन यह औपचारिक डिफेंस ट्रीटी (defense treaty) नहीं होगी — क्योंकि अमेरिकी संविधान के तहत ऐसा समझौता सीनेट की मंजूरी के बिना पारित नहीं हो सकता, और फिलहाल उसके लिए पर्याप्त समर्थन नहीं है.
  2. यह कार्यकारी आदेश (executive order) के जरिए लागू किया जाएगा, जैसा अमेरिका ने कतर के साथ किया था.

हथियार और सुरक्षा

  1. सऊदी अरब इस समझौते के साथ F-35 फाइटर जेट्स और अन्य एडवांस हथियारों की बड़ी खरीद भी करना चाहता है.
  2. यह कदम सऊदी को सऊदी को मजबूत करेगा. साथ ही यह अमेरिका को अरब दुनिया में एक मुख्य सुरक्षा साझेदार बनाए रखेगा.

राजनयिक और रणनीतिक तैयारियां

  1. सऊदी रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान (KBS) वाशिंगटन पहुंचे थे, जहां उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हगसेथ और व्हाइट हाउस दूत स्टीव विटकॉफ से मुलाकात की.
    इन बैठकों में सामरिक सहयोग बढ़ाने, क्षेत्रीय स्थिरता पर चर्चा हुई.
  2. इससे पहले सऊदी अर्थव्यवस्था और ऊर्जा मंत्री भी वाशिंगटन गए थे — यानी क्राउन प्रिंस की यात्रा से पहले तैयारी चल रही है.

पिछले समझौते और निराशा

  1. मई में ट्रंप की सऊदी यात्रा के दौरान कई बड़े समझौते घोषित किए गए थे, लेकिन उनमें से ज्यादातर लागू नहीं हुए.
  2. सऊदी इस बात से निराश था कि बहुत कुछ सिर्फ कागज पर ही रह गया— इसलिए इस बार वो ठोस सुरक्षा गारंटी और हथियार समझौते पर जोर दे रहे हैं.

इजराइलसऊदी संबंध

  1. अब जब गाजा युद्ध खत्म हो चुका है, अमेरिका फिर से सऊदीइजराइल वार्ता शुरू करना चाहता है.
  2. ट्रंप प्रशासन चाहता है कि नेतन्याहू बड़ी तस्वीर देखें और सऊदी के साथ शांति समझौते की दिशा में कदम बढ़ाएं
  3. लेकिन, सबसे बड़ा मतभेद यह है कि सऊदी अरब फिलिस्तीनी राज्य की ठोस रूपरेखा की मांग कर रहा है, जबकि नेतन्याहू इससे सख्त विरोध करते हैं. इसलिए, फिलहाल सामान्यीकरण अभी भी दूर की बात लगती है.

पाकिस्तान को क्या फायदा होगा?

पाकिस्तान और सऊदी के बीच पहले से ही समझौता हुआ है. समझौते के तहत पाकिस्तान पर हमला सऊदी पर हमला माना जाएगा. इसी के तहत अगर अब सऊदी और अमेरिका के बीच समझौता होता है तो इसका डायरेक्ट और इनडायरेक्ट रूप से पाकिस्तान को फायदा मिल सकता है.

  1. सऊदी की सुरक्षा गारंटी- पाकिस्तान पहले से सऊदी के साथ mutual defense pact में है. अगर अमेरिका सऊदी को सुरक्षा गारंटी देता है, तो पाकिस्तान को अप्रत्यक्ष अमेरिकी सुरक्षा छाया का लाभ मिल सकता है.
  2. हथियार सौदों में सहयोग की संभावना- सऊदी अरब के पास पाकिस्तान के सैन्य उद्योग (जैसे JF-17 प्रोजेक्ट, प्रशिक्षण, ड्रोन तकनीक) से गहरा संपर्क है. अमेरिकी हथियारों के बाद सऊदी की तकनीकी मांगें और सहायक अनुबंध (sub-contracts) पाकिस्तान के रक्षा उद्योग को नए अवसर दे सकते हैं.
  3. राजनयिक प्रभाव- पाकिस्तान सऊदीअमेरिका संबंधों के जरिए वॉशिंगटन तक अप्रत्यक्ष पहुंच बना सकता है.

सऊदी-US में होने जा रही है ऐसी डील कि बैठे-बिठाए पाकिस्तान को मिल जाएगा फायदा

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