World News: सितंबर का महीना नेतन्याहू के लिए इम्तिहान जैसा क्यों होगा? 4 प्वाइंट में समझिए – INA NEWS


इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए सितंबर का महीना आसान नहीं होने वाला. वजह है कई बड़े घटनाक्रम, जो इजराइल की राजनीति और कूटनीति को झकझोर सकते हैं. इसी महीने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा होने जा रही है, जहाँ फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देने की मांग उठेगी.
दूसरी तरफ अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो यरुशलम पहुंच रहे हैं, यूएई ने लाल रेखा खींच दी है और इजराइली सेना गाजा में बड़े अभियान की तैयारी में जुटी है. यानी, सितंबर नेतन्याहू के लिए सियासी और रणनीतिक इम्तिहान लेकर आया है.
1. पश्चिमी देशों की मान्यता और इजराइल की प्रतिक्रिया
पेरिस, लंदन, ब्रसेल्स, ओटावा और कैनबरा जैसे अहम पश्चिमी शहर फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता देने की तैयारी में हैं. इसके जवाब में इजराइल के भीतर यह बहस तेज हो गई है कि यहूदा और शमरोन (पश्चिमी तट) के बड़े हिस्से को अपने अधिकार क्षेत्र में शामिल कर लिया जाए.
2. वेस्ट बैंक पर कंट्रोल को लेकर बहस
इसी बीच, वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच ने यहूदा और शमरोन (वेस्ट बैंक) के बड़े हिस्से को इजराइल में मिलाने की योजना पेश कर दी है. इस योजना के मुताबिक बड़े फिलिस्तीनी शहर रामल्ला, नाबलुस, हेब्रोन, जेरिको, जेनिन और तुल्करम फिलिस्तीनी अथॉरिटी के अधीन रहेंगे, लेकिन बाकी जमीन इजराइल के अधीन जाएगी.
संयुक्त अरब अमीरात ने साफ कहा है कि अगर इजराइल एनेक्सेशन करता है तो अब्राहम समझौता खतरे में पड़ जाएगा. याद रहे कि 2020 में यही समझौता इस शर्त पर हुआ था कि इजराइल अधिग्रहण को रोक देगा. अब दोबारा उसी मुद्दे को छेड़ने से पाँच साल की कूटनीतिक उपलब्धि दांव पर लग सकती है.
3. अमेरिका की भूमिका पर भी उठते सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अमेरिका क्या रुख अपनाएगा. विदेश मंत्री मार्को रुबियो इसी महीने 14 सितंबर को यरुशलम आने वाले हैं. उनके दौरे में ये मुद्दा जरूर उठेगा. कुछ इजराइली अधिकारियों को लगता है कि इस बार अमेरिका रोक नहीं लगाएगा, क्योंकि वह यूरोप के फिलिस्तीनी राज्य मान्यता अभियान से नाराज है. लेकिन दूसरी ओर, वॉशिंगटन के कुछ सलाहकार चेतावनी दे रहे हैं कि एनेक्सेशन से अरब देशों के साथ तालमेल बिगड़ सकता है और सऊदी अरब के साथ संभावित रिश्ते भी खतरे में पड़ जाएंगे.
4. गाजा पर सैन्य अभियान
इसी दौरान गाजा सिटी में हमास के खिलाफ़ बड़े सैन्य अभियान की भी तैयारी हो रही है. अगर यह ऑपरेशन संयुक्त राष्ट्र महासभा के समय ही होता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और ज्यादा विवाद खड़ा कर सकता है.नेतन्याहू की रणनीति अब इस बात पर टिकी है कि कब और कैसे कोई बड़ा फैसला लिया जाए. जल्दीबाजी से इजराइल यूरोप और अरब देशों दोनों के निशाने पर आ सकता है. लेकिन देरी करने से घरेलू दबाव बढ़ सकता है.
सितंबर का महीना नेतन्याहू के लिए इम्तिहान जैसा क्यों होगा? 4 प्वाइंट में समझिए
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